आज फिर सपा कार्यालय पंहुचे मुलायम सिंह यादव, अखिलेश खेमे में मची खलबली
लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश की गैर हाजिरी में अचानक सपा कार्यालय में मुलायम सिंह यादव का दौरा जारी है। आज फिर यानि शुक्रवार को मुलायम सिंह यादव के समाजवादी पार्टी कार्यालय में पहुंचने से हलचल मच गई। इस दौरान मुलायम सिंह यादव ने सपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इससे पहले कल यानि गुरुवार को भी मुलायम सिंह यादव पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। यहां मुलायम सिंह दर्शन सिह यादव के निधन पर आयोजित शोक सभा में हिस्सा लेने पहुंचे थे।

इस तरह से बार बार मुलायम सिंह यादव का लगातार सपा कार्यालय में दौरे मीडिया में सुर्खियों में बना हुआ है। अखिलेश यादव का यूपी में न होना और मुलायम सिंह यादव का बार-बार सपा कार्यालय में जाने के कई मतलब निकाला जा रहा है।
आपको बता दें कि सपा से पूर्व सांसद दर्शन सिंह यादव का गुरुवार को दोपहर दो बजे के करीब निधन हो गया था। पार्टी कार्यालय में उनकी शोक सभा का आयोजन किया गया था। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी इस शोक सभा में शामिल हुए और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव की तारीफों के पुल बांधे। मुलायम सिंह यादव ने करीब एक घंटा कार्यालय में बिताया इसके अलावा वहां चल रहे निर्माण कार्य का भी जायजा लिया।
आपको बता दें कि इससे पहले मुलायम सिंह यादव ने वरिष्ठ सपा नेता भगवती सिंह के 86वें जन्मदिन समारोह में भावुक हो गए थे। समारोह में मुलायम सिंह यादव की टीस उभर आई। उन्होंने कहा कि आज हमारा कोई सम्मान नहीं करता, लेकिन मेरे मरने के बाद शायद करें। मुलायम के इस बयान के बाद मीडिया में जमकर सुर्खियां बटोरी थी।
मरने के बाद लोग करेंगे सम्मान - मुलायम सिंह यादव
इस कार्यक्रम में मुलायम ने भगवती के साथ संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि मेरा साथ ऐसा होगा, लोग मरने के बाद सम्मान करेंगे। इससे पहले राम मनोहर लोहिया के साथ भी ऐसा ही हुआ था।
मुलायम सिंह ने बताया कि वह भी इसी तरह कहा करते थे कि उनका कोई सम्मान नहीं करता। उन्होंने कहा कि वे पुराने समाजवादी साथी रहे और पार्टी को बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा था। संघर्ष के दौर में जब समय पर खाना भी नहीं मिलता था, उस समय वे लइया-चना खाकर पेट भरा करते थे। उनके साथ कई दशकों का साथ है।
भगवती का कोई जोड़ नहीं- मुलायम सिंह
पूर्व सपा अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. लोहिया, चन्द्रशेखर और राजनारायण जैसी शख्सियत के साथ बैठकर भगवती सिंह ने राजनीति सीखी। पार्टी को मजबूत करने में भगवती ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इतना ही नहीं, संघर्ष के दिनों में भी हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर साथ रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि भगवती का कोई जोड़ नहीं है।मुलायम सिंह ने पुराने दौर को याद किया और कहा कि हमारे लोग नहीं चाहते थे कि भारतीय जनता पार्टी के नेता, समाजवादी पार्टी में शामिल हों। मुलायम सिंह की इस बात का इशारा कल्याण सिंह की तरफ था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद हमने उन्हें पार्टी ज्वाइन कराई और उनके पार्टी से जाने के बाद अपने लोगों से हमने माफी भी मांगी।












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