Prayagraj Mahakumbh 2025: श्रद्धालुओं के लिए बनेंगे 7 रिवर फ्रंट, शाही स्नान की तारीखें तय
यूपी के प्रयागराज में 2025 में होने वाले महाकुंभ को लेकर सरकार ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इसको लेकर मेला प्रशासन और संतों के बीच एक अहम बैठक पिछले दिनों सम्पन्न हुई जिसमें कई अहम फैसले लिए गए।
Prayagraj mahakumbha: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में होने वाले प्रयागराज महाकुंभ को लेकर अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसको लेकर पिछले दिनों प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने देश के 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों साथ बैठक कर उनसे सुझाव मांगे। इस बैठक के दौरान ही महाकुंभ 2025 के शाही स्नान (मुख्य स्नान पर्व) की तारीखें भी तय कर दी गईं।
शाही स्नान की तारीखें तय की गईं
अधिकारियों की माने तो तय कार्यक्रम के अनुसार 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा, 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 29 जनवरी को मौनी अमावस्या, 3 फरवरी को बसंत पंचमी, 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। 13 अखाड़ों द्वारा शाही स्नान 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 29 जनवरी (मौनी अमावस्या) और 3 फरवरी (बसंत पंचमी) को होंगे।

बड़े अधिकारियों ने संतों के साथ की बैठक
संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर की अध्यक्षता में और मेला अधिकारी विजय किरण आनंद की उपस्थिति में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के प्रतिनिधियों और मेला अधिकारियों के बीच हुई पहली बैठक के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
संगम किनारे बनेंगे सात रिवर फ्रंट
विजय किरण आनंद ने बताया कि महाकुंभ 2025 से पहले प्रयागराज की भव्यता को बढ़ाने के लिए सात अलग-अलग रिवर फ्रंट बनाने का प्रस्ताव विकसित किया जा रहा है। जिनकी कुल लंबाई 13.25 किमी होगी।
पयर्टन को बढ़ाने के लिए सक्रिय हुआ प्रशासन
जिले में पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए अक्षयवट, पातालपुरी और सरस्वती कूप कॉरिडोर, लैंडस्केपिंग, साइनेज और प्रवेश द्वार का विकास किया जा रहा है। नागवासुकि, अलोपशंकरी देवी, मनकामेश्वर, पंडिला महादेव, कोटेश्वर महादेव, कल्याणी देवी और तक्षक तीर्थ जैसे कुछ प्रमुख मंदिरों का भी विकास किया जा रहा है।
अखाड़ों के संतों ने भी दिए अहम सुझाव
बैठक में मौजूद संतों ने भी कुछ सुझाव दिये। जूना अखाड़े के महासचिव महंत हरि गिरि ने राम गमन पथ का संकेत चिह्न लगाने, महर्षि भारद्वाज के कार्यों का प्रचार-प्रसार करने, आदि शंकराचार्य का स्थायी द्वार और वेणी माधव की परिक्रमा के लिए उचित मार्ग बनाने का सुझाव दिया है।
जगतगुरुओं के नाम पर रखें जाएं नाम
जगतगुरुओं के नाम पर इलाकों का नाम रखने का भी प्रस्ताव रखा गया। महानिर्वाणी अखाड़े के यमुना पुरी महाराज ने पेशवाई मार्गों से ओवरहेड बिजली के तारों को 100% हटाने का सुझाव दिया।












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