Shivpal Yadav को सम्मान देकर क्या Mulayam कुनबे को बिखरने से बचाएंगे Akhilesh Yadav ?

Mulayam Sing Yadav के निधन के बाद अब समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश किस तरह से पारिवार के बीच संतुलन बनाकर पार्टी को आगे लेकर जाएंगे ये बड़ा सवाल है। इससे भी अहम ये है कि आने वाले समय में अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच कैसे रिश्ते बनते हैं। क्या अखिलेश पिता मुलायम सिंह यादव के जाने के बाद चाचा शिवपाल यादव को अपने नजदीक लाने की कोशिश करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश को यदि पार्टी और परिवार दोनों ही मोर्चों पर सफल होना है तो उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने जो तरीका अपनाया था उसी से सबक लेकर उनको आगे बढ़ना होगा। परिवार को सदस्यों को पूरा सम्मान देना होगा हीं तो सबकी महत्वाकांक्षाएं अखिलेश के अभियान पर भारी पड़ सकती हैं।

शिवपाल-अखिलेश के रिश्तों पर रहेगी सबकी नजर

शिवपाल-अखिलेश के रिश्तों पर रहेगी सबकी नजर

नेताजी यानी मुलायम सिंह के निधन के बाद हालांकि अखिलेश और शिवपाल पूरी तरह से एकजुट दिख रहे हैं लेकिन क्या यह एकजुटता अंदरखाने भी है ये एक बड़ा सवाल है। शिवपाल यादव ने बुधवार को जिस तरह से बयान दिया कि अगर सम्मान मिलेगा तो देखा जाएगा नहीं मिला तो ऐसे लोगों को वह एकजुट करेंगे जिनको सम्मान नहीं मिल रहा है। यानी उनके बयान के कई सियासी मायने भी हैं। शिवपाल ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के मन का संसार बड़ा होना चाहिए। इशारों ही इशारों में शिवपाल ने कई बातें कह दीं। आने वाला समय सपा और अखिलेश के लिए अहम होने वाला है। खासतौर से शिवपाल और अखिलेश के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ेंगे इससे यूपी की सियासत पर गहरा असर पड़ेगा।

शिवपाल-अखिलेश के बीच अहम कड़ी थे मुलायम

शिवपाल-अखिलेश के बीच अहम कड़ी थे मुलायम

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पूरा कुनबा शोक में डूबा हुआ है। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से यादव कुनबे में रार मची थी उसके बाद मुलायम ने ही इसको संभाला था। शिवपाल भी हमेशा कहते रहे हैं कि वह नेताजी का बड़ा सम्मान करते हैं। नेताजी तो अब इस दुनिया में चले गए और इसके साथ ही शिवपाल-अखिलेश को जोड़ने वाली कड़ी भी टूट गई। वरिष्ठ पत्रकार विजय उपाध्याय कहते हैं, '' दरअसल शिवपाल-अखिलेश को जोड़ने वाली कड़ी मुलायम ही थे। उनके जाने के बाद अब वह कड़ी टूट गई। इससे इस बात की संभावना ज्यादा है कि अब दोनों के बीच किसी तरह का रिश्ता भविष्य में रहेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।''

अखिलेश ने शिवपाल से दूरी बनाई तो बीजेपी करेगी इस्तेमाल

अखिलेश ने शिवपाल से दूरी बनाई तो बीजेपी करेगी इस्तेमाल

शिवपाल यादव कुछ महीने पहले ही राष्ट्रपति चुनाव के दौरान बगावत कर सपा से अलग हो गए थे। हालांकि अभी भी वह सपा से ही जसवंतनगर से विधायक हैं। लेकिन अब उनकी राहें अखिलेश से अलग हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश को यह बखूबी पता है कि यदि शिवपाल को सम्मान नहीं मिला तो वह बीजेपी के ट्रंप कॉर्ड साबित हो सकते हैं। यादवलैंड और यादव वोट बैंक में सेंधमारी का शिवपाल से अच्छा हथियार बीजेपी को नहीं मिल सकता है। वह अपने तरीके से शिवपाल का इस्तेमाल अखिलेश को कमजोर करने के लिए करेगी। यह अखिलेश को तय करना है कि शिवपाल को सम्मान देकर अपने नजदीक रखना है या उनको खुला छोड़कर अपने लिए मुसीबत मोल लेना है।

अखिलेश को कुनबे पर रखनी होगी पैनी नजर

अखिलेश को कुनबे पर रखनी होगी पैनी नजर

मुलायम कुनबे में सामने से तो केवल शिवपाल ही अखिलेश से दो दो हाथ करते नजर आते हैं। लेकिन मुलायम ने जो एक राजनीतिक कुनबा खड़ा किया था उसको बिखरने से अखिलेश को बचाना ही होगा। शिवपाल के अलावा उनके परिवार में कई और भी ऐसे सदस्य हैं जिनकी महात्वाकांक्षाएं किसी से छुपी नहीं हैं। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि यदि धर्मेद्र यादव को उचित सम्मान नहीं मिला तो वो भी बगावत की राह पर चल सकते हैं। यदि धर्मेंद्र यादव ने भी बगावत की तो अखिलेश को कई मोर्चे पर चुनौतियों से जूझना पड़ेगा। इसलिए अखिलेश को हर सदस्य को उचित सम्मान के साथ देकर अपने साथ जोड़े रखना होगा।

मुलायम ने तैयार किया था देश का सबसे बड़ा राजनीतिक घराना

मुलायम ने तैयार किया था देश का सबसे बड़ा राजनीतिक घराना

नेताजी तो अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन जिस तरह से उन्होंने यूपी में देश का सबसे बड़ा राजनीतिक घराना तैयार किया वह किसी से छिपा नहीं है। मुलायम के परिवार में मुलायम के अलावा प्रो रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, तेज प्रताप यादव भी सांसद रह चुके हैं तो शिवपाल यादव जसवंतनगर से कई बार विधायक रह चुके हैं। इनके अतिरक्ति कई स्थानीय स्तर पर ब्लॉक प्रमुख से लेकर एमएलसी और विधायक बने। मुलायम के पास सबको समेटे रखने का हुनर भी था। कई बार तो उन्होंने अपने घर के सदस्यों के लिए सीटें खाली कीं जिससे लड़कर वो सांसद बने। इसी तरह अखिलेश को अपने पिता मुलायम सिंह से सबक लेते हुए सबके प्रति बड़ा दिल दिखाना होगा और सबको उचित सम्मान देना होगा ताकि लोग उनके साथ जुड़े रहें।

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