UP: पति की तेरहवीं वाले दिन माँ-बेटी की हत्या, आखिर क्यों अपने बने हैवान? हैरान कर देगी यह कहानी
उत्तर प्रदेश के अलीगढ में सोमवार को पति की तेरहवीं वाले दिन माँ और बेटी को लाठी डंडों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। महिला के 3 देवरों ने ही जमीन-जायदाद के बंटवारे को लेकर इस वारदात को अंजाम दिया। जिसके बाद महिला के मायके वालों और ग्रामीणों ने आक्रोश में अंतिम संस्कार से मना कर दिया था। ग्रामीण शव को रखकर आरोपियों के घर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे थे।
मंगलवार को एसपी ग्रामीण पलाश बंसल और अन्य अधिकारी लगातार उन्हें समझा रहे थे, लेकिन ग्रामीण मान नहीं रहे थे। जब खैर विधायक व राजस्व राज्यमंत्री अनूप वाल्मीकि ने लोगों को समझाया। तब जाकर ग्रामीण राजी हुए। फिर दोनों को एक ही चिता में रखकर अग्नि दी गई। महिला के भाई ने ही अपनी बहन और उसकी बेटी को मुखाग्नि दी।

4 दिन पहले हुई थी पति की मौत
अब आपको पूरी घटना सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं। दरअसल, जिस शख्स की सोमवार को तेरहवीं थी, उसका नाम सुरेश था। सुरेश मूलरूप से अलीगढ़ के गोंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव कैमथल के रहने वाले थे। बीते 30 अगस्त को उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। सुरेश कुल चार भाई थे। चारों भाइयों के पास लगभग 4 बीघा खेतिहर जमीन थी। ऐसे में चारों भाइयों के हिस्से में एक-एक बीघा जमीन आई थी।
दिल्ली रहता था परिवार, बेटी को लिया था गोद
उधर, सुरेश दिल्ली ट्रांसपोर्ट (डीटीसी) में बस ड्राइवर थे। वह लगभग 20 साल पहले अपनी पत्नी मुकेश कुमारी के साथ दिल्ली जाकर रहने लगे थे। चूंकि, उनके कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने 19 साल पहले अपने साले की बेटी प्रियंका को गोद ले लिया था। प्रियंका की परवरिश दिल्ली में ही हुई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रियंका दिल्ली में नौकरी कर रही थी। अपने पिता की इकलौती होने के नाते वह उनकी सारी प्रॉपर्टी की एक मात्र वारिस थी।

प्रियंका के नाम कर दी थी संपत्ति
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरेश कुमार ने कुछ ही दिन पहले अपनी सारी संपत्ति का वारिस प्रियंका को बनाया था। इसके साथ ही प्रियंका की शादी दिल्ली में ही एक युवक से तय हो गई थी। कुछ महीनों बाद प्रियंका की शादी थी। सुरेश की सारी संपत्ति की वसीयत प्रियंका के होने वाले पति के पास ही सुरक्षित रखी गई थी। यह बात सुरेश के भाइयों को पता चल गई थी। जिसको लेकर परिवार में विवाद शुरू हो गया था।

अलीगढ जाकर करेंगे अंतिम संस्कार
परिवार में संपत्ति को लेकर अंदरूनी कलह चल ही रहा था कि बीते 27 अगस्त को सुरेश कुमार को हार्ट अटैक आ गया। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 3 दिन बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद पत्नी मुकेश कुमारी और बेटी प्रियंका ने दिल्ली में ही उनका अंतिम संस्कार करना चाहा लेकिन दिल्ली में रहने वाले उनके देवर रमेश और धर्मवीर ने जिद की कि उनके भाई को अलीगढ़ लेकर चला जाए।
माँ-बेटी को था अनहोनी का डर
उनका कहना था कि अलीगढ़ में ही उनका अंतिम संस्कार सारे रीति-रिवाज के साथ किए जाएगा। परिवार के दबाव में मां-बेटी सुरेश के अंतिम संस्कार के लिए अलीगढ़ के गोंडा स्थित अपने गांव कैमथल आ गईं। चूंकि माँ-बेटी को पहले ही अपनी जान का डर था, इसलिए वो जल्द से जल्द सारे रीति रिवाज पूरे कर वापस दिल्ली जाना चाहती थी। इसलिए 4 दिन बाद ही तेरहवीं का कार्यक्रम रखा गया।

संपत्ति को लेकर विवाद हुआ शरू
सोमवार को तेरहवीं का कार्यक्रम चल रही रहा था कि मुकेश कुमारी के देवरों ने संपत्ति के बंटवारे की बात छेड़कर विवाद शुरू कर दिया। सूत्रों की माने को ऐसा लग रहा था जैसे ये विवाद सुनियोजित हो, क्योंकि जबरन अलीगढ लाकर अंतिम संस्कार करना और माँ-बेटी का जल्दी-जल्दी सारे कार्यक्रम निपटाकर वापस जाने की तैयारी करना, इसी बात की तरफ इशारा कर रहा था कि उन्हें भी इस अनहोनी का अंदाजा था।
माँ-बेटी को उतारा मौत के घाट
हुआ भी कुछ ऐसा ही, संपत्ति के बंटवारे का विवाद होते ही तीनों देवरों ने माँ-बेटी पर लाठी डंडों से हमला कर दिया और उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। SSP कलानिधि नैथानी ने बताया कि घटना के पीछे संपत्ति के बंटवारे की बात सामने आ रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही हत्या के सही कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

संपत्ति ने भाइयों को बनाया हैवान
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक सुरेश की सरकारी नौकरी थी और उसके पास दिल्ली में फ्लैट और दूसरी अन्य प्रॉपर्टी भी थी। जिसकी जानकारी सुरेश के भाइयों को भी थी। उनकी निगाह इस प्रॉपर्टी पर भी थी। साथ ही सुरेश की मौत के बाद उसके भाई अपने बेटे को उसके स्थान पर सरकारी नौकरी दिलाना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने इस सारी घटना को अंजाम दे डाला।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
उधर, मां-बेटी की हत्या के बाद गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा। महिला के मायके पक्ष के गांव वालों ने शवों के पोस्टमॉर्टम के बाद मां-बेटी का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर गांव में चक्का जाम कर दिया। चूंकि घटना के बाद आरोपी देवर मौके से फरार हो गए थे और अभी उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी, इसलिए महिला के मायके पक्ष के गांव गढ़ी सूरजमल में ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

4 घंटे चली पंचायत, शांत नहीं हुए ग्रामीण
ग्रामीणों को समझाने के लिए अधिकारियों ने करीब 4 घंटे तक गांव में बैठकर पंचायत की। लेकिन, इसका हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा था। जिसके बाद खैर विधायक व राजस्व राज्यमंत्री अनूप वाल्मीकि ने लोगों को समझाया और तब जाकर दोनों मां बेटी का अंतिम संस्कार हो सका। इस दौरान सभी ग्रामीण काफी गुस्से में थे। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

असली पिता ने दी प्रियंका को मुख्याग्नि
आपको बता दें कि मृतक सुरेश और मृतिका मुकेश कुमारी ने 19 साल पहले जिस बेटी को गोद लिया था, वो मुकेश कुमारी के भाई भोला की बेटी थी। उसी भोला ने अपनी बहन और उसकी बेटी को मुखाग्नि दी। जब मां बेटी एक ही चिता में जली तो गांव के हर व्यक्ति की आंखों में आंसू थे। हर किसी का बस यही कहना था कि आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो कि यह अपराध करने वाले लोगों के लिए एक मिसाल बन जाए।












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