सीटों के बंटवारे पर बोले अखिलेश, हम बुआ के भी 'बबुआ' बनने को तैयार

हर कीमत पर बसपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार अखिलेश यादव ने कहा है कि गठबंधन बचाए रखने के लिए अगर उन्हें 'त्याग' करना पड़ा तो वो इसके लिए भी तैयार हैं।

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    नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए कमर कस चुके यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। हर कीमत पर बसपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार अखिलेश यादव ने कहा है कि गठबंधन बचाए रखने के लिए अगर उन्हें 'त्याग' करना पड़ा तो वो इसके लिए भी तैयार हैं। अखिलेश यादव के इस बयान को मायावती के हाल ही में सीटों के बंटवारे को लेकर सामने आए रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।

    '2-4 सीटों का बलिदान भी करना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे'

    '2-4 सीटों का बलिदान भी करना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे'

    रविवार को मैनपुरी में आयोजित एक सभा में अखिलेश यादव ने कहा, '2019 में भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए समाजवादी पार्टी बसपा की 'जूनियर' बनने के लिए भी तैयार है। अगले साल होने वाले आम चुनाव में अगर भाजपा को हराने के लिए मुझे कम सीटों पर भी संतोष करना पड़ा तो मैं इससे पीछे नहीं हटूंगा। बसपा के साथ हमारा गठबंधन है और वो जारी रहेगा। भाजपा की हार के लिए अगर हमें 2-4 सीटों का बलिदान भी करना पड़ा तो हम पीछे नहीं हटेंगे।'

    80 में से 40 सीटें चाहती है बसपा

    80 में से 40 सीटें चाहती है बसपा

    आपको बता दें कि पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में मायावती ने कहा था कि महागठबंधन में अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें ना मिलीं तो वो अकेले चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बनने वाले महागठबंधन में मायावती यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 40 सीटें बसपा के खाते में रखने का मन बना चुकी हैं।

    महागठबंधन में मायावती की भूमिका बेहद अहम

    महागठबंधन में मायावती की भूमिका बेहद अहम

    मायावती के इस बयान के जवाब में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था, 'समाजवादी लोग सम्मान देने में हमेशा आगे रहते हैं, उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बसपा के साथ गठबंधन जरूर होगा।' अखिलेश यादव के इस बयान से स्पष्ट है कि महागठबंधन में मायावती की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। सियासी जानकारों का भी कहना है कि गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में विपक्ष की जीत में निर्णायक साबित हुए दलित वोटों के बाद महागठबंधन में मायावती का कद बाकी दलों के मुकाबले बढ़ा है।

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