नए संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बीजेपी में संभाली अपनी नई जिम्मेदारी, केशव के साथ बनेगी जुगलबंदी ?
लखनऊ, 22 अगस्त: भारतीय जनता पार्टी के लिए अगले लोकसभा का चनाव काफी अहम साबित होने वाला है। इसका अंदाजा बीजेपी के नेताओं को भी है। बीजेपी ने अगले आम चुनाव में यूपी से 75 प्लस सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बीजेपी अपने काम में जुट गई है। इस बीच बीजेपी यूपी के नए महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह ने अपनी नई जिम्मेदारी संभाली है और पार्टी के नए अध्यक्ष की चर्चा के बीच पश्चिम उत्तर प्रदेश में संगठन की एक अहम बैठक में शामिल होकर अपने काम की शुरूआत कर दी।

धर्मपाल ने संभाली संगठन मंत्री की कमान
धर्मपाल ने गाजियाबाद में पार्टी की संगठनात्मक बैठक में भाग लिया, जहां दोनों उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वर्तमान कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव भी मौजूद थे। इस बैठक को नए महासचिव (संगठन) के लिए 'परिचयात्मक बैठक (प्रारंभिक बैठक)' के रूप में लिया गया। पश्चिम यूपी के नेता 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी नेतृत्व की योजना पर चर्चा की।
क्या केशव-धर्मपाल की दिखेगी जुगलबंदी
दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच उपमुख्यमंत्री डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने ट्वीट किया, "संगठन सरकार से बड़ा है (संगठन सरकार से बड़ा है)। इस ट्वीट के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यूपी में उन्हें क्या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है। हालांकि बीजेपी के सूत्रों की माने तो धर्मपाल सिंह से पहले यूपी बीजेपी के संगठन मंत्री रहे सुनील बंसल और केशव मौर्य के बीच तालमेल सही था इसका उदाहरण 2017 का विधानसभा चुनाव है जब बीजेपी ने पहली बार लंबे समय बाद यूपी में सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी।
धर्मपाल के बाद अब घोषित होगा नया प्रदेश अध्यक्ष
हालांकि नए संगठन मंत्री धर्मपाल भी केशव मौर्य की तरह ओबीसी समुदाय से जुड़े हैं। हालांकि केशव को हाल ही में एक और अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। विधानन परिषद में जब स्वतंत्रदेव ने नेता सदन के तौर पर अपना इस्तीफा दिया तो यह कमान स्वामी प्रसाद मौर्य को सौंपी गई। जिसके बाद भी ऐसे कयास लगने शुरू हुए थे कि बीजेपी में एक बार फिर उनका कद बढ़ने वाला है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो ओबीसी संगठन मंत्री के साथ ही ओबीसी अध्यक्ष चुन पाना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि पीछे के रिकॉर्ड दूसरी ओर इशारा कर रहे हैं।
पिछले रिकॉर्ड पर बीजेपी की नजर
हालांकि 2014 के बाद भाजपा के पास लोकसभा चुनाव 2014, 2019 में बीजेपी के पास ब्राह्मण नेता प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर मौजूद था जबकि विधानसभा चुनाव 2017, 2022 में ओबीसी नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। 2014 से पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ज्यादातर पूर्वी उत्तर प्रदेश से हुआ करते थे और महासचिव (संगठन) पश्चिम यूपी से होते थे। धर्मपाल भी उसी समुदाय के हैं। हालांकि संघ उनका मूल संगठन है और वहां जाति कोई फैक्टर नहीं हेाता है।












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