145 साल से चल रहे 90 कारखानों को बंद करने का मोदी सरकार का आदेश, 1 लाख लोग होंगे बेरोजगार

फर्रुखाबाद। देश भर में गंगा स्वच्छता अभियान को लेकर सभी राज्यों में एक मुहिम चलाई जा रही है। केंद्र सरकार ने उन छपाई उद्योगों को बंद कराने के आदेश दिए हैं, जिन कारखानों में केंद्रीय व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आदेशों का पालन नहीं किया था। उन 90 कारखानों को बंद करने के नोटिस पिछले सप्ताह जारी कर दिए हैं। यदि यह कारखाने बंद हो गए तो लगभग एक लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे, क्योंकि इन परिवारों का खर्च इन्हीं कारखानों में काम करने से चल रहा है।

शुरू से करते है छपाई का काम

शुरू से करते है छपाई का काम

145 वर्ष पहले सधवाड़ा निवासी साध समाज के लोगों ने कपड़ा छपाई का काम शुरू किया था। उस समय जैतपुर, अहमदाबाद में बनने वाली सूती साड़ी फर्रुखाबाद में छपती थी। लगातार यह कार्य चल रहा है। अमृतसर से रजाई के पल्ले की छपाई शुरू हुई। वर्तमान में एक्सपोर्ट का कपड़ा शाल आदि की छपाई हो रही है। जिन 90 कारखानों को बंदे करने के नोटिस दिए गए हैं, उनमें अधिकांश छोटे कारखाने हैं। उन कारखाना मालिकों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। उन्होंने मांग की है कि जिस जगह से गंगा में नाला गिर रहा है, वहां पर एसटीपी प्लांट लगाया जाए। उसके लिए उन्होंने उच्च अधिकारियों को पत्र के द्वारा अवगत भी कराया है।

सैकड़ों कारखाना मालिक कर रहे है पलायन

सैकड़ों कारखाना मालिक कर रहे है पलायन

यदि छपाई के कारखाने बंद हो गए तो सधवाड़ा की जो रौनक है, वह खत्म हो जाएगी। इन कारखानों से छपाई, धुलाई करने वाले ढोने वाले, शॉल में गांठ लगाने वाले सभी के परिवार जुड़े हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह कि इस जिले से पहले ही सैकड़ों कारखाना मालिक पलायन कर चुके हैं, जिस कारण बेरोजगारी फैल चुकी थी। यदि यह भी बंद हो गए तो क्या होगा क्योंकि घरों में शाल में गांठ लगाने वाली महिलाएं भी एक महीने में पांच हजार रुपये की आमदनी करती हैं।

आखिर क्यों बंद किए जा रहे कारखाने

आखिर क्यों बंद किए जा रहे कारखाने

शहर के मोहल्ला सधवाला में सैकड़ों छपाई के कारखाने चल रहे हैं। इन कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी नाले के माध्यम से सीधा गंगा में गिर रहा है। उसी कड़ी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इनको बंद करने का नोटिस दिया था, लेकिन किसी भी कारखाना मालिक ने कारखाने से निकलने वाले पानी को दूषित रहित करने के लिए प्लांट नहीं लगाया था। उसके बाद कई बार जांच भी की गई, लेकिन किसी भी कारखाने में प्लांट नहीं लगा पाया गया। इस कारण इनको बंद करने का फैसला लिया गया।

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