ASP अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर होगी FIR, कोर्ट ने अचानक क्यों दिया ये आदेश?
Sambhal Violence: संभल की जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने तत्कालीन सीओ (CO) और वर्तमान ASP अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश एक युवक को गोली लगने के मामले में पीड़ित परिवार की याचिका पर दिया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है ये पूरा मामला।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भारी हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन के रहने वाले यामीन ने 6 फरवरी 2025 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।
यामीन का आरोप है कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम उस दिन घर से टोस्ट (रस्क) बेचने निकला था। जब वह जामा मस्जिद के पास पहुंचा, तो पुलिसकर्मियों ने उस पर गोली चला दी। पुलिस के डर से आलम का इलाज गुपचुप तरीके से कराया गया। पीड़ित पक्ष के वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि कोर्ट ने उनकी दलीलें स्वीकार करते हुए आरोपी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया है।
विवादों में रहे हैं ASP अनुज चौधरी
इस मामले में नामजद किए गए अनुज चौधरी घटना के समय संभल के सीओ (CO) थे। प्रमोशन के बाद वह वर्तमान में फिरोजाबाद में ASP (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं। वह संभल हिंसा के दौरान अपने एक विवादित बयान '52 शुक्रवार, होली एक है' के कारण भी काफी चर्चा में रहे थे। दूसरे नामजद अधिकारी अनुज तोमर वर्तमान में संभल के चंदौसी कोतवाली के प्रभारी हैं।
संभल हिंसा का पूरा मामला
संभल का यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष ने दावा किया कि जामा मस्जिद असल में हरिहर मंदिर है, जिसे 1529 में बाबर ने तुड़वाकर मस्जिद बनवाई थी।
- 19 नवंबर 2024: कोर्ट ने मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया। उसी दिन शाम को पहला सर्वे हुआ।
- 24 नवंबर 2024: जब सर्वे टीम दोबारा पहुंची, तो बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस पर पथराव शुरू हुआ और देखते ही देखते हिंसा भड़क गई।
- परिणाम: गोली लगने से 4 लोगों की मौत हुई। पुलिस ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत 2,750 से ज्यादा लोगों पर 12 एफआईआर दर्ज कीं और 79 लोगों को गिरफ्तार किया।
SIT की चार्जशीट और कोर्ट का रुख
इस मामले की जांच के लिए गठित SIT ने 18 जून को कोर्ट में 1,128 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें सांसद बर्क समेत 23 लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, अब कोर्ट द्वारा पुलिस अधिकारियों पर ही एफआईआर का आदेश दिए जाने से इस मामले में नया मोड़ आ गया है।












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