Noida Clash: हंगामे के बाद देर रात तक चली बैठक, सैलरी हाइक-वीक ऑफ पर अड़े कर्मचारी, क्या निकलेगा समाधान?
Noida Worker Protest : नोएडा के फेज-2 में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुई हिंसक झड़प के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित हाई-लेवल कमेटी ने सोमवार देर रात ग्रेटर नोएडा में श्रमिक प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों के साथ मैराथन बैठक की।
इस बैठक में कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब केवल आश्वासनों से पीछे नहीं हटेंगे। उनकी मांगें अब वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश और सम्मानजनक कार्य स्थितियों पर टिकी हैं।

14 अप्रैल को नोएडा के फेज़ 2 में प्रदर्शनकारी फिर से जमा हो गए और उन्होंने पत्थरबाज़ी की। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।
क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा समय में उन्हें ₹10,000 से ₹15,000 तक ही वेतन मिल रहा है, जो बढ़ती महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर ₹18,000 से ₹20,000 किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों ने हर हफ्ते एक दिन की छुट्टी (वीकली ऑफ), ओवरटाइम का डबल भुगतान और कार्यस्थल पर बेहतर व्यवहार जैसी मांगें भी उठाई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और बेहतर कामकाजी माहौल का भी सवाल है।
हिंसक झड़प के बाद एक्शन मोड में सरकार, बनाई हाई-लेवल कमेटी
स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बनाई गई है, जिसका उद्देश्य मजदूरों की समस्याओं को समझकर समाधान निकालना है। इस कमेटी की अध्यक्षता इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर कर रहे हैं, जबकि इसमें MSME विभाग के अपर मुख्य सचिव, श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव और श्रम आयुक्त समेत कई अधिकारी शामिल हैं। साथ ही श्रमिक संगठनों और इंडस्ट्री बॉडी के प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह दी गई है।
मजदूरों ने उठाए और भी अहम मुद्दे
बैठक के दौरान मजदूरों ने सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि नौकरी की सुरक्षा, श्रम कानूनों के सही तरीके से पालन और सुरक्षित कार्यस्थल की जरूरत पर भी जोर दिया। कई कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा।
जिला प्रशासन का कहना है कि वह पूरी कोशिश कर रहा है कि मामला बातचीत से सुलझाया जाए। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया कई चरणों में चलेगी और अलग-अलग यूनिट्स के कर्मचारियों से भी बातचीत की जाएगी। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि कमेटी जल्द ही अपनी सिफारिशें देगी और मजदूरों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा, साथ ही औद्योगिक शांति भी बनाए रखने की कोशिश होगी।
शांति की अपील और भारी सुरक्षा बल
फिलहाल, यह साफ है कि बातचीत का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में और बैठकों की संभावना है, जिनमें खास तौर पर वेतन वृद्धि जैसे मुद्दों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। इस बीच प्रशासन ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें, काम पर लौटें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। अब देखना होगा कि सरकार और उद्योग जगत मिलकर इस विवाद का समाधान कितनी जल्दी निकाल पाते हैं।












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