इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश श्रीनारायण शुक्ला के विरुद्ध महाभियोग चलाने की सिफारिश
इलाहाबाद। लखनऊ मेडिकल कॉलेज घोटाला मामले में फंस चुके इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला के लंबी छुट्टी पर चले जाने के बाद उन को पद से हटाने के लिए अब महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। जस्टिस शुक्ला के विरुद्ध महाभियोग चलाने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कर दी है। महाभियोग चलाने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा गया है। अगर महाभियोग की कार्रवाई होती है तो शुक्ला ऐसे चौथे न्यायाधीश बनेंगे जिनके विरुद्ध महाभियोग की कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि लखनऊ मेडिकल कालेज में एडमिशन पर लगी रोक को जस्टिस शुक्ला ने बहाल किया था कि और अब यही मामला जस्टिस शुक्ला के गले की फांस बन गया है।

क्या है मामला
उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज से इस पूरे मामले के तार जुड़े हैं। दरसल सुप्रीम कोर्ट ने इस कॉलेज को अकादमी सत्र 2017 -18 और 18 - 19 के में एडमीशन पर रोक लगाई थी।एडमीशन पर रोक के बाद कालेज में एडमिशन नहीं किए जा रहे थे और कालेज को बडे वित्तीय घाटे की ओर बढना पड रहा था, लेकिन इसी बीच कॉलेज की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में एडमीशन शुरू करने के लिये एक याचिका दाखिल की गई। याचिका पर सुनवाई जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला ने शुरू की और याचिका निस्तारित करते हुये मेडिकल कॉलेज को 2017 - 18 सत्र के लिए छात्रों को दाखिला देने की इजाजत दे दी थी। इसी इजाजत देने के मामले अब जस्टिस शुक्ला फंस गये हैं।
अब तक तीन जजों पर हुई है महाभियोग की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा जस्टिस श्री नारायण शुक्ला के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश के बाद एक बार फिर से महाभियोग की प्रक्रिया और अब तक हुई महाभियोग की कार्यवाही चर्चा में आ गई है। पिछले 25 सालों की बात करें तो अब तक तीन जजों पर महाभियोग की कार्रवाई हुई है। जिसमें सबसे पहली कार्यवाही 1993 में शीर्ष अदालत के न्यायाधीश वी. रामास्वामी पर हुई थी, जबकि दूसरी कार्रवाई 2011 में सिक्किम उच्च न्यायाल के प्रधान न्यायाधीश पी. डी. दिनाकरन अंतिम बार यानी तीसरी बार कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई हुई थी। हालांकि यह तीनों प्रयास सफल रहे थे और महाभियोग की कार्यवाही के जरिये उन्हें पद से हटाया गया था। हालांकि यह देखना यह दिलचस्प होगा कि अब चौथी बार महाभियोग की कार्यवाही किसी जस्टिस पर शुरू होती है तो क्या वह पूरी हो सकेगी।
जांच में मिली है सत्यता
यह मामला जब बढ़ता चला गया और जांच सीबीआई करने लगी तो सीबीआई ने पिछले वर्ष सितंबर माह में इसी मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज इशरत मसरूर कुरेशी सहित छह लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इन पर भ्रष्टाचार और अदालत से कॉलेज के पक्ष में आदेश पारित करने का आरोप था। जब जस्टिस शुक्ला का नाम इस मामले में सामने आया तो तीन जजों की इन हाउस जांच समिति ने तफ्तीश शुरू की, जांच में यह साफ हो गया कि जस्टिस शुक्ला का पेशेवर कदाचार इस मामले में सही नहीं था और आरोप सही हैं ।
छुट्टी पर जस्टिस शुक्ला
तीन जजों की इन हाउस जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने महाभियोग की प्रक्रिया चलाने के लिए सिफारिश की है । फिलहाल जस्टिस शुक्ला लंबी छुट्टी पर हैं और ऐसे में उन्हे महाभियोग द्वारा ही हटाये जाने का विकल्प मौजूद है। दरअसल समिति की रिपोर्ट के बाद जस्टिस शुक्ला के सामने सिर्फ दो ही विकल्प बचे थे एक तो वह खुद ही अपने पद से इस्तीफा दे दें और दूसरा यह कि सरकार जज इंक्वायरी एक्ट 1986 के तहत उनके खिलाफ संसद में महाभियोग ले आए। जस्टिस शुक्ला के छुट्टी पर चले जाने के बाद पहला विकल्प लगभग खत्म हो गया हैं क्योंकि जस्टिस शुक्ला ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है। इसके बाद अब उसी दूसरे विकल्प का इस्तेमाल किया जा रहा है ।
कौन है जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला
श्रीनारायण शुक्ला मूल रूप से इलाहाबाद से ही जुड़े हुए हैं। वर्ष 1983 में इन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से LLB की और एक लंबे समय तक दीवानी के मुकदमों में महारत हासिल की। जस्टिस शुक्ला दीवानी के बड़े वकील माने जाते थे और इनकी कद्दावर वकीलों में गिनती होती थी। जस्टिस शुक्ला की ख्याति फैली तो यह रेलवे सहित कई सरकारी व अर्ध सरकारी संस्थाओं के भी वकील बन गए। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार के एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल भी बने। काफी आगे बढ़ने के बाद अक्टूबर 2005 में श्रीनारायण शुक्ला को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल न्यायाधीश बना दिया गया। 2 साल बाद 10 अगस्त 2007 को श्रीनारायण शुक्ला को स्थाई न्यायाधीश बनाते हुये शपथ दिलाई गई।
फिलहाल जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला अगर जज बने रहते हैं तो वह 17 जुलाई 2020 तक कार्य कर सकेंगे।17 जुलाई 2020 को वह सेवानिवृत्त होंगे।












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