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यूं ही नहीं है मुख्‍तार अंसारी के दिल में CM योगी का खौफ, 16 साल पुरानी है दोनों की दुश्‍मनी, अब होगा...

गाजियाबाद। एक दौर था, जब मुख्‍तार अंसारी का काफिला निकलता था तो ' बाहुबली भैया' के नारे लगते थे। एक लाइन से 20 से 30 एसयूवी गुजरती थीं। सारी गाडि़यों का नंबर 786 पर खत्‍म होते थे। पूरे जिले में किसी की मजाल जो उनके कारंवा के बीच आ जाए। काफिले में भारी ट्रैफिक के बीच भी सिग्‍नल ग्रीन ही रहता था। सिग्‍नल की भी हिम्‍मत नहीं थी कि मुख्‍तार अंसारी को 2 मिनट के लिए रोक सके। आपको यकीन न हो तो उन इलाकों में जाइए और पान या चाय की दुकान पर बैठे पुराने मठाधीश आपको बता देंगे। मुख्‍तार अंसारी जब चलता था तो बॉडीगार्ड और अपने गैंग के बीच सबसे लंबा दिख जाता था। लेकिन आज वो ऐसा नहीं दिखता क्‍योंकि व्‍हीलचेयर पर आ चुका है। जी हां जब पंजाब के रोपड़ जेल से मुख्‍तार को निकालकर यूपी के बांदा जेल में शिफ्ट करने की कवायद शुरू हुई तो मुख्‍तार अंसारी को व्‍हील चेयर पर देखा गया। अब माफिया मुख्तार अंसारी यूपी की जेल में पहुंच चुका है। मुख्तार अंसारी भी इस बात को भली भंती जानता है कि बांदा जेल में उसकी डगर कठिन होगी क्‍योंकि योगी सरकार उसके हर अपराध का हिसाब लेने वाली है। कुछ हिसाब सीएम योगी के व्‍यक्तिगत दुश्‍मनी के हैं।

विस्‍तार से जानिए पूरा मामला

 16 साल पुरानी है योगी और मुख्‍तार की दुश्‍मनी

16 साल पुरानी है योगी और मुख्‍तार की दुश्‍मनी

घटना साल 2005 की है, उस समय मऊ में दंगे हुए थे। उस समय मुख्तार अंसारी खुली गाड़ी में दंगे वाली जगहों पर घूम रहा था। उसपर दंगे भड़काने का आरोप लगा था। उस समय योगी आदित्‍यनाथ गोरखुपर से सांसद हुआ करते थे। 2006 में योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार अंसारी को चुनौती दी थी और कहा था कि वो मऊ दंगे के पीडि़तों को इंसाफ दिला के रहेंगे। वो अपना लाव-लश्‍कर लेकर मऊ के लिए निकल पड़े लेकिन तब न तो यूपी में बीजेपी की सरकार थी और ना ही कोई पैठ, तो योगी आदित्‍यनाथ को दोहरीघाट में ही रोक दिया गया था।

2008 में योगी आदित्‍यनाथ ने फिर मुख्‍तार को ललकारा

2008 में योगी आदित्‍यनाथ ने फिर मुख्‍तार को ललकारा

मऊ दंगों के तीन साल बाद यानी साल 2008 में योगी आदित्‍यनाथ ने मुख्‍तार अंसारी को फिर ललकारा। योगी आदित्‍यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में ऐलान किया कि वो आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे। टाइम तारीख और मकसद सब तय किए लिए गए। 7 सितंबर 2008 को डीएवी डिग्री कॉलेज के मैदान में रैली का आयोजन किया गया। इसमें मुख्‍य वक्‍ता थे योगी आदित्‍यनाथ। रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। उन्हें आजमगढ़ में विरोध की पहले से ही आशंका थी, इसलिए टीम योगी पहले से ही तैयार थी।

योगी आदित्‍यनाथ की गाड़ी पर हुआ था हमला

योगी आदित्‍यनाथ की गाड़ी पर हुआ था हमला

योगी का काफिला जब निकला तो सैकड़ों गाडि़यां पीछे थे। कई सौ मोटरसाइकिलें भी योगी योगी के नारे लगा रहे थे। योगी अपने काफिले में सातवें नंबर की लाल एसयूवी में बैठे थे। एक पत्थर काफिले में मौजूद सातवीं गाड़ी यानि उस समय के सांसद और आज के मुख्‍यमंत्री योगी के गाड़ी पर लगा। योगी के काफिले पर हमला हो चुका था। हमला सुनियोजित था। उस वक्‍त योगी ने ये सकेंत दे दिया कि हमला मुख्‍तार अंसारी ने करवाया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि काफिले पर लगातार एक पक्ष से गोलियां चल रही थी, गाड़ियों को तोड़ा जा रहा था पुलिस मौन बनी रही।

उसी समय योगी ने कही थी बदले की बात

उसी समय योगी ने कही थी बदले की बात

योगी आदित्‍यनाथ ने उसी समय कहा था कि हम इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे, जिसने भी गोली मारी है अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी तो गोली मारने वालों को जवाब दिया जाएगा उसी भाषा में। आजमगढ़ हमले में कुछ लोगों ने मुख्तार अंसारी का हाथ होने का भी आरोप लगाया था, हालांकि ये सिर्फ आरोप था इसकी पुष्टि कभी नहीं हुई।

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