'यादव सरनेम वाले पुलिसकर्मियों को किया जा रहा सस्पेंड, लाइन हाजिर'
विवाद बढ़ जाने के बाद हिमांशु कुमार ने अपना ट्वीट हटा लिया। इसके बाद आईपीएस कुमार ने दूसरा ट्वीट कर सफाई देते हुए लिखा कि मेरे ट्वीट का गलत मतलब निकाल लिया गया।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद अफसरों के तबादले में यादव जाति के लोगों को निशाना बनाए जाने की बात कह कर आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने खलबली मचा दी है। लखनऊ में पुलिस मुख्यालय में तैनात आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने ट्वीट कर ये बात कही, हालांकि बाद में उन्होंने सफाई भी दी।

कुमार ने ट्वीट कर लिखा कि 'यादव' सरनेम वाले पुलिसकर्मीयों के ट्रांसफर/पोस्टिंग को लेकर अधिकारियों में अफरातफरी मची है। उन्होंने कहा है कि पुलिस पर भारी दबाव है। सभी 'यादव' सरनेम वाले पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर/पोस्टिंग को लेकर हड़कंप की स्थिति है। उन्हें डर है या तो सस्पेंड किया जाएगा या फिर लाइन हाजिर कर दिया जाएगा। ट्वीट वायरल होने और इस पर एकदम से विवाद बढ़ जाने के बाद हिमांशु ने अपना ट्वीट हटा लिया।

आईपीएस के ट्वीट को लेकर सपा ने साधा भाजपा सरकार पर निशाना
इसके बाद विवाद को देखकर आईपीएस कुमार ने दूसरा ट्वीट कर सफाई देते हुए लिखा कि मेरे ट्वीट का गलत मतलब निकाल लिया गया, मैं सरकार की पहल का स्वागत करता हूं। सपा के कई नेताओं ने भाजपा सरकार पर सत्ता में आते ही तानाशाही रुख अपना लेने की बात कही है। ट्विटर पर भी कई लोगों ने हुमांशु कुमार का समर्थन किया है तो कई यूजर्स ने उनके इस तरह से सरकार पर जाति के आधार पर तबादलों को लेकर निशाना साधने की आलोचना की है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश चुनाव के प्रचार के दौरान पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सपा सरकार पर जाहिरा और गैर-जाहिरा तौर पर यादव जाति के लोगों को लाभ देने का आरोप लगाया था। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा की सरकार आने पर यादव जाति के अफसरों को तबादलों का सामना करना पड़ सकता है।












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