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Mulayam Singh Yadav : 'धरती पुत्र' का बेमिसाल रिकॉर्ड जो आज भी है बरकरार, कोई यूं नहीं बनाता 'मुलायम'

Mulayam Singh Yadav Birth Anniversary 2024: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में 22 नवंबर 1939 को जन्मे मुलायम सिंह यादव ने देश की राजनीति को नई दिशा और गति दी। एक पहलवान पहले शिक्षक बनता है और फिर राजनीति में अपना सिक्का चलता है। मुलायम आमजन में इस तरह लोकप्रिय थे कि उन्हें ' धरती पुत्र ' के नाम से जाना जाने लगा। सियासी अखाड़े के बड़े खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव ने शासन और सत्ता को अपने हिसाब से चलाया। जब चाहा सरकार बनाई और जब चाहा सरकार बिगाड़ दी। जिद ठानी तो खुद की पार्टी बना डाली। मुलायम सिंह यादव के बनाए रिकॉर्ड आज भी बरकरार हैं जो बेमिसाल हैं।

ये रिकॉर्ड आज भी हैं बेमिसाल समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने राजनीति के कई आयाम स्थापित किए। इनके बनाए कुछ रिकॉर्ड आज भी ऐसे हैं जिसे कोई तोड़ नहीं पाया। मुलायम को जनता ने 9 बार जहां विधानसभा में भेजने का काम किया वहीं 7 बार लोकसभा में पहुंचाया। जनता में मुलायम की लोकप्रियता समय के साथ दिनों दिन बढ़ती गई। जनता का भरोसा मुलायम पर बढ़ता गया। जनता ने इन्हें एक नहीं बल्कि तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बैठाया। विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री का इनका कार्यकाल बेमिसाल रहा।

mulayam singh
जब पहली बार बने थे विधायक
मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर छात्र संघ चुनाव से शुरू हुआ। वह छात्र संघ के अध्यक्ष बने। इसके बाद इनकी राजनीतिक गुरु नाथू सिंह ने इनकी प्रतिभा पहचानी और 1967 में इन्हें जसवन्तनगर विधानसभा सीट से टिकट दिलवाया। मुलायम ने भी अपने गुरु को निराश नहीं किया और उन्हें जीत की सौगात दी। वह 28 साल की उम्र में विधायक बनने वाले प्रदेश के सबसे युवा नेता थे।

उत्तर प्रदेश के जब रहे मुखिया
मुलायम सिंह यादव पहली बार साल 1989 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सोशलिस्ट पार्टी से पहली बार विधायक बनने वाले नेताजी ने 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की। वह 1993 में कांशीराम और मायावती की पार्टी बसपा की मदद से दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए तीसरी बार साल 2003 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

जब बने देश के रक्षा मंत्री
मुलायम सिंह यादव का कद राजनीति में बढ़ता गया। प्रदेश की राजनीति से आगे निकलकर उन्होंने केंद्र की राजनीति में कदम रखा। साल 1996 में वह मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसी साल वह देश के रक्षा मंत्री बने।
10 अक्टूबर, 2022 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

अपने देश और अपनी मिट्टी से बढ़कर कुछ नहीं

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के पनियरा विधानसभा के परतावल के रहने वाले वरिष्ठ सपा नेता हरेंद्र कृष्ण त्रिपाठी मुलायम सिंह यादव के साथ बहुत पहले हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए कहते हैं कि मै लखनऊ गया था। अखिलेश जी को एयरपोर्ट से छोड़कर पार्टी के एक कार्यक्रम में पहुंचा। वहां मुझे मुलायम जी से मिलने का सौभाग्य मिला। उन्होंने हालचाल पूछा। कैसे हो? कहां से आ रहे हो ? मैने जब कहा अखिलेश भैया को एयरपोर्ट छोड़कर आ रहा हूं। तब वह कहने लगे - " किसी को भी अपने देश में ही घूमना चाहिए। अपने देश से अच्छा कुछ नहीं। यहां इतने मौसम हैं जो सालभर बदलते है और लोगों को नया माहौल देते हैं। यहां तरह तरह की सभ्यता और संस्कृतियां है जो विश्व में कहीं नहीं। मेघालय जाइए तो अलग सभ्यता, कश्मीर जाइए तो अलग सभ्यता, गुजरात की अलग और केरल की अलग। कहां मिलेगा ये सब। अपना देश और अपनी मिट्टी से बढ़कर कुछ नहीं।''

कोई यूं नहीं बनाता मुलायम

हरेंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि उनकी सरलता, सहजता अद्भुत थी। वह जमीन से जुड़े नेता थे। वह नब्ज पहचानते थे। लोगों की समस्याएं समझते थे। नेता तो बहुत है पर मुलायम कोई नहीं। उनके व्यक्तित्व के विरोधी भी कायल थे। उनका साहित्य प्रेम भी अद्भुत था। नेता तो कोई बन सकता है पर मुलायम सिंह यादव नहीं।

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