UP के राज्यसभा चुनाव में सपा के साथ हो सकता है 'खेला'! क्रॉस वोटिंग हुई तो क्या करेंगे अखिलेश
Rajya Sabha elections 2024 in UP: सपा नेता अखिलेश यादव अपने ही पार्टी के विधायकों और सहयोगियों से मिल रही चुनौती की वजह से राज्यसभा चुनाव में उलझ सकते हैं।
सहयोगी दलों ने जिस तरह से मोर्चा खोला है और पार्टी के कुछ विधायकों के क्रॉस वोटिंग की आशंका पैदा हुई है, उससे पार्टी के तीनों उम्मीदवारों को ऊपरी सदन में भेजने की उनकी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

भाजपा का आठवां उम्मीदवार, सपा का संकट 'अपार'!
27 फरवरी को यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। लेकिन, बीजेपी ने आठवें उम्मीदवार के तौर पर संजय सेठ को उतारकर सपा सुप्रीमो का सारा गणित बिगाड़ने का दांव चल दिया है।
यूपी में विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा 7 और सपा के 3 उम्मीदवार राज्यसभा के लिए चुने जा सकते हैं। लेकिन, बीजेपी ने 8वें प्रत्याशी को उतारकर वोटिंग की आवश्यकता खड़ी कर दी है और इसी वजह से समाजवादी पार्टी नेताओं की नींदें उड़ती बताई जा रही हैं।
अपना दल (कमेरावादी) खोल चुका है मोर्चा
पहले अखिलेश पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की नीति से भटकने के लिए सहयोगी अपना दल (कमेरावादी) नेता पल्लवी पटेल के निशाने पर आए थे, जिन्हों साफ एलान कर दिया था कि वह सपा की राज्यसभा प्रत्याशी जया बच्चन और आलोक रंजन की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करतीं।
सपा विधायकों के 'बागी' होने की आशंका
फिर स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी महासचिव पद से इस्तीफा देने की घटना ने उनकी टेंशन बढ़ाई थी। अब चर्चा है कि सपा एमएलए इंद्रजीत सरोज बीजेपी के साथ नई संभावनाएं तलाशने में जुटे हुए हैं। उनके साथ पार्टी के तीन से चार विधायकों के होने की भी अटकलें लग रही हैं।
तथ्य यह है कि सरोज रिश्ते में भाजपा के विधान पार्षद रामचंद्र प्रधान के समधी लगते हैं। कुल मिलाकर सपा के तीन उम्मीदवारों में से रामजी सुमन को छोड़कर दो प्रत्याशियों को लेकर घमासान मचा हुआ है और ऐसे में भाजपा के आठवें उम्मीदवार ने सारा समीकरण ही उलझा दिया है।
कुछ अनुमानों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के करीब एक दर्जन विधायक भाजपा के साथ मिलकर राज्यसभा चुनावों में सपा प्रत्याशी के साथ 'खेला' कर सकते हैं।
क्रॉस वोटिंग से ही बीजेपी के आठवें उम्मीदवार की लगेगी नैया पार
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश और केंद्र दोनों जगह सत्ता में है, इसलिए इसके आठवें प्रत्याशी की जीत प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। यह तभी हो सकता है कि जब विपक्षी खेमे से संजय सेठ के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हो या इस खेमे के विधायकों के मतदान से अनुपस्थिति का रास्ता साफ हो।
सपा भी तलाश सकती है विकल्प
कहा जा रहा है कि जवाबी रणनीति में समाजवादी पार्टी उसके बैकग्राउंड वाले आरएलडी और ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा के विधायकों पर नजरें दौड़ा रही है। पार्टी उन विधायकों को जेल से लाकर वोट करवाने की कानूनी संभावनाएं भी तलाशने में जुटी है, जिससे उसका संकट दूर हो सकता है।
इन विधायकों में कानपुर से एमएलए इरफान सोलंकी और आजमगढ़ के एमएलए रमाकांत यादव समेत सुभासपा के मऊ विधायक अब्बास अंसारी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
यूपी से राज्यसभा के उम्मीदवार
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा के लिए जया बच्चन, आलोक रंजन और रामजी सुमन को टिकट दिया है। इनमें से पहले दो नाम ने अखिलेश यादव की सियासी दांव का राजनीतिक बेड़ा गर्क करना शुरू कर दिया है।
वहीं संजय सेठ के अलावा बीजेपी के अन्य सात उम्मीदवारों में सुधांशु त्रिवेदी, नवीन जैन, आरपीएन सिंह, चौधरी तेजवीर सिंह, संगीता बलवंत, अमरपाल मौर्य और साधना सिंह शामिल हैं।












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