ओवैसी ने यूपी की इतनी सारी सीटों पर सपा की साइकिल पंक्चर कर दी, खिल गया भाजपा का कमल
लखनऊ, 13 मार्च: शिवसेना नेता संजय राउत ने दावा कर दिया था कि यूपी में भाजपा की जीत में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का रोल है। हालांकि, वन इंडिया ने चुनाव आयोग के आंकड़ों का जो विश्लेषण किया है, उसमें उनके दावों में झोल नजर आ रहा है। लेकिन, यह बात सही है कि अगर एआईएमआईएम यूपी चुनाव में करीब 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारती तो सपा और उसके सहयोगियों के विधायकों की संख्या अच्छी-खासी बढ़ सकती थी और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के एमएलए की तादत कुछ और कम सकती थी। आइए जानते वह कौन सी सीटें हैं, जहां पर ओवैसी की पार्टी ने अखिलेश यादव की साइकिल की टायर पंक्चर कर दी है।

ओवैसी की पार्टी ने कई सीटों पर साइकिल को किया पंक्चर
हैदराबाद के सांसद और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में 95 सीटों पर इसबार अपने उम्मीदवार उतारे थे। उन्होंने एक गठबंधन भी किया था। अगर प्रदेश में हुए चुनाव की ओवरऑल बात करें तो ओवैसी को काफी निराशा हाथ लगी है और उनकी पार्टो को सिर्फ 0.49% वोट मिले हैं, जो कि नोटा से भी कम हैं। हालांकि, 15.02 करोड़ वोटरों वाले देश के सबसे बड़े सूबे में फिर भी उनके प्रत्याशियों को 4.51 लाख वोट मिल गए। लेकिन, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में पार्टी का सिर्फ एक उम्मीदवार ही अपनी जमानत बचा पाया, बाकी तो पूरी तरह से उनके दल की लुटिया ही डूब गई। लेकिन, इस डूबी हुई लुटिया के बावजूद ओवैसी की वजह से समाजवादी पार्टी की कई सीटों पर साइकिल पंक्चर हो गई है।

सिर्फ मुबाकरकपुर में ओवैसी के उम्मीदवार की जमानत बची
ओवैसी की पार्टी ने यूपी में जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे उनमें से सिर्फ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट पर ही एआईएमआईएम के प्रत्याशी की जमानत बची है। वो भी इस वजह से क्योंकि यहां ओवैसी ने बसपा को दो कार्यकाल के सीटिंग विधायक शाह आम उर्फ गुड्डू जमाली को टिकट दिया था। वे पिछले साल नवंबर में ही ओवैसी की पार्टी से जुड़े थे। हालांकि, फिर भी जमाली चौथे नंबर पर रहे हैं। हालांकि, इस सीट पर सपा की साइकिल जीत गई है और उसके उम्मीदवार अखिलेश बीजेपी के प्रत्याशी से लगभग 13% ज्यादा वोट लाए हैं।

ओवैसी ने 7 सीटों पर साइकिल कर दी पंक्चर
लेकिन, चुनाव आयोग के आंकड़ों का विस्तार से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि जमानत गंवाने वाली ओवैसी की पार्टी ने इसके बावजदू कम से कम 7 विधानसभा सीटों पर अखिलेश यादव की साइकिल पंक्चर कर दी है और भाजपा के कमल को खिलना आसान बना दिया है। यानि अगर ओवैसी की पार्टी ने इन 7 सीटों पर इतने मुस्लिम वोट काट ली है कि सपा गठबंधन की अंतिम टैली में ये नंबर उनकी वजह से कम हो गए हैं।

मुरादाबाद (शहर) में जीत सकती थी सपा
उदाहरण के लिए मुरादाबाद (शहर) सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार रितेश कुमार को गुप्ता को कुल 1,48,384 वोट मिले और उन्होंनें समाजवादी पार्टी के मोहम्मद यूसुफ अंसारी को 782 मतों से पराजित कर दिया। अगर, मानकर चलें कि यहां पर ओवैसी के उम्मीदवार वाकी रशीद को मिले 2,661 वोट मुसलमानों के थे और वे सारे के सारे उनके चुनाव मैदान में नहीं रहने पर सपा उम्मीदवार के खाते में जाते तो भाजपा का कमल यहां पर मुरझाना निश्चित था। एआईएमआईएम के अलावा यहां बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी मुस्लिम थे और इससे भी सपा को नुकसान हुआ।

