Lok Sabha Election: अमेठी में फिर राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी? 2024 में कैसा होगा मुकाबला?
Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 होने में अभी लगभग आठ महीने का समय बाकी है लेकिन अचानक से उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट चर्चा में आ गई है। इसकी वजह है कि यूपी में कांग्रेस की कमान संभालते ही पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष अजय राय ने शुक्रवार (18 अगस्त) को दावा कर डाला कि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2024 अमेठी से लड़ेंगे।
कांग्रेस का गढ़ और नेहरू गांधी परिवार की परंपरागत अमेठी सीट पर 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को जबरदस्त शिकस्त दी थी और कांग्रेस के अजेय किले को भेदा था। वहीं अजय राय के बयान के बाद संभावना है कि 2024 में आगामी लोक सभा चुनाव में स्मृति ईरानी और राहुल गांधी अमेठी सीट पर फिर से आमने-सामने होंगे। आइए जानते हैं 2024 में कैसा होगा मुकाबला?

2019 में स्मृति ईरानी ने रचा था इतिहास
गौरतलब है कि अमेठी लोकसभा सीट पर कांग्रेस अब तक केवल दो ही बार हारी है। पहली बार गांधी परिवार के बेटे संजय गांधी को जनता पार्टी के उम्मीदवार रवींद्र प्रताप सिंह ने हराया था। वहीं इसमे सालों बाद 2019 में भाजपा नेता स्मृती ईरानी ने गांधी परिवार के वारिस राहुल गांधी को हरा कर इतिहास रचा था।
सही मायने में स्मृति ईरानी को राजनीति में पहचान इसी अमेठी सीट से मिली है। इसकी वजह है कि अमेठी सांसद स्मृति ईरानी लगातार अमेठी क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी सियासी जमीन लगातार मजबूत करने में जुटी हुई हैं। केंद्र सरकार और योगी सरकार की योजनाएं का लाभ लोगों को दिलवा रही हैं और सरकार के कार्यो का जमकर प्रचार कर रही हैं।
स्मृति ईरानी का मजबूत दुर्ग अमेठी
सच पूछे तो अमेठी स्मृति ईरानी का मजबूत दुर्ग बन चुका है। इतना ही नही ये स्मृति ईरानी ही हैं जिन्होंने अमेठी के लोगों को कांग्रेस से वर्षों पुराना मोहभंग किया है। वहीं सांसद बनने के बाद लोकसभा हो या अमेठी की सड़क स्मृति ईरानी ने लगातार अपने भाषणों में कांग्रेस नेता राहुल का ऐसा घेरती रहीं है ताकि राहुल गांधी भूल कर भी अमेठी से वो दोबारा चुनाव लड़ने की ना सोचें। ऐसे में राहुल गांधी को 2024 चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिलने की संभावना है।
राहुल गांधी के सामने क्या होगी चुनौती?
लोकसभा चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी अमेठी में महज दो बार नजर आए, ऐसे में उनकी अनुपस्थिति उनके लिए आगामी चुनाव में बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। याद रहे भाजपा सांसद स्मृति ईरानी ने पिछले चुनाव में ही राहुल गांधी की अमेठी में अनुपस्थिति को लेकर यहां की जनता को विश्वास दिला दिया था कि राहुल को उनकी कोई फिक्र नही है।
जिसका लाभ भाजपा की स्मृति को हुआ और वो राहुल गांधी को हराने में कामयाब हुईं थीं। 2019 में स्मृति की जीत की प्रमुख वजह राहुल गांधी की लगातार अमेठी से अनुपस्थिति और ईरानी के महिला कार्ड ने कारगर साबित हुआ था। ऐसे में राहुल गांधी को अमेठी की जनता का दोबारा विश्वास जीत पाना बड़ी चुनौती होगी।
क्यों कांग्रेस अमेठी से राहुल को लड़ाना चाहती है चुनाव?
2019 में हारने के बाद राहुल गांधी मुश्किल से दाे बार अमेठी आए हैं लेकिन कांग्रेस नेता काफी सक्रिय हैं और वो इसी उम्मीद पर जनता के बीच बने रहे कि राहुल गांधी 2024 में अमेठी सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं कोरोना काल में राहुल गांधी ने अमेठी राहत सामग्री भेजी थी। इसके अलावा भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी की इमेज बदली है, ऐसे में कांग्रेस को लग रहा है कि अमेठी सीट पर राहुल गांधी की बदौलत वो चुनाव जीत जाएगी।
अमेठी लोकसभा सीट के पिछले चुनाव परिणाम
2014 में भी अमेठी सीट से राहुल गांधी और भाजपा नेता स्मृति ईरानी आम चुनाव में आमने-सामने थीं हालांकि राहुल गांधी ने इस सीट से जीत की हैट्रिक लगाते हुए 4,08651 वोट हासिल किए थे वहीं स्मृति ईरानी को 3,00,748 वोट मिले थे। इस हार से स्मृति ईरानी का मनोबल कम नहीं हुआ वो चुनाव हारने के बाद भी अमेठी सीट नहीं छोड़ी और यहां के लिए के लिए काम करती रहीं।। जिसका परिणाम ये हुआ कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 55120 वोटों के अंतर से हराकर अमेठी पर कब्जा जमाया था।
2019 में राहुल गांधी ने दो सीटों से लड़ा था चुनाव
राहुल गांधी की 2019 मेंं हार होगी शायद इसका अंदाजा कांग्रेस से पहले रहा होगा तभी तो राहुल गांधी को अमेठी के साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़वाया गया जहां पर जीत हासिल कर उनकी चौथी बार सांसदी बरकरार रही।
स्मृति या राहुल किसकी होगी अमेठी?
लोकसभा चुनाव में यूपी हमेशा से अहम रहा है माना जाता है कि यूपी जिस पार्टी ने फतह कर ली उसके लिए केंद्र की सत्ता का रास्ता खुल जाता है। कांग्रेस जो पिछले लोकसभा चुनावों में लगातार अपनी जमीन गवांई है, यहां तक कि अपना पारंपरिक गढ़ अमेठी जैसा मजबूत गढ़ गवां दिया ऐसे में 2024 में ये सीट दोबारा वापस पाना कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।












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