मायावती ने समझाया UP का जाति समीकरण, जानिए किसे मिली कितनी सीट
मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर बोला हमला, बोलीं नोटबंदी का फैसला राजनीतिक स्वार्थ के लिए लिया गया, ताकि लोगों का ध्यान अहम मुद्दो से भटकाया जा सके।
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। लखनऊ में पीएम की रैली पर हमला बोलते हुए कहा कि पीएम ने लोगों को झूठे वायदे किए, पीएम की यह रैली असफल और घिसी पिटी थी। इस रैली के जरिए पीएम ने लोगों का ध्यान बंटाने की कोशिश की है ताकि लोग पीएम को उन वायदों को भूल जाए जो उन्होंने देश की जनता से किए थे। मायावती ने कहा कि मैं कामना करती हूं कि इस वर्ष पीएम को सद्बुद्धि आए और वह इस वर्ष लोगों को 2016 की तरह कष्ट नहीं दें।

विफल और पिटी हुई रैली थी पीएम की
मायावती ने कहा कि अपनी पिटी और असफल रैली को संबोधित करते हुए पीएम ने जो कुछ भी बोला है वह अपनी कमियों को छिपा रहे थे और लोगों का ध्यान बंटा रहे थे, यह भाषण चुनाव को केंद्रित में रखकर दिया गया है। पीएम ने राष्ट्र के नाम पर किए गए संबोधन में जो भी घोषणा की वह खानापूर्ती थी। जो आज पीएम मोदी कर रहे हैं वह पूर्व में कांग्रेस किया करती थी, इनके बहकावे में यूपी की जनता को नहीं आना है। 31 दिसंबर को पीएम ने जो संबोधन दिया था उससे प्रतीत नहीं होता है कि वह अपने वायदों को पूरा करना चाहते हैं, उस दिन देश के किसान, मजदूर, गरीब उनसे उम्मीद कर रहे थे कि पीएम उनके हित में कुछ बड़ा ऐलान जरूर करेंगे और किसानों को उम्मीद थी कि उनका कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोगों को उम्मीद थी कि देश में इकट्ठा किए गए कालाधन में से उनके खाते में 15-20 लाख रुपए उनके खाते में डालने का ऐलान करेंगे।
नोटबंदी का पीएम हिसाब दें
अपना कालाधन उजागर करने के लिए भाजपा के लोग अभी तक हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं। अगर भाजपा के लोग यह कर पाते हैं तो देशहित में यह उनकी सच्ची शुभकामना होगी। 2016 का काला साया इस नए वर्ष में जनता का पीछा यमराज बनकर ना करे। भाजपा को खुद अपनी पार्टी के बारे में भी कालाधन और भ्रष्टाचार के मामले में जनअपेक्षा के अनुसार दूध का दूध पानी का पानी करके दिखाएं। ऐसा नियम बनना चाहिए कि लोग अपना पैसा स्वतंत्रता से इस्तेमाल कर सके और उसे निकालने के लिए एटीएम के बाहर नहीं खड़ा होना पड़े। हमारी यही प्रार्थना है कि भाजपा, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सद्बुद्धि आए ताकि इस वर्ष लोगों को पिछले वर्ष की तुलना में कष्ट ना उठाना पड़े। नोटबंदी के फैसले से देश के 90 फीसदी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा और सैकड़ों लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। यह इतिहास के पन्नों में ऐसा काला अध्याय है जिसे भुला पाना मुमकिन है। मायावती ने कहा कि अगर पीएम अपने संबोधन में यह बात बता देते कि नोटबंदी के अभियान में कितना कालाधन पकड़ा गया तो अच्छा होता, उन्हें आंकड़े रखने चाहिए थे, तो इससे देश के 90 फीसदी लोगों को थोड़ा सुकून जरूर मिलती।
समझाया यूपी का जातीय समीकरण
बसपा हवा-हवाई दावों पर चुनाव नहीं लड़ेगी, बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ेगी, ताकि सपा के गुंडों और माफियाओं से प्रदेश को मुक्ति मिल सके। मायावती ने कहा कि मैं अपील करती हूं कि लोग प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की एकमात्र हितैशी पार्टी बसपा को अपना समर्थन दे। सपा के संग्राम पर बोलते हुए मायावती ने कहा कि यादव खेमा भी दो गुटो में बंट गया, पार्टी में दो गुट एक-दूसरे को हराने का काम करेंगे। मुसलमानों को आगाह करते हुए मायावती ने कहा कि अगर इनका वोट बंटता है तो भाजपा को इसका फायदा होगा। प्रदेश में यादव वोट सिर्फ 5-6 फीसदी है। प्रदेश में यादव समाज का वोट दलितों की तुलना में बहुत कम है, प्रदेश में सिर्फ 60-70 सीट पर ही यादव वोट है, जबकि दलित प्रदेश की 403 सीटों पर अपना प्रतिनिधित्व है। कांग्रेस की गणित को समझाते हुए मायावती ने कहा कि यह पार्टी वेंटिलेटर पर है, लिहाजा लोगों को बसपा को अपना वोट देना चाहिए। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अकेले मुसलमानों का वोट मिलने से बसपा के उम्मीदवार जीत सकते हैं, बशर्ते मुसलमान अपना वोट कांग्रेस और अन्य पार्टियों को अपना वोट देकर बांटे नहीं।
मायावती ने यूपी के चुनाव के लिए जिन लोगों के टिकट फाइनल किए हैं उनकी जातीवार सूचि जारी की है।
यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से हर वर्ग के लोगों को मायावती ने टिकट की घोषणा की है।
इन्हें दिया टिकट
- 85 सीटों पर अनुसूचित जाति के लोगों को जबकि 2 टिकट सामान्य उम्मीदवारों की सीटों पर भी अनुसूचित जाति के लोगों को टिकट दिया।
- 97 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं
- अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को 106 टिकट दिए हैं.
- अपर कास्ट समाज की विभिन्न जातियों को मिलाकर 113 टिकट दिए हैं।
- ब्राह्मण समाज को 66 टिकट
- क्षत्रिय समाज को 36 टिकट
- कायस्थ और वैश्य व पंजाबी समाज को 11 टिकट दिए हैं।












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