मायावती से गठबंधन के बीच अखिलेश ने शिवपाल यादव के लिए बनाया 'खास प्लान'
चाचा-भतीजे के बीच फिर से 'तलवारें ना खिचें', इसके लिए अखिलेश यादव ने शिवपाल को लेकर एक खास प्लान तैयार किया है।
नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से 'दो-दो हाथ' करने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कमर कस ली है। 25 साल पुरानी 'दुश्मनी' को भुलाकर जहां अखिलेश ने बसपा सुप्रीमो मायावती से गठबंधन के तार जोड़ लिए हैं, वहीं साल भर पहले हुई खटास को किनारे रख चाचा शिवपाल यादव को भी 2019 के महासमर में साथ ले लिया है। चाचा-भतीजे के बीच फिर से 'तलवारें ना खिचें', इसके लिए अखिलेश यादव ने शिवपाल को लेकर एक खास प्लान तैयार किया है।

और ये है अखिलेश का प्लान
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक सपा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अखिलेश अब शिवपाल यादव से पुराने विवाद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में अखिलेश ने शिवपाल यादव को कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। कन्नौज समाजवादी पार्टी के लिए एक सुरक्षित सीट मानी जाती है और वर्तमान में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव इस सीट से सांसद हैं। पिछले दिनों ही अखिलेश यादव ने ऐलान भी किया था कि डिंपल कन्नौज सीट से आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगी।

यूपी में अखिलेश, दिल्ली में शिवपाल
इस फैसले को गहराई से देखें तो संकेत साफ हैं कि अखिलेश यादव अब यूपी की राजनीति करेंगे और शिवपाल को केंद्र की राजनीति के लिए दिल्ली भेजा जाएगा। सूत्रों का कहना है सपा परिवार में रिश्ते बेहतर बनाए रखने के लिए यह एक अच्छा फैसला साबित होगा। शिवपाल यादव के लिए कन्नौज जैसी सुरक्षित सीट भी इसीलिए चुनी गई है ताकि वो आसानी से लोकसभा पहुंच जाएं। शिवपाल यादव फिलहाल यूपी की जसवंतनगर सीट से विधायक हैं। माना जा रहा है कि शिवपाल यादव भी इसपर हामी भर सकते हैं।

वर्चस्व की जंग में अलग हुए चाचा-भतीजे
आपको बता दें कि पिछले साल समाजवादी पार्टी में वर्चस्व को लेकर चाचा-भतीजे के बीच काफी विवाद हुआ था। अखिलेश यादव ने शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली थी। तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के दखल के बावजूद यह विवाद सुलझ नहीं पाया था। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव में शिवपाल यादव ने एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान कर अपनी राहें पूरी तरह से अलग कर ली थीं।

भाजपा के खिलाफ एकजुट हुआ यादव परिवार
इसके बाद हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में शिवपाल यादव और अखिलेश फिर से साथ आए। कयास लगाए जा रहे थे कि राज्यसभा चुनाव से पूर्व पार्टी नेताओं और विधायकों को दिए गए अखिलेश यादव के डिनर में शिवपाल यादव शामिल नहीं होंगे, लेकिन शिवपाल ने डिनर में शामिल होकर सबको चौंका दिया था। इसके बाद शिवपाल और उनके समर्थक विधायकों ने सपा के पक्ष में मतदान कर इस बात के संकेत दे दिए कि वो भी विवाद सुलझाकर फिर से साथ आना चाहते हैं।












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