शिवपाल को अब तक मिली एक सीट, क्या इसी 'सम्मान' के लिए अखिलेश के लिए दी थी कुर्बानी
लखनऊ, 8 फरवरी: उत्तर प्रदेश में चुनाव का माहौल पूरी तरह से गरम चल रहा है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव और समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा है। इटावा में अपने एक कार्यक्रम के दौरान शिवपाल ने साफतौर पर कहा कि अखिलेश ने उन्हें केवल एक सीट तक सीमित कर दिया है। शिवपाल ने जिस उम्मीद के साथ अखिलेश को नेता माना था वह सब धराशायी होती नजर आ रही हैं। शिवपाल के किसी चहते को अखिलेश ने अब तक टिकट नहीं दिया है। चूंकि प्रसपा के उम्मीदवार सपा के ही सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे लेकिन शिवपाल की जसवंत नगर के अलावा अखिलेश ने कोई सीट उन्हें नहीं दी है। तो क्या सिर्फ एक सीट के लिए शिवपाल ने अखिलेश के लिए कुर्बानी दी थी।

शिवपाल का समय सही नहीं चह रहा
समाजवादी पार्टी के साथ शिवपाल यादव का इस समय ठीक नहीं चल रहा है। वे अपने-आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। इसका कारण है कि समाजवादी पार्टी ने अंतिम में 15 सीटें देने की बात कहकर सिर्फ एक सीट पर सिमटा दिया, जबकि उनकी भाजपा के साथ 20 सीटों पर बात हो चुकी थी। छह सीटों की सूची तो शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव को सौंप भी दी थी, जिस पर उनकी स्वीकारोक्ति भी मिल गयी थी। अब सवाल यह है कि शिवपाल यादव ने क्या इसी सम्मान के लिए अपने सपनों की कुर्बानी दी थी।

बात हुई 15 सीटों की लेकिन मिली सिर्फ एक सीट
प्रसपा के शिर्षस्थ सूत्रों के अनुसार पहले भाजपा के साथ शिवपाल यादव की 20 सीटों पर बात हुई थी। भाजपा के साथ अंतिम दौर की बात के बाद जिस दिन उन्हें जाना था, उसी से दो दिन पूर्व अखिलेश यादव को जानकारी हुई और वे लाव लश्कर के साथ शिवपाल यादव के आवास पर पहुंच गये। इसके बाद शिवपाल के पत्नी और बच्चे ने दूसरी जगह उन्हें जाने से रोक दिया। शिवपाल की बिना संयुक्त प्रेसवार्ता के समाजवादी पार्टी में जाने की इच्छा नहीं थी लेकिन पत्नी और बच्चे के आगे उन्हें झुकना पड़ा और अपने परिवार के साथ ही रहने का फैसला किया। उस बैठक में अखिलेश यादव ने 15 सीटें अंतिम तौर पर देने का वादा किया था।
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शिवपाल ने जिन सीटों डिमांड की वह अखिलेश ने अपने उम्मीदवारों को दी
इसी के बाद शिवपाल यादव ने भाजपा में जाने की बात की मीडिया में चल रही अटकलों का खंडन किया और समाजवादी पार्टी के साथ ही बने रहने की बात कही, लेकिन वे इसकी घोषणा करने के बाद पत्नी और बच्चों के कहने पर फंस गये। फिर वे कई बार अखिलेश यादव से बात करने की कोशिश करते रहे लेकिन एक-एक कर उनके द्वारा मांगी गयी सीटों पर ही समाजवादी पार्टी टिकट देती गयी। गाजीपुर जिले की जहूरबाद से सादाब फातिमा हों या फिर लखनऊ सीट के लिए शारदाप्रताप शुक्ला। अखिलेश ने शिवपाल के किसी खास को अब तक टिकट नहीं दिया है।

नाराजगी की वजह से कोई हुआ बागी तो किसी ने पकड़ा दूसरे दल का साथ
शिवपाल यादव द्वारा दी गयी सूची में सबसे ऊपर सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र से शारदा प्रसाद शुक्ल का था। जब वहां से भी समाजवादी पार्टी ने अभिषेक मिश्रा को टिकट दे दिया तो शिवपाल यादव की अंतिम उम्मीद भी खत्म हो गयी। अब सूत्रों के अनुसार शिवपाल चुनाव बाद अंतिम निर्णय लेंगे, क्योंकि अब किसी निर्णय से चुनाव तक कुछ भी नहीं होना है। अखिलेश के सामने शिवपाल की बेबसी देखकर उनके करीबियों ने अपना ठौर ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया है। जहूराबाद से जहां सपा के सहयोगी सुभासपा के चीफ ओम प्रकाश राजभर चनुाव लड़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर शिवपाल की करीब सादाब फातिमा ने यहां निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है जिससे राजभर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी तरह लखनऊ की सरोजनीनगर सीट पर शिवपाल के खास शारदा प्रताप की जगह अखिलेश ने पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा पर दांव लगा दिया। इससे नाराज शारदा ने अगले दिन ही बीजेपी का दामन थाम लिया।












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