इन सीटों पर भी एआईएमआईएम ने साइकिल की हवा निकाली
इसी तरह बाराबंकी जिले की कुरसी विधानसभा पर भाजपा के मौजूदा विधायक सकेंद्र प्रताप वर्मा सपा के राकेश कुमार वर्मा से सिर्फ 217 वोटों से जीते। यहां पर ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार कुमैल अशरफ खान को 8,541 इतना वोट मिले और ये अगर सपा में जाते तो नतीजा अलग हो जाता। इसी तरह सहारनपुर की नकुड़ सीट पर बीजेपी के मुकेश चौधरी ने सपा के धरम सिंह सैनी को 315 वोटों से हराया। यहां एआईएमआईएम की रिजवाना को 3,593 वोट मिले, जो कमल की जीत का कारण माना जा सकता है।

शाहगंज में निषाद पार्टी को हो गया फायदा
जौनपुर की शाहगंज सीट पर भी यही कहानी दोहरायी गई है। यहां समाजवादी पार्टी के शैलेंद्र यादव ललाई भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के उम्मीदवार रमेश से केवल 719 वोट से हार गए। यहां ओवैसी की पार्टी के मोहम्मद नायब अहमद खान को 8,128 वोट मिले। यहां पर कांग्रेस ने भी मुसलमान उम्मीदवार परवेज आलम को टिकट दिया और उन्हें भी 1,529 वोट मिले हैं।

ओवैसी की वजह से सपा यहां भी हारी
सुल्तानपुर सदर सीट से बीजेपी के विनोद सिंह सपा के अनूप सिंह से सिर्फ 1,009 वोटों के अंतर से चुनाव जीत गए हैं। यहां पर एआईएमआईएम के मोहम्मद मिर्जा अकरम बेग को 5,251 वोट मिले हैं। भदोही की औराई सुरक्षित सीट पर इस बार बीजेपी के सीटिंग विधायक दीनानाथ भास्कर ने समाजवादी पार्टी के अंजनी सरोज को सिर्फ 1,647 वोटों से हराया है। जबकि, यहां पर ओवैसी के उम्मीदवार टेढाई को 2,190 वोट मिले हैं।

बिजनौर सीट पर सपा की सहयोगी को हुआ नुकसान
बिजनौर सीट पर इसी तरह से समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर हो गई है। यहां पर भाजपा प्रत्याशी सुचि ने सपा की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल के नीरज चौधरी को 1,445 वोटों से हराया है। जबकि, इस सीट पर एआईएमआईएम के मोहम्मद मुनीर अहम को 2,290 वोट मिले हैं, जो कि भाजपा की जीत के अंतर से ज्यादा है।

इन सीटों पर बाल-बाल बच गई समाजवादी पार्टी
कुछ ऐसी सीटें भी हैं, जहां पर ओवैसी की पार्टी की वजह से ही समाजवादी पार्टी मुश्किल से जीती है और उसके जीत का अंतर बहुत ही मामूली रहा है। ये सीटें हैं सुल्तानपुर की इसौली, प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज, डुमरियागंज और रामनगर। यहां पर ओवैसी की पार्टी ने अगर थोड़ा सा भी वोट और लिया होता, अखिलेश की साइकिल यहां भी पंक्चर होनी निश्चित थी। वैसे ओवैसी की पार्टी ने पिछले चुनाव के मुकाबले अपना प्रदर्शन जरूर बेहतर किया है। 2017 में उसे सिर्फ 0.24% वोट मिले थे और इस बार वह इससे दोगुनी पाई है।

ओवैसी के सामने कांग्रेस की भी लाज नहीं बची
इस बार यूपी चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने वैसे तो कोई छाप नहीं छोड़ी है, लेकिन फिर भी 58 सीटें ऐसी हैं, जहां वह सिर्फ 95 पर लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवारों से ज्यादा वोट जुटा पाए हैं। सिर्फ 36 सीटों पर ही गांधी-नेहरू परिवार की पार्टी हैदराबाद के सांसद की पार्टी के सामने किसी तरह अपनी लाज बचा सकी है। लेकिन, एक और आंकड़ा है, जो देश को आजादी दिलाने का दावा करने वाली पार्टी को आईना दिखा सकता है। ओवैसी की पार्टी जिन 95 सीटों पर चुनाव लड़ी है, उसमें उसे 4,50,929 वोट मिले हैं। जबकि, उन सीटों पर कांग्रेस तरह-तरह के दावों और वादों के बावजूद और प्रियंका गांधी वाड्रा को चेहरा बनाने पर भी सिर्फ 1,38,533 वोट ही ले पाई है। ये एआईएमआईएम मुकाबले 44% कम वोट है।












Click it and Unblock the Notifications