आचार संहिता लगते ही धराशायी हुए बड़े-बड़े दिग्गज
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर निगम ने पुलिस टीम को साथ लेकर राजनीतिक लोगों के बैनर बिजली के खंभों और दीवारों से उखाड़े तो रायबरेली में जेसीबी के जरिए पोस्टर उतारे जा रहे हैं।
वाराणसी। चुनाव आयोग के उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों मे चुनाव की तारीखों का ऐलान करते ही प्रशासन भी हरकत में आ गया है। चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाने के बाद पुलिस ने शहरों में जगह-जगह लगे नेताओं के होर्डिंग्स और बैनर उतरवाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन का हथौड़ा सबसे पहले पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चला है।


चुनाव का ऐलान होते ही वाराणसी में सड़क पर निकली पुलिस टीम
बुधवार सुबह जैसे ही चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड़, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान किया पांचों राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी तुरंत ही पुलिस ने शहर में लगे अलग-अलग पार्टियों के प्रत्याशियों के बैनर और पोस्टर हटाने शुरू कर दिए। वाराणसी पुलिस नगर निगम ने पुलिस टीम के साथ राजनीतिक लोगों के बैनर बिजली के खंभों और दीवारों से उखाड़ फेंके।

रायबरेली में भी चला प्रशासन का डंडा
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का प्रशासन ही आचार संहिता लगने के बाद हरकत में नहीं आया है बल्कि पूरे प्रदेश में बैनरों और होर्डिंग्स को उतारा जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में भी बड़े-बड़े नेताओं को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर शहर से दूर पहुंचाया जा रहा है। रायबरेली में जेसीबी मशीन के जरिए पोस्टरों को उतारा जा रहा है।

गोरखपुर में हटाए जा रहे नेताओं के पोस्टर
गोरखपुर में भी दिख रहा है। आचार संहिता लागू होते ही डीएम के आदेश पर पुलिसबल के साथ अधिकारियों ने शहर में लगे सरकारी, गैरसरकारी, व्यवसायिक और राजनैतिक पोस्टर, बैनर, होर्डिंग्स को उतरवाना शुरू कर दिया है। एसएसपी रामलाल वर्मा का कहा है कि आचार संहिता लागू होने पर निर्धारित शेड्यूल को देखते हुए लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में
गोरखपुर महानगर के शास्त्री चौक पर सीओ अभय मिश्रा के नेतृत्व मे बिजली के पोल व अन्य स्थानो पर लगे बैनर व होर्डिंग को हटाया जा रहा है। गोरखपुर में अर्ध सैनिक बल के साथ इंस्पेक्टर राजघाट सीताराम यादव व ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इंचार्ज सुनील सिंह फोर्स के साथ इलाके मे फ्लैग मार्च कर रहे हैं। आचार सहिंता लागू होते ही गोरखपुर में लगे हुए प्रचार-प्रसार के बैनर हटवाने में सिटी मजिस्ट्रेट जी पी श्रीवास्तव, नगर आयुक्त बीएन सिंह, एसपी सिटी हेमराज मीणा , सीओ कैण्ट अभय मिश्रा, सीओ कोतवाली अशोक पाण्डेय, कैंट इंस्पेक्टर व नगर निगम चौकी इंचार्ज लगातार हरकत में हैं।

आगरा जिलाधिकारी ने अपनाया कड़ा रुख
आगरा के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव दयाल ने भी आचार संहिता लागू होने के बाद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। जिले में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहित लागू हो गई है। इसके उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे 24 घंटे के अंदर प्रचार सामग्री हटा लें। गौरव दयाल ने बताया कि किसी भी पार्टी या प्रत्याशी के जाति, धर्म और भाषा के आधार पर वोट मांगने की कोई शिकायत मिली, तो कार्रवाई की जाएगी क्योंकि ऐसा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

चुनाव की घोषणा के साथ ही लगती है आचार संहिता
चुनाव आचार संहिता या आदर्श आचार संहिता का मतलब चुनाव आयोग के उन निर्देशों से है, जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को करना होता है। जो इसका पालन नहीं करता है, उसे इसके लिए सजा सुनाई जाती है। राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं। चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारे, सभी सरकारें चुनाव आचार संहिता के दायरे में आती हैं।

क्या है आचार संहिता
आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकते हैं, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन कर सकते हैं। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचे। प्रत्याशी और राजनीतिक पार्टी को रैली, जुलूस निकालने, मीटिंग करने के लिए इजाजत पुलिस से लेनी होती है। कोई भी घटक दल वोट पाने के लिए जाति या धर्म आधारित अपील नहीं की कर सकता, अगर ऐसा कोई करता है तो उसे दंडित किया जा सकता है।












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