Opposition alliance: कैसे RLD के चक्कर में उलझ गए अखिलेश यादव, कांग्रेस को छोड़ें या उसके पीछे चलें?
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव बहुत ज्यादा दुविधा में नजर आ रहे हैं। बसपा चीफ मायावती खुद को इस तरह की मुहिम से पहले ही बाहर कर चुकी हैं। समाजवादी पार्टी के सामने असमंजस कांग्रेस को लेकर दिख रहा है।
पिछले शनिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने एक बयान में कहा था कि जो विपक्षी पार्टियां 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, उन्हें 'बड़ा दिल' दिखाना चाहिए। उनके इस बयान का संकेत यही माना जा रहा है कि वह अब कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं, लेकिन सीटों के मामले में दबदबा सपा का ही होना चाहिए।

पहले अखिलेश ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से किया था इनकार
अखिलेश का यह बयान उनके कुछ हफ्ते पहले वाले बयान से अलग है। तब उन्होंने कहा था कि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ना चाहते। यहां तक की सपा ने तो अमेठी में उम्मीदवार देने की तैयारी भी शुरू कर दी थी। अमेठी और रायबरेली सीट कांग्रेस की गढ़ मानी जाती रही है और यहां सपा और बसपा लंबे समय से चुनाव लड़ने से परहेज करते आए हैं। अलबत्ता पिछले चुनाव में राहुल गांधी को भाजपा की स्मृति ईरानी ने अमेठी में फिर भी हरा दिया था।
सपा पर सहयोगी आरएलडी का है दबाव
जानकारी के मुताबिक सपा पर उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल का दबाव है कि बगैर कांग्रेस के कोई भी बीजेपी-विरोधी मोर्चा का मतलब नहीं है। अखिलेश यादव का बदला हुआ बयान उसी संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे पहले यह भी अटकलें लग चुकी हैं कि अब जयंत चौधरी की पार्टी कांग्रेस के साथ भी अपना भविष्य देखने लगी है।
यूपी में कांग्रेस को विपक्षी मोर्चा में होने चाहिए-आरएलडी
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा है, '2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यूपी के मुसलमान कांग्रेस की ओर देख रहे हैं। इसलिए यूपी में कांग्रेस को विपक्षी मोर्चा में होने चाहिए। पश्चिम यूपी में बीजेपी के खिलाफ मुस्लिम, जाट और गुर्जरों का एक जोड़ बन रहा है।'
उनका दावा है कि पश्चिमी यूपी की कम से कम 22 लोकसभा सीटों पर मुसलमानों का 38 से 51 फीसदी वोट है और जाटों का 6 से 12 फीसदी। बदले हालातों में कांग्रेस विपक्षी गठबंधन को भाजपा के खिलाफ मदद कर सकती है।
सपा कांग्रेस को याद दिला रही है 2019 का चुनाव
एक सपा नेता ने बताया, 'कांग्रेस को लगता है कि अगर विपक्षी गठबंधन सत्ता में आता है तो विभिन्न राज्यों से उसके पास सबसे ज्यादा सांसद होंगे और प्रधानमंत्री सिर्फ कांग्रेस से ही बनेगा। इसलिए कांग्रेस यूपी में सपा के साथ सीटों के तालमेल को लेकर किसी भी तरह से समझौता करने के लिए तैयार नहीं हो रही है.......लेकिन, कांग्रेस को यह याद रखना चाहिए कि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह यूपी से सिर्फ एक ही सीट (रायबरेली) जीत पाई थी।'
एंटी-बीजेपी वोट के लिए अखिलेश का संदेश?
एक अन्य सपा नेता ने कहा, 'इस तरह के बयानों से अखिलेश यादव शायद एंटी-बीजेपी वोट को सपा के पक्ष में एकजुट करने की कोशिश कर रहे होंगे। अगर यूपी में अखिलेश यादव की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन में अन्य पार्टियां नहीं शामिल होती हैं, तो यादव के पास यह संदेश देना का मौका होगा कि सिर्फ सपा ही बीजेपी को हराना चाहती है।'
अकेले यूपी के परिणाम से केंद्र में सरकार नहीं बनेगी-कांग्रेस
वहीं यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा, 'अकेले यूपी के परिणाम से केंद्र में सरकार नहीं बनेगी। कांग्रेस बीजेपी को हराने और राहुल गांधी की अगुवाई में अगली सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यूपी में कांग्रेस सभी सीटों के लिए तैयारी कर रही है। अखिलेश यादव को तय करना है कि लोकसभा चुनावों में वह किस विचारधारा के साथ खड़े होना चाहते हैं। जो भी बीजेपी को हराना चाहता है, उसे कांग्रेस का समर्थन करना चाहिए।'
सपा विपक्षी गठबंधन की अगुवाई चाहती है
सपा कैंप का कहना है कि मौजूदा विधानसभा के अलावा पिछले चुनावों को भी देख लिया जाए, यूपी में भाजपा के खिलाफ बाकी विरोधी दलों-बसपा, कांग्रेस, रालोद की तुलना में सबसे मजबूत स्थिति में वही है। इसलिए वह खुद को विपक्षी दलों का स्वाभाविक अगुवा मान रही है।
भविष्य का कुछ भी निश्चित नहीं- आरएलडी नेता
लेकिन, रह-रहकर आरएलडी के बयानों से समाजवादी पार्टी की उलझन बढ़ रही है। पार्टी के एक नेता ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन जारी रहने की बात तो की, साथ ही यह भी कहा है, 'लेकिन, भविष्य का कुछ भी निश्चित नहीं है। हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सपा और आरएलडी के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे।'
'सपा के सहयोगियों को ही ज्यादा फायदा मिला है'
सपा के वरिष्ठ नेता सुधीर पंवार का कहना है, 'अखिलेश यादव ने हर गठबंधन में बड़ा दिल दिखाया है, क्योंकि सपा के सहयोगियों को ही ज्यादा फायदा मिला है। 'बड़ा दिल' दिखाने का उनका आह्वान महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह किसी भी राजनीतिक गठबंधन की पूर्व शर्त है।' उनके मुताबिक यह कांग्रेस पर है कि वह केंद्रीय स्तर पर बीजेपी से लड़ना चाहती है या प्रदेश में अपने भविष्य की संभावनाओं को लेकर क्षेत्रीय दलों से भिड़ना चाहती है।












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