सुल्तानपुर में वर्दी वाले ने पेश की इंसानियत की मिसाल, बेसहारा को दिया ऐसे सहारा...

इसके बाद उन्होंने सिपाही को बुलाया, जेब से रुपए निकालकर दिए कि इन पैसों से बाजार से जाकर इनके मनमुताबिक सामान खरीद लाओ, इसके बाद खुद पुलिस वाले ने अपने हाथों से बेटी के हाथ मजबूत कर दिए।

सुल्तानपुर। समाज में वर्दीधारियों की पहचान अक्सर खबर में खौफ और बर्बरता दर्शाती है लेकिन हर खबर निराश नहीं करती। इंसानियत की मिसाल पेश करती ये खबर है सुल्तानपुर की जहां मानवीय संवेदना में लीन एसआई एसपी सिंह ने जिले में बेसहाराओं को सहारा देते हुए वर्दी पहनकर नेक काम किया है।

Positive News of UP Police in Sultanpur

मां-बेटी की दास्तां सुन पसीज उठा एसआई का दिल

एसआई एसपी सिंह द्वारा इंसानियत की लिखी गई ये कहानी है कि थाना क्षेत्र की ज्ञाना जायसवाल बेटी मोहिनी को लेकर थाने पहुंच गईं। मां-बेटी ने एसआई सिंह को रोते हुए अपनी जो दास्तां सुनाई उसे सुनकर एसआई का दिल पसीज उठा। इसके बाद उन्होंने सिपाही को बुलाया, जेब से रुपए निकालकर दिए कि इन पैसों से बाजार से सिलाई मशीन खरीद कर लाओ। थोड़ी देर में सिपाही मशीन लेकर हाजिर हुआ, जिसे एसआई ने अपने हाथों से मोहिनी को दिया और कहा बेटी अब तुम इससे अपनी मेहनत करके अपना और मां का पेट पाल सकती हो।

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ऐसी है दर्दनाक दास्तां की शुरुआत

दास्तां कुछ यूं है कि गरीबी का दंश झेल रहा ज्ञाना जायसवाल के घर पर 1 जनवरी 2017 को बड़ी अनहोनी ने दस्तक दी। घटना कुछ ये रही कि घर में खाना बनाते समय एकाएक आग के शोले भड़क उठे और कुछ ही पल में सारी गृहस्थी जलकर राख हो गई। जिसे देख मां-बेटी हाथ मलकर रह गईं। उसका कारण ये की पति लायक होता तो गृहस्थी दुबारा भी बनाई जा सकती थी। लेकिन कहने को पति प्रदीप जायसवाल बाहर रहकर कमाता है, और शराब की लत ने उसे और परिवार को तबाह कर रखा है। नतीजतन अब मां-बेटी के आगे गृहस्थी बसाने का कोई सहारा नहीं है।

दयनीय हो गई है हालत

हादसे के बाद फौरी तौर पर कुछ एक सम्मानित व्यक्तियों ने माली मदद कर अपना दायित्व निभाया और फिर हाथ खींच लिया। जाहिर सी बात है जहां पूरी गृहस्थी ही उजड़ गई हो वहां पहली मंजिल पर हर व्यक्ति पेट में उठी आग को ही बुझाएगा, फिर कुछ बनाने की सोंचेगा। यही मां-बेटी ने भी किया, जो मदद मिली उससे पेट की आग को बुझाया और अब अब स्थिती दयनीय हो गई थी। ऐसे में एसआई की इस मदद ने मसीहा बन जीवन जीने का सहारा दे दिया। वो भी ऐसा की हाथ फैलाने की जरूरत ही नहीं। सिलाई मशीन का उपयोग कर अपनी कूवत से सब कुछ बनाया जा सकेगा।

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