पीएम नरेंद्र मोदी पहुंचते हैं काशी तो जरूर करते हैं इस खास नस्ल की गायों की पूजा

इसके पीछे भी बड़ी वजह है क्योंकि अब प्योर देशी गाय करीब-करीब विलुप्त हो चुकी हैं। ऐसे में अब इस नस्ल को गायों को बढ़ावा दिया जा रहा हैं। ये गाय तटीय जिलों में पाई जाती हैं।

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार के अपने काशी दौरे पर 'शहर बनारस' को दिल खोल कर दिया और इस कड़ी में आज पीएम बनारस के करीब 20 किलोमीटर दूर अदलहाट के पास शहंशाहपुर में पशुओं परिक्षेत्र, पशुधन आरोग्य मेले का उद्घाटन और निरीक्षण करने वाले हैं। दरअसल इस मेले में गायों की एक विशेष प्रजाति गंगातीर गाय नस्ल के पालन से लेकर कैटल ब्रीडिंग सेंटर, गोशाला, हॉस्पिटल, आर्टिफि‍शि‍यल इनसि‍म‍िनेशन सेंटर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकापर्ण करने के साथ ही गऊ पूजन भी करेंगे।

ये है वजह...

ये है वजह...

इसके पीछे भी बड़ी वजह है क्योंकि अब प्योर देशी गाय करीब-करीब विलुप्त हो चुकी हैं। ऐसे में अब गंगातीर गाय की नस्ल को बढ़ावा दिया जा रहा हैं। गंगातीर गाय देशी गाय और जर्सी सांडों के स्पर्म से पैदा होने वाली बछिया और बछड़ों की प्रजाति को कहते हैं। ये गाय तटीय जिलों में जैसे बलिया, मिर्जापुर, इलाहाबाद, वाराणसी, गाजीपुर में पाई जाती है। तो आईए जानते हैं क्या खासियत होती है गंगातीर गाय की...

पीएम की है विशेष रुचि

पीएम की है विशेष रुचि

गोशाला एक्सपर्ट सूर्यकांत जालन और चीफ वेटनरी अधिकारी वीबी सिंह ने OneIndia को बताया कि सांडों के स्पर्म को इकट्ठा कर नई तकनीक से गायों से बच्चे को पैदा किया जाएगा, गंगातीर गाय का संवर्धन किया जाएगा। इस प्रजाति की गाय के बच्चे स्वस्थ और सुंदर दिखने के साथ ही शरीर से हष्ट-पुष्ट होते हैं। यही नहीं गंगातीर गय आम गायों से कई ज्यादा मात्रा में दूध देती है। वीबी सिंह कहते हैं की प्रधानमंत्री चाहते हैं की गंगातीर गायों की नस्ल को बढ़ावा दिया जाए, जिससे विलुप्त हो चुकी देशी गायों की कमी को पूरा किया जा सके।

पिछले दौरे में भी की थी गायों की पूजा

पिछले दौरे में भी की थी गायों की पूजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने पिछले दौरे पर विधानसभा चुनाव के समय भी वाराणसी के गड़वाघाट आश्रम में जाकर गाय की पूजा की थी। उस समय चुनाव का वक्त होने और इस आश्रम में ज्यादा तक यादवों के संबंध होने के कारण लोग ये कयास लगा रहे थे की वोट बैंक के खातिर पीएम आश्रम गए थे। जबकि उनके पहुंचने पर वो समसे पहले मठ के महंत से आशीर्वाद लेने के बाद उनके साथ ही गड़वाघाट के गोशाला पहुंचे थे और गऊपुरा की पूरी रस्म निभाते हुए गायों को चारा भी खिलाया था।

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