तय हुआ महागठबंधन का गणित, जानिए कितनी सीटों पर लड़ेंगे अखिलेश और मायावती?
यूपी में 2019 के लिए बनने वाले महागठबंधन का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें आरएलडी को तो शामिल किया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को जगह नहीं दी जाएगी।
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नई दिल्ली। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस ऐलान के बाद, कि यूपी में 2019 में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए वो बहुजन समाज पार्टी