MLC Election in UP: SP-BJP में मचेगा सियासी घमासान, सपा हासिल कर पाएगी नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी ?
MLC Election in UP: यूपी में एमएलसी का चुनाव बीजेपी और सपा के लिए कई मायनों में अहम है। सपा जहां इस चुनाव में जीत के साथ ही नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी दोबारा हासिल करना चाहेगी वहीं बीजेपी क्लीन स्वीप के इरादे से उतरेगी।

MLC Election in UP: उत्तर प्रदेश में एमएलसी की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इन पांच सीटों को जीतने को लेकर जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से आश्वसत दिख रही है वहीं समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के लिए ये चुनाव भी काफी अहम है। सपा के चीफ अखिलेश यादव के लिए ये चुनाव काफी अहम इसलिए है क्योंकि यदि वो केवल एक सीट जीत लेते हैं तो परिषद में उनकी पार्टी को दोबारा पुरा रुतबा मिल जाएगा। हालांकि सपा के सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से मैनपुरी और खतौली में जीत के बाद सपा के नेता एवं कार्यकर्ता उत्साहित हैं उससे पार्टी के भीतर उत्साह का संचार हुआ है और वह इस चुनाव में जीत हासिल करने में कामयाब होगी।

विधान परिषद में सपा खो चुकी है नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी
दरअसल यूपी में दूसरी बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही समाजवादी पार्टी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खो चुकी है। परिषद में सपा के केवल 9 विधायक हैं और नियम के मुताबिक कुल सीटों की दस फीसदी संख्या होनी चाहिए। यानी 100 सीटों वाली परिषद में सपा के पास कम से कम दस विधायक होंगे तो ही वह इस कुर्सी को दोबारा हासिल कर पाएगी। सपा इसी गुणा गणित के बीच केवल एक सीट जीतने पर ही फोकस कर रही है। हालांकि बीजेपी का दावा है कि सीएम योगी की नीतियों की बदौलत वह सभी पांच सीटें आसानी से जीतने में सफल होगी।
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क्या सपा हासिल कर पाएगी खोई हुई प्रतिष्ठा
दरअसल यूपी विधानसभा के साथ ही विधान परिषद में भी योगी सरकार के पास पुर्ण बहुमत हो गया है। विपक्ष की स्थिति का आलम यह है कि एक तरफ जहां कांग्रेस यूपी विधान परिषद से समाप्त हो गई है वहीं समाजवादी पार्टी नेता प्रतिपक्ष के मानक (कम से कम 10) से कम होकर 9 तक पहुंच गई है। यूपी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है यूपी विधान परिषद में विपक्ष के पास नेता प्रतिपक्ष के लिए आवश्यक आंकड़ा भी नहीं है। इसका फायदा सरकार भी विपक्ष को कमजोर करने के लिए उठा रही है। अब सपा को एक बार फिर ये मौका मिला है कि वह अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को हासिल कर सके।

यूपी में 30 जनवरी को होंगे एमएलसी चुनाव
दरअसल यूपी में 30 जनवरी को उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव होंगे। मुकाबला बीजेपी बनाम समाजवादी पार्टी है। बीजेपी के योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल की शुरुआत में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सत्ता में लौटने वाले पहले यूपी के मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा था। इसे बीजेपी बनाम समाजवादी पार्टी कह रहे हैं क्योंकि पिछले चुनावों में बसपा को लगभग वॉकओवर देते देखा गया था, और कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई में फंसी हुई है।

तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में होगा चुनाव
तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 30 जनवरी को मतदान होगा, जिसके लिए भाजपा और सपा ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। इन चुनावों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नामों को अंतिम रूप दिया, जबकि सपा के लिए ऐसा पार्टी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मुहर लगाई। एमएलसी के चुनाव में 38 जिलों में मतदान होगा।

पांचों सीटों पर जीत को लेकर आश्वस्त है बीजेपी
स्नातकों के निर्वाचन क्षेत्र में, केवल वही लोग मतदान कर सकते हैं, जिन्होंने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से स्नातक किया हो। यदि वे मतदाता के रूप में नामांकित हैं। इसी तरह, एक शिक्षक के निर्वाचन क्षेत्र में, जो पिछले छह वर्षों में से तीन वर्षों के लिए शिक्षक रहे हैं, वे मतदाता के रूप में नामांकित होने पर मतदान कर सकते हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी कहते हैं कि पार्टी के कार्यकर्ता हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहते हैं और एक बार फिर पांचों सीटों पर पार्टी को विजय मिलेगी। सपा चाहे जितना भी जोर लगा ले लेकिन जिस तरह से पीएम मोदी और सीएम योगी को जनता का विश्वास बार बार हासिल हो रहा है उससे यह निश्चित है कि विजय हमारी ही होगी।












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