यूपी: वैज्ञानिकों ने खोजा एक चमत्कारिक कपड़ा, सोख लेगा पानी की पूरी-पूरी गंदगी
कानपुर। उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने गंगा को साफ रखने में मददगार एक चमत्कारी तकनीक ईजाद की है। उन्होंने एक ऐसा कपड़ा तैयार किया है जो कल-कारखानों और थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी से जहरीले पदार्थ सोख लेगा और गंगा में शोधित पानी ही जाने देगा।

केन्द्र सरकार ने नमामि गंगे परियोजना की कार्यदायी संस्थाओं में जब आईआईटी कानपुर को शामिल करने का ऐलान किया था तब किसी ने सोचा भी न होगा कि आम तौर पर उपेक्षित रहने वाला यूपीटीटीआई यानि उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान एक छुपा रूस्तम साबित होगा। जब आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिक अपनी बड़ी-बड़ी रिसर्च के जरिये गंगा साफ करने की तकनीक खोज रहे हैं, तब चुपके से एक टेक्सटाइल इंजीनियर ने भी ऐसा इलेक्ट्रिक कंडक्टर पॉलीमर खोज निकाला। जिसका लेप चढ़ा कपड़ा पानी से जहरीले रसायन खींच लेने का काम करेगा। शोधकर्ता ने अपने लैब टेस्ट में साबित किया है कि किसी भी दूषित पानी में यह कपड़ा डालते ही वो इसके रासायनिक तत्व और भारी धातुओं सोख लेता है।

टेक्सटाइल इंजीनियर शुभांकर मैती की मानें तो मलमल के महीन रेशे पानी में मिले कणों को अलग कर देते थे। वाटर प्यूरीफायर के बाजार में आने से पहले घर-घर मलमल के कपड़े को नल की टोटिंयों में बॉधा जाता था। लेकिन यूपीटीटीआई में बना काले रंग का यह पालीमर क्रोमियम, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम और मरकरी जैसी भारी धातुओं और खतरनाक बैक्टीरिया को पानी से अलग कर देगा। देश के पर्यावरणविद् लम्बे अर्से से थर्मल पावर प्लांट के खिलाफ आन्दोलनरत हैं।
एक सर्वे के मुताबिक इन पावर प्लांट की चिमनियों से हवा को प्रदूषित करने वाले तेरह हजार टन पार्टिकल्स निकल रहे हैं तो वहीं बेहिसाब राखयुक्त पानी भूगर्भ में उड़ेला जा रहा है। यह लोगों के पीने का पानी जहरीला बना रहा है तो वहीं की उर्वरा शक्ति नाश कर रहा है। ऑकड़ों के मुताबिक देश के थर्मल पावर प्लांटों के आसपास के क्षेत्रों में सवा करोड़ की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। पनकी थर्मल पावर स्टेशन के कारण कानपुर भी इस आपदा से जूझता रहा है। अब यूपीटीटीआई का दावा है कि इस कपड़े से थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले राखयुक्त पानी को भी छाना जा सकता है।












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