सावन विशेष: गंगा मां खुद आकर यहां कराती हैं भगवान दशाश्वमेघश्वर महादेव को स्नान
वाराणसी। सावन का महीना जिसे भोलेनाथ की आराधना के लिए जाना जाता है। इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे सुगम रास्ता जलाभिषेक का है। पूरे देश में सावन माह में श्रद्धालु शिवलिंग पर अपनी आस्था प्रकट कर देवों के देव महादेव को प्रसन्न कर मनोवांछित फल की प्राप्ति करते है। इसी में एक है वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर खुद ब्रह्मा के हाथ से स्थापित दशाश्वमेघश्वर महादेव का मंदिर।

मंदिर के महंत पंडित शिव प्रसाद पांडे की माने तो इस स्थान पर अश्वमेध यज्ञ की शुरुआत की जाती थी। लेकिन किसी न किसी कारणों से वह अश्वमेध यज्ञ रूक जाया करता था। इस बात की जानकारी जब भगवान ब्रह्मा को हुई तो वह खुद दशाश्वमेध घाट पर आए। उन्होंने अपने अश्वमेध यज्ञ की शुरुआत करने से पहले दशाश्वमेधश्वर महादेव के रूप में शिवलिंग की स्थापना की और जलाभिषेक कर अश्वमेध यज्ञ प्रारंभ किया। कहा जाता है कि उसके बाद भगवान ब्रह्मा ने इस स्थान पर 10 अश्वमेध यज्ञ किए।

अश्वमेध यज्ञ करने के कारण पड़ा स्थल का नाम दशाश्वमेघश्वर
भगवान ब्रह्मा ने इस स्थल पर अश्वमेध यज्ञ किया और भगवान भोले नाथ के शिवलिंग को भी स्थापित किया। जिस कारण इस स्थल का नाम दशाश्वमेध तीर्थ पड़ा। महंत शिव प्रसाद पांडे ने बताया की इस शिवलिंग पर सहस्त्रधारा का यंत्र लगा हुआ है जो भी भक्त इस स्थान पर गंगाजल लाकर उस सहस्त्रधारा में भरता है और जैसे ही भगवान शिव के ऊपर सहस्त्रधारा पड़ती है उसे एक हजार रुद्राभिषेक करने का लाभ मिलता है और साथ ही साथ अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति होता है।
गंगा मां खुद आकर कराती हैं महादेव को स्नान
महंत पंडित शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि वैसे तो काशी के कर कण में शंकर के वास हैं, लेकिन इस शिवलिंग की अपनी एक विशेष मान्यता है। सावन माह में जब गंगा का जल स्तर ऊपर आता है तो मां गंगा खुद भोलेनाथ के इस शिवलिंग का अभिषेक करती है। यही नहीं इस शिव लिंग का सावन माह में देश के कोने-कोने से लोग गंगा स्नान करने के बाद जलाभिषेक करते है।












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