Sambhal Shahi Jama Masjid का अयोध्या से कनेक्शन? हिंदुओं के किस मंदिर को तोड़ा, अब सर्वे पर मचा बवाल
Sambhal Jama Masjid History: संभल की शाही जामा मस्जिद इस वक्त सुर्खियों में छाई हुईं हैं। दरअसल, यहां रविवार सुबह सर्वे के लिए पहुंची टीम को देखकर मुस्लिम समाज के लोग भड़क गए। उग्र भीड़ ने टीम के ऊपर पथराव कर दिया और गाड़ियां में आग लगा दी। इस दौरान एसपी के पीआरओ के पैर में गोली भी लग गई और झड़प में दो लोगों की मौत हो गई। उग्र हुई भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहार लिया।
संभल की शाही जामा मस्जिद में यह सर्वे का कार्य कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ था। शाही जामा मस्जिद, शहर के केंद्र में ऊंचे टीले पर कोर्ट पूर्वी इलाके में बनी हुई है। इस मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष की तरफ से कोर्ट में दावा किया गया है कि यह शाही जामा मस्जिद पूर्व में हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष के दाव के सिरे से नाकार दिया है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि शाही जामा मस्जिद का निर्माण 1529 में मीर बेग ने करवाया था, जो मुगल बादशाह बाबर का कमांडर था।

Sambhal Jama Masjid History: संभल जामा मस्जिद इतिहास क्या है?
शाही जामा मस्जिद, संभल जिले में सदियों से खड़ा है और इसको लेकर पहले भी कई बार अलग-अलग दावे किए गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1526 से 1530 के बीच बाबर के शासनकाल के दौरान संभल की जामा मस्जिद बनाई गई थी। संभल आज के समय में मुस्लिम बाहुल्य शहर है, लेकिन हिंदू शास्त्रों में इसका अलग उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि घोर कलयुग के समय में यहां भगवान विष्णु के एक अवतार के रूप में प्रकट होंगे।
क्या है अयोध्या से संभल मस्जिद का कनेक्शन?
बाबर के शासनकाल के दौरान बनाई गई 3 मस्जिदों में से एक संभल की शाही जामा मस्जिद भी है। अन्य दो मस्जिदों में एक पानीपत की मस्जिद है और दूसरी अयोध्या में ध्वस्त हो चुकी बाबरी मस्जिद थी। इतिहासकारों के मुताबिक, बाबर ने मीर बाकी को अवध प्रदेश का गवर्नर बनाया था और मीर बाकी ने 1528 में अयोध्या मस्जिद का निर्माण कराया था। संभल की जामा मस्जिद का निर्माण 1529 में कराया गया था। दोनों ही मामलों में हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गईं थी।

मीर बेग उज्बेकिस्तान का रहने वाला था
इतिहासकारों के मुताबिक, मीर बेग को कई नामों से जाना जाता है और वह मूल रूप से उज्बेकिस्तान के शहर ताशकंद का रहने वाला था। इसलिए उसे बाकी ताशकंदी भी कहा गया, जिसका जिक्र बाबर की किताब बाबरनामा में है। उसे बाकी बेग, बाकी शाघावाल और बाकी मिंगबाशी नामों से भी जाना गया।
संभल मस्जिद को लेकर कई दावें
हिंदू पक्ष ने संभल में हरिहर मंदिर को तोड़कर शाही जामा मस्जिद बनाए जाने का दावा किया है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में दायर की याचिका में दावा किया है कि मस्जिद उस जगह पर खड़ी है जो कभी सदियों पुराना हरिहर मंदिर हुआ करता था। उनका तर्क है कि अंदर मंदिर के अवशेष हैं, जिनमें खंभे भी शामिल हैं। वहीं, जामा मस्जिद के अध्यक्ष मोहम्मद जफर ने दावा किया है कि मस्जिद का निर्माण किसी भी मंदिर को तोड़कर नहीं किया गया और न ही यहां किसी मंदिर की कोई निशानी है।
भगवान हरिहर किनका हैं रूप?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हरिहर को भगवान विष्णु और शिव का रूप है। उन्हें शंकरनारायण या शिवकेशव के नाम से भी जाना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार उनका जन्म गुहासुर नामक राक्षस के आक्रमण के जवाब में हुआ था, जो ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने के बाद अजेय हो गया था। puratattva.in के अनुसार, कर्नाटक में 'हरिहर' नाम का एक प्राचीन शहर भगवान हरिहर के अवतार से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने विष्णु और शिव दोनों से गुण प्राप्त करने के बाद गुहासुर को हराने के लिए यहां अवतार लिया था।
कलियुग में होंगे प्रकट
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि भगवान विष्णु पहले ही नौ रूप धारण कर चुके हैं और कलियुग में भगवान कल्कि के रूप में प्रकट होंगे। यह अवतार उत्तर प्रदेश के संभल में होने की भविष्यवाणी की गई है। यहीं पर कल्कि धाम मौजूद है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 फरवरी को श्री कल्कि धाम मंदिर की आधारशिला रखी थी।












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