दंगे की आग में जल रहा था मुजफ्फरनगर, फेसबुक पर चैट कर रहे थे एसएसपी

लखनऊ। मौजूदा समय में फेसबुक लोगों के दिलो-दिमाग में किस तरह हावी है इसका उदाहरण तो समय-समय सामने आता रहा है। इसी फेसबुक के नशे से जुड़ा एक अजीबो-गरीब मामला उत्‍तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से आया है। यहां के एक वरिष्‍ठ अधिकारी पर फेसबुक का नशा इस कदर चढ़ गया कि वो अपने सारे कर्तव्‍य भूल गये और परिणाम दंगे के रूप में सामने आया। जी हां हम बात कर रहे हैं दंगा पीडि़त मुजफ्फरनगर जिले के एसएसपी रहे सुभाष चंद्र दुबे की।

एसएसपी सुभाष दुबे के बारे में गृह मंत्रालय को जो सूचना मिली है उसके मुताबिक 1 से 7 सितंबर के बीच जब मुजफ्फरनगर में दंगा भड़क रहा था उस वक्‍त सुभाष चंद्र दुबे की ज्‍यादा सक्रियता फेसबुक पर थी। वह लगातार अपना स्‍टेटस अपडेट और कमेंट पोस्‍ट कर रहे थे। दुबे की यही लापरवाही 15 सितंबर को उनके निलंबन का कारण भी बनी। इसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिये गये हैं। मालूम हो कि 1 से 7 सितंबर के बीच जब मुजफ्फरनगर में दंगा भडक़ रहा था उस वक्त सुभाष चंद्र दुबे की ज्यादातर सक्रियता फेसबुक पर थी।

Muzaffarnagar
उल्‍लेखनीय है कि 28 अगस्‍त को अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एडीजी अरुण कुमार अपने साथ दुबे को लेकर हेलीकॉप्‍टर से सीधे मुजफ्फरनगर पहुंचे। उसी दिन अरुण कुमार ने मीडिया के सामने दुबे की तारीफ की और कहा कि ये बहुत तेज-तर्रार अफसर हैं। अरुण कुमार ने दुबे की पीठ थपथपाते हुए कहा कि 15 दिन में ही मुजफ्फरनगर की हालात बदल देंगे। मगर इसका उल्‍टा हुआ और दुबे की तैनाती के बाद से मुजफ्फनगर के हालात लगातार बिगड़ते चले गए। सात सितंबर को नगला मंदौड़ में हुई महापंचायत के बाद भडक़ी हिंसा के अगले दिन सरकार ने सुभाष चंद्र दुबे को एसएसपी पद से हटा दिया था।
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