काशीराम के कहने पर मुलायम ने बनाई सपा, आखिर क्या हुआ जो हो गए मायावती के खिलाफ, जानिए गेस्ट हाउस कांड की कहानी
सपा संरक्षक Mulayam Singh Yadav के निधन से ना सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में शोक की लहर है। मुलायम सिंह यादव के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ तीन ट्वीट करके उनके साथ अपनी यादों को साझा किया। मुलायम सिंह यादव को जमीनी नेता के तौर पर याद किया जाता है, यही वजह है कि उन्हें धरती पुत्र के नाम से जाना जाता है। जिस तरह से उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति की शुरुआत साइकिल से शुरू करके फाइटर जेट तक तय की वह किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहतरीन उदाहरण हो सकता है। मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक काल में कई ऐसे फैसले लिए जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

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मुलायम की यूपी की राजनीति में खास जगह
मुलायम सिंह यादव की यूपी की राजनीति में मजबूत पैठ थी और यही वजह है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी खास पहचान बनाई। प्रदेश में सियासी उठापटक के लिए भी मुलायम सिंह को याद किया जाता है। बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के साथ उनका एक दौर में छत्तीस का आंकड़ा था। मायावती के साथ उनका सियासी समीकरण कैसा था, उसे हमेशा 1995 के गेस्टहाउस कांड़ से जोड़कर याद किया जाएगा। यह ऐसी घटना है जिसे ना तो कभी मायावती और ना ही यूपी की राजनीति से जुड़े लोग भूल पाएंगे।
काशीराम के कहने पर मुलायम ने बनाई सपा
कम ही लोगों को पता होगा कि मुलायम सिंह यादव ने काशीराम के कहने पर समाजवादी पार्टी का गठन किया था। काशीराम के कहने पर ही मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया था। जिसके बाद 1993 में सपा ने 256 और बसपा ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस वक्त बसपा पहली बार प्रदेश में सरकार बनाने में सफल हुई थी। यह वही समय था जब बाबरी मस्जिद विवाद अपने चरम पर था। उस वक्त बसपा के कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया था, मिले मुलायम काशीराम-हवा हो गए जय श्रीराम। ऐसे में आइए डालते हैं एक नजर कि कैसे सपा-बसपा का यह करीबी रिश्ता इतना खट्टा हो गया कि गेस्टहाउस कांड हो गया।

1993 में बसपा के समर्थन से सपा की सरकार
दरअसल सपा-बसपा ने 1993 में मिलकर चुनाव लड़ा, सपा ने 109 और बसपा ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की। लेकिन 1995 तक दोनों दलों के बीच दूरियां इतनी बढ़ गईं कि मायावती ने राज्यपाल मोतीलाल वोहरा को पत्र लिखकर कहा कि अगर बसपा सरकार बनाने का दावा पेश करती है तो भाजपा उनका साथ देगी। गौर करने वाली बात है क उस वक्त सपा की सरकार बनी थी लेकिन बसपा सरकार में शामिल नहीं थी।

क्यों हुआ गेस्ट हाउस कांड
सपा से अलग होने का फैसला लेने के बाद मायावती ने लखनऊ के गेस्ट हाउस में विधायकों की बैठक बुलाई। इसी दौरान सपा के कार्यकर्ताओं को इस बात की जानकारी मिल गई थी बसपा-भाजपा साथ आ गई हैं और वह सपा से अलग होने वाली हैं। जिसके बाद बड़ी संख्या में सपा के कार्यकर्ता गेस्ट हाउस के बाहर इकट्ठा हो गए, इन लोगों ने बसपा के लोगों को पीटना शुरू कर दिया। उस वक्त मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर लया। उस दौर में लोग पेजर का इस्तेमाल करते थे। मायावती के साथ सिकंदर रिजवी मौजूद थे। उन्हे पेजर पर यह जानकारी दी गई थी कि दरवाजा मत खोलिएगा। उस वक्त कई पुलिसवालों को फोन किया गया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
कैसे बचीं मायावती
गेस्ट हाउस का दरवाजा लोग पीट रहे थे और उसे खोलने की कोशिश कर रहे थे। लोग कहते हैं कि इस मुश्किल समय में भाजपा के लोग मायावती को बचाने के लिए पहुंचे थे। वहीं वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का कहना है कि मीडिया की वजह से मायावती बच सकी थीं। इस पूरी घटना पर मायावती का कहना था कि मेरी हत्या की साजिश रची गई थी। बसपा को खत्म करने की कोशिश की गई थी।
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