अस्पताल ने धक्के मार कर निकाला, महिला ने बीच सड़क पर दिया बच्चे को जन्म

मऊ। यूपी में गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में 63 मासूम बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थय महकमा चेता नहीं है। ताजा मामला मऊ जिले का है जहां एक महिला को ने बीच सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि महिला को जिला महिला अस्पताल से धक्के मार कर निकाल दिया गया। पीड़ित महिला की माने तो उसे बच्चे के जन्म के समय क्रिटिकल कंडीशन बताते हुए महिला अस्पताल के स्टाफ ने धक्के मार कर बाहार निकाल दिया था। इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन खुद महिला पर चाय पीने के लिए बाहर जाने का आरोप लगाया है।

बाद में महिला को किया भर्ती

बाद में महिला को किया भर्ती

पीड़ित महिला मऊ ज‍िले के वसुंधरा अइलख गांव की रहने वाली है। उसने बताया, ''10 अगस्त 2017 को उसके पेट में तेज दर्ज हुआ। 102 नंबर पर कॉल करके एम्बुलेंस से परिवार वाले सरकारी महिला हॉस्पिटल ले गए। वहां कुछ महिला स्टाफों ने बिना देखे मुझे क्रिटिकल कंडीशन बताकर भगा दिया। दर्द इतना होने लगा कि पैदल सड़क पर आते ही बेहोश हो गई और बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान हॉस्पिटल की एक दाई ने मदद की। पीड़‍िता के प‍िता बुधराम ने बताया, अस्पताल के स्टाफ ने बिना जांच किए ही खून की कमी और क्रिटिकल कंडीशन बताकर एडमिट करने से इनकार कर दिया। अस्पताल का चक्कर काटते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद बेटी जैसे ही पैदल हॉस्प‍िटल के बाहर आई, सड़क पर चक्कर खाकर ग‍िर गई और बच्चे को जन्म द‍िया, जबक‍ि बगल में ही एम्बुलेंस खड़ी थी। इसकी सूचना जैसे ही हॉस्प‍िटल के डॉक्टरों और कर्मचार‍ियों को हुई, उन्होंने तुरंत वसुंधरा का नाम रज‍िस्टर कर ल‍िया और कुछ ही देर बाद छुट्टी दे दी।

कर्मचारी ने माना लापरवाही हुई

कर्मचारी ने माना लापरवाही हुई

इस पूरे मामले पर अंदर ही अंदर महिला चिकित्सालय के स्टाफ पीड़ित महिला का साथ दे रहे हैं। अस्पताल कर्मी और प्रत्यक्षदर्शी रमेश सोनकर ने oneindia से बात करते हुए कहा कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है। इन्हीं लोगो के कारण पीड़त महिला ने अपने नवजात शिशु को सड़क पर जन्म दिया हैं। हालांक‍ि, क‍िस वजह से मह‍िला हॉस्प‍िटल के बाहर आई, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

अस्पताल ने ऐसे दी सफाई

अस्पताल ने ऐसे दी सफाई

वही अब इस पुरे मामले पर अस्पताल प्रशासन अपने कमिया छुपाने में लग गया हैं। जब oneindia ने इस मामले पर महिला अस्पताल के नर्सेज इंचार्ज चंद्रमणि त्रिपाठी से बात की तो उन्होंने पहले तो बात करने से साफ मना कर दिया फिर कुछ देर के बाद खुद सामने आते हुए हॉस्पिटल की पक्ष में सफाई पेश करते हुए कहा कि की पीड़त महिला को परस्व पीड़ा के कारण आने पर उसे यह भर्ती किया गया था लेकिन उसी पीड़ित महिला को दोषी बताते हुए कहा की वो चाय पिने के लिए अस्पताल से बहार निकली और वही उसने बच्चे को जन्म दे दिया।

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