Rajdhani Express: रेल ट्रैक पर लकड़ी के ब्लॉक अर्थिंग वायर से बंधे– ISI लिंक की आहट? लोको पायलट ने बचाई जान
Rajdhani Express Incident: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में 19 मई की रात को एक सनसनीखेज घटना घटी। दिल्ली से डिब्रूगढ़ जा रही 20504 राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट को पटरियों पर लकड़ी के ब्लॉक और अर्थिंग वायर से बनाया गया एक अवरोध दिखा। उनकी सतर्कता ने सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली।
राजधानी एक्सप्रेस के थोड़ी देर बाद उसी ट्रैक पर काठगोदाम एक्सप्रेस (15044) आ रही थी। उसी स्थान पर उसे भी पटरी से उतारने की साजिश थी, लेकिन फिर से लोको पायलट की सजगता ने एक बड़ा हादसा टाल दिया। आइए समझें क्या थी पूरी साजिश ...

क्या है पूरी साजिश?
पुलिस के अनुसार, अज्ञात बदमाशों ने दलेलनगर और उमरताली स्टेशन के बीच पटरी पर अवरोधक लगाए थे। यह कोई सामान्य शरारत नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास था - खासकर उस समय जब भारत में जासूसी गतिविधियाँ, आतंकी हमले और पाकिस्तान से तनाव चरम पर हैं।
अब समझतें हैं सनसनीखेज खबर, एपिसोड में पूरी कहानी...
सीन 1: हरदोई की रात... और पटरी पर एक साजिश
19 मई की रात, उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक ट्रेन दौड़ रही थी - राजधानी एक्सप्रेस (20504) - जो दिल्ली से डिब्रूगढ़ की ओर सरपट बढ़ रही थी। मगर, किसी को अंदाजा नहीं था कि दलेलनगर और उमरताली स्टेशनों के बीच, पटरी पर एक 'मौत का जाल' बिछाया जा चुका था। लोको पायलट की पैनी नजर पड़ी - ट्रैक पर कुछ गड़बड़ है।
- आपातकालीन ब्रेक लग गया
- ट्रेन थम गई
- लोको पायलट नीचे उतरा... और जो देखा, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
'रेल-ट्रैक स्लीपर सेल'?
पुलिस जांच में सामने आया कि लकड़ी के ब्लॉक ट्रैक पर अर्थिंग वायर से बांधे गए थे। किसी शातिर दिमाग ने सटीक प्लानिंग के साथ उन्हें ऐसे रखा था कि ट्रेन की पटरी से उतरने की गारंटी थी।
और यहीं नहीं रुका मामला...
राजधानी एक्सप्रेस के पीछे आ रही काठगोदाम एक्सप्रेस (15044) को भी ठीक उसी जगह निशाना बनाने की कोशिश की गई। सवाल ये नहीं कि ये कौन कर रहा है, सवाल ये है कि - किसके कहने पर?
ट्रेनें सिर्फ मेटल नहीं, अब जंग का मैदान हैं
भारत-पाक तनाव, सीमा पार से चल रही नैरेटिव वॉर, और एक के बाद एक जासूसों की गिरफ्तारी - ऐसे समय में राजधानी जैसी हाई-प्रोफाइल ट्रेनों को टारगेट करना एक बड़ी चेतावनी है।
क्या यह सब 'घरेलू असंतोष' की कहानी है? या फिर पर्दे के पीछे कोई ISI-प्रेरित रेल स्लीपर-सेल सक्रिय है?
फ्लैशबैक: जौनपुर से भी आई थी रेल पटरी साजिश की गूंज
मई की शुरुआत में, जौनपुर के औंका गांव में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें से एक था- अफजल अली उर्फ सोनू। इन दोनों ने रेलवे ट्रैक पर स्टील ड्रम रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की थी। अब सवाल उठता है कि क्या ये एकल घटनाएं हैं या एक पैटर्न? क्या ISI भारत के भीतर रेलवे ट्रैक नेटवर्क को 'टेरर स्ट्राइक जोन' में तब्दील कर रहा है?
साजिश की जमीनी स्क्रिप्ट - स्लीपर एजेंट्स का नेटवर्क?
| क्रमांक | घटना | स्थान | साजिश | नाकामी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | हरदोई | दलेलनगर-उमरताली | लकड़ी के ब्लॉक से अवरोध | लोको पायलट ने देख लिया |
| 2 | जौनपुर | औंका गांव | स्टील ड्रम ट्रैक पर | RPF ने समय पर हटा लिया |
| 3 | सुल्तानपुर | सराय हरखू-कृष्ण नगर | ड्रम ट्रैक पर मिला | ट्रैक साफ, आरोपियों की गिरफ्तारी |
स्लीपर-सेल्स का 'रेलवे मॉडल'?
रेलवे नेटवर्क के ज़रिए पूरे देश को जोड़ने वाली ट्रेनों पर हमले का मतलब है-
- अराजकता
- जनता में भय
- प्रशासन में अस्थिरता
- सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डालना
ISI के 'नैरेटिव वॉरफेयर' मॉडल में अब ट्रेनें सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि पैनिक जनरेटर बन चुकी हैं।
हरदोई में तैनात हुए RPF, पुलिस फोर्स
पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने खुद मौके का मुआयना किया। GRP, RPF की जॉइंट टीम गठित कर दी गई है। स्थानीय मुस्लिम बाहुल्य गांवों और हाल के दिनों में पाकिस्तान से ऑनलाइन संपर्क रखने वालों पर निगरानी तेज कर दी गई है।
अंदर की बात - क्या 'रेल नेटवर्क' अगला टारगेट है?
ISI द्वारा रची जा रही कथित 'रेल आतंक' स्क्रिप्ट' का मकसद हो सकता है-
- देश में अराजकता फैलाना
- धार्मिक स्थलों के अलावा अब आम यात्रियों को भी निशाना बनाना
- ISI के लिए काम कर रहे 'लोकल एजेंट्स' को रियल-टाइम टेस्ट करना
OneIndia का अलर्ट: क्या आप जागरूक हैं?
- रेलवे स्टेशन या ट्रैक पर कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखे तो तुरंत 139 या 112 पर सूचना दें।
- लो-ट्रैफिक रूट्स पर सफर करते समय सतर्क रहें।
- CCTV, बायोमैट्रिक और ड्रोन सर्विलांस सिस्टम को अपग्रेड करने की मांग उठाएं।












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