कांग्रेस को एक प्राइवेट कंपनी बता कर छोड़ने वाले दिनेश सिंह कौन हैं
रायबरेली। गांधी और राजनीति का गढ़ कहे जाने वाले जिला रायबरेली में अक्सर राजनीतिक उठापटक चलती रहती है। रायबरेली की जमीन पर एक बार फिर से कांग्रेस की पकड़ कुछ ढीली होने जा रही है। यहां कांग्रेस के कद्दावर नेता और MLC दिनेश प्रताप सिंह अपने भाइयों समेत कांग्रेस छोड़कर रविवार को भाजपा का दामन थामेंगे। उन्होंने आज जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यालय में प्रेस काफ्रेंस में पत्रकारों के सामने यह घोषणा की। रविवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में वे पार्टी में शामिल होंगे। जिले के जीआईसी मैदान में कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। कांग्रेस के दुर्ग में बीजेपी की एक लाख लोगों की भीड़ जुटाकर अपनी ताकत का एहसास करने की मंशा है। साथ ही उन्होंने प्रियंका गांधी पर भी टिकट बंटवारे को लेकर कुछ गंभीर आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने कहा कि वे अगले लोकसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी के सामने भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ना चाहते हैं।

कौन हैं दिनेश प्रताप सिंह, कैसा है उनका राजनीातिक सफर
दिनेश प्रताप सिंह रायबरेली की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने अपना राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी शुरू किया था और एमएलसी का चुनाव लड़े थे लेकिन जीत नहीं सके। इसके बाद उन्होंने बसपा से 2007 में हाथी की सवारी की और तिलोई विधानसभा सीट से चुनाव लड़े लेकिन शायद किस्मत ने उनका यहां पर भी साथ नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने दोबारा कांग्रेस का दामन थाम लिया। दिनेश प्रताप के कांग्रेस में शामिल होते ही किस्मत खुल गई और 2010 में उन्होंने पहली बार विधान परिषद के सदस्य का चुनाव जीता। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर उनके भाई की पत्नी को जीत मिली। इसके बाद 2016 में दोबारा वो एमएलसी बने। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष भी दोबारा उनके परिवार के सदस्य ने जीता और 2017 में उनेक भाई विधायक बने।

कांग्रेस को बताया एक प्राइवेट कंपनी, भाजपा को एक संगठन
कांग्रेस के गढ़ में पंचवटी के नाम से पहचान रखने वाले एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह और उनके भाईयों ने उथल-पुथल मचा कर रखा है। उन्होंने कांग्रेस को एक प्राइवेट कंपनी बताया जबकि भाजपा को एक संगठन साथ ही रायबरेली को कांग्रेस पार्टी की मौज-मस्ती का अड्डा बताया। क्योंकि दिनेश प्रताप सिंह ने आज एक पत्रकार वार्ता में अपने सभी पांचों भाईयों के साथ 21 अप्रैल को भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी है। उन्होंने आज अपना और अपने भाईयों का कांग्रेस द्वारा दिए गए दर्द को भी बयां किया। उन्होने प्रियंका गांधी पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने हमारे भाई राकेश सिंह को टिकट देने के बदले में एक शर्त रखी थी कि मैं अपना एमएलसी पद का इस्तीफा दूं। तभी मै आपके भाई को हरचंदपुर विधानसभा का टिकट दूंगी और इसके लिये मैंने इस्तीफा लिखकर दिया था। साथ ही उस शपथ पत्र की बाकायदा वीडियो ग्राफी कराई गई थी। तब जाकर मेरे भाई को टिकट मिला था। कांग्रेस की तन मन धन से सेवा करने के बाद भी बाद भी मुझे कांग्रेस में मान-सम्मान नहीं मिला।

बीजेपी मौका देगी तो सोनिया गांधी के खिलाफ लडूंगा लोकसभा चुनाव
एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने आज प्रेस वार्ता में भाजपा पार्टी में शामिल होने से पहले यह भी बता दिया कि वह भाजपा में क्यों जा रहे हैं। दिनेश सिंह का मानना है कि रायबरेली में जो भी पार्टी विकास करेगी जनता उसी को अपना सांसद चुनेगी। अगर मैं भाजपा में शामिल होने के बाद इस जिले का विकास करा पाया और भाजपा पार्टी ने मुझे लोकसभा चुनाव का टिकट दिया तो मैं चुनाव जरूर लडूंगा और अगर पार्टी किसी और को यहां से टिकट देती है तो उसकी तन,मन,धन से मदद करुंगा लेकिन अब इस जिले की सीट आराम से किसी को नहीं लेने दूंगा।

रायबरेली की राजनीति में बड़ा नाम
रायबरेली की राजनीति में दिनेश प्रताप सिंह एक बड़ा नाम है आम जनता उन्हें एक अच्छा कूटनीतिक भी मानने लगी है। दिनेश सिंह 2016 में कांग्रेस से एमएलसी का चुनाव जीतने वाले अकेले सदस्य थे। कांग्रेस से लगातार दूसरी बार वो विधान परिषद में चुने गए थे। मौजूदा समय में रायबरेली की जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर उनके भाई अवधेश प्रताप सिंह है। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट भी उनके परिवार के पास दूसरी बार कब्जा जमाया है। इसके अलावा उनके भाई राकेश प्रताप सिंह 2017 के विधानसभा चुनाव में हरचंदपुर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने हैं।

सोनिया के प्रतिनिधी केएल शर्मा से भी हो चुका है विवाद
बता दें कि दिनेश प्रताप सिंह के कांग्रेस से मोहभंग होने के पीछे बड़ी वजह सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा हैं। पिछले साल अप्रैल में ही दिनेश प्रताप ने शर्मा को लेकर बगावत का झंडा उठाते हुए मोर्चा खोल दिया था। दिनेश प्रताप ने किशोरी लाल शर्मा पर जिले में कांग्रेस को खोखला करने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने साफ कहा था कि अब कांग्रेस तय करे कि किशोरी लाल शर्मा कांग्रेस में रहेंगे या फिर दिनेश प्रताप सिंह। इसके बाद कांग्रेस ने दिनेश प्रताप को पार्टी से निलंबित कर दिया था।
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