'जेल भेज देना चाहिए था,' रामभद्राचार्य पर अखिलेश का सबसे तीखा बयान, शंकराचार्य पर केस को लेकर सरकार को घेरा

UP News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज हुई FIR को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने FIR को लेकर योगी सरकार की घेराबंदी की है। अखिलेश ने सीधे शब्दों में आरोप लगाया कि सरकार आध्यात्मिक गुरुओं को अपमानित करने के लिए वर्षों पुराने मामलों और गहरी साजिशों का सहारा ले रही है।

लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए सपा चीफ ने तल्ख अंदाज में कहा कि जो सरकार शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोक सकती है, वह किसी भी हद तक जा सकती है।

akhilesh yadav

अखिलेश ने कहा कि, 'अचानक कुछ लोग निकल पड़े हैं सम्मान देने के लिए। जिस समय शिखा को पकड़कर के अपमानित किया जा रहा था, उस समय ये लोग कहां थे? उसी समय उन्हें जाना चाहिए था संगम किनारे। हमारे पूजनीय शंकराचार्य जी, कई दिनों धरने पर बैठे रहे वहां पर। उस समय सर्दी पीक पर थी। अब तक की जो हमारी पूरा इतिहास जो है, पौराणिक व्यवस्था है, सनातनी व्यवस्था में कहीं किसी शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका नहीं गया होगा।'

सपा सुप्रीमो अखिलेश ने आगे कहा कि, 'लेकिन यह पहली बार हुआ है सरकार में कि उन्हें स्नान करने से भी रोका गया, जो हमारी आध्यात्मिकता, हमारे सनातन धर्म की त्रिवेणी है और अब तो यह सरकार एक कदम आगे निकल गई है।'

रामभद्राचार्य को जेल न भेजकर गलती हुई: अखिलेश

सपा चीफ ने जगतगुरु रामभद्राचार्य और सरकार के बीच के संबंधों पर तंज कसते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि, 'यह लगता है कि कभी अंधेरे में या रात में फिल्म देखते हैं बीस साल बाद। हर बात इनको बीस साल बाद पता लगती है। हमारा जो एक पैनलिस्ट था, उसकी बीस साल पुरानी घटना थी। शंकराचार्य जी को बताओ अपमानित करने के लिए कहां से ढूंढ के लाए, किसको ढूंढ के लाए? हालांकि आदरणीय, पूजनीय, सम्मानित आदरणीय रामभद्राचार्य जी के बारे में कुछ नहीं बोलना है। लेकिन अगर उनका चेला है ये, तो मुझसे गलती हुई है। हमने कभी आदरणीय पूजनीय रामभद्राचार्य जी पर 420 का मुकदमा था, वो वापस लिया था। मुझे उन्हें जेल भेज देना चाहिए था और यह बात गलत हो तो बताइए आप? किसी से पूछ लीजिए आप।'

जितनी पीड़ा बढ़ेगी, उतना बढ़ेगा PDA

अखिलेश यादव ने सरकार पर घटिया आरोप लगवाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता चुनाव का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष और धर्मगुरुओं को जितनी पीड़ा दी जाएगी, सपा का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन उतना ही मजबूत होगा।

क्या है पूरा मामला?

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें उस समय बढ़ गईं जब प्रयागराज की एक स्पेशल POCSO कोर्ट ने उनके और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

  • POCSO एक्ट के तहत केस: कोर्ट ने नाबालिग शिष्यों के यौन शोषण के आरोपों के आधार पर झूंसी पुलिस को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
  • गंभीर आरोप: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि माघ मेले के दौरान 14 और 17 साल के दो नाबालिगों के साथ कथित तौर पर गलत काम हुआ है।
  • विवाद की जड़: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले दिनों तब चर्चा में आए थे जब उन्हें संगम में स्नान करने से रोका गया था और उनकी 'शंकराचार्य' की उपाधि को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
  • पुलिस की रिपोर्ट: प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में एक विस्तृत जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी, जिसके बाद जज विनोद कुमार चौरसिया ने FIR के आदेश जारी किए।
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