यूपी चुनाव में पूरब में इस बार सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला लागू करने में जुटीं मायावती
लखनऊ, 1 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार मायावती दबे पांव आगे बढ़ रही हैं। अभी तक उनकी रैलियां शुरू नहीं हुई हैं। बताया जा रहा है कि दो फरवरी को आगरा से वह अपनी रैलियों की शुरुआत करेंगी। हालांकि मायावती को करीब से जानने वालों का कहना है कि मायावती का प्रचार का तरीका अन्य दलों से हमेशा ही अलग होता है। उन्हें अपने कॉडर और वोट बैंक पर पूरा भरोसा होता है इसीलिए वह अपनी रणनीति के तहत ही आगे बढ़ती हैं। इसकी झलक आपको पश्चिम से लेकर पूरब तक टिकटों के बंटवारे में दिख सकता है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने मध्य यूपी के नौ जिलों के 60 विधानसभा क्षेत्रों में चौथे चरण के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला लागू कर रही हैं।

सोशल इंजिनियरिंग फार्मूला लागू करने का प्रयास
इससे पहले बसपा प्रमुख ने 53 विधानसभा सीटों के लिए पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा की, जिसमें दलित समुदायों के 14 उम्मीदवारों, अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के 11 उम्मीदवारों, उच्च जातियों के 13 और 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया गया। शेष सात सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा बाद में की जाएगी। उच्च जाति, दलित और पिछड़े समुदाय के मतदाताओं की बड़ी संख्या वाली 60 सीटों पर मतदान 23 फरवरी को होगा। इससे पहले, सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर सवार होकर, बसपा ने 2007 के विधानसभा चुनावों में सरकार बनाई थी।

पिछले चुनाव में 60 में 16 सीटों पर रही उपविजेता
2017 के विधानसभा चुनावों में, 60 सीटों में से बसपा ने उन्नाव जिले में केवल एक - पुरवा पर जीत हासिल की, जबकि वह 16 सीटों पर उपविजेता रही। पुरवा विधानसभा सीट से एकमात्र विजेता अनिल सिंह भाजपा में शामिल हो गए हैं। बसपा ने लखनऊ जिले की नौ विधानसभा सीटों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा की है। इसने चार मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है: बख्शी- का तालाब से सलाउद्दीन सिद्दीकी, सरोजनी नगर से मोहम्मद जलीश खान, लखनऊ पश्चिम से कायम रजा खान और लखनऊ उत्तर से मोहम्मद सरवर मलिक को टिकट दिया है। दो आरक्षित सीटों पर दलित उम्मीदवारों में मलिहाबाद से जगदीश रावत और मोहनलालगंज से देवेंद्र कुमार सरोज शामिल हैं।

मध्य यूपी में मिल रही ब्राहमणों को तरजीह
बसपा ने लखनऊ पूर्व से आशीष कुमार सिन्हा, लखनऊ सेंट्रल से आशीष चंद्र श्रीवास्तव और लखनऊ कैंट सीट से अनिल पांडे को टिकट दिया है। बख्शी का तालाब में उपविजेता रहे पूर्व मंत्री नकुल दुबे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। दुबे को विभिन्न जिलों में सवर्ण-ब्राह्मण समुदाय को लामबंद करने का काम सौंपा गया है। अधिकांश विधानसभा सीटों पर मायावती ने नए उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से कुछ पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने पूर्व मंत्री अनीश खान उर्फ फूल बाबू को पीलीभीत जिले के बीसलपुर से, सीतापुर जिले के महमूदाबाद से मीसम अम्मार रिजवी, हरदोई जिले के संडीला से अब्दुल मन्नान और नारायणी से गयाचरण दिनकर सहित बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

मायावती का आरोप-सपा-बीजेपी मिले हुए हैं
बाद में एक ट्वीट में मायावती ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा और सपा के बीच समझौता हुआ है। यूपी विधानसभा चुनाव में जिस तरह धर्म और जाति की राजनीति हावी हो रही थी, मीडिया की खबरों से जाहिर होता है कि यह सब सपा और बीजेपी के अंदरूनी समझौते के तहत ही हो रहा है। बीजेपी और सपा के नेता चुनाव में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे चुनाव को जाति का रंग देने की भी कोशिश कर रहे हैं और लोगों को सतर्क रहना चाहिए।












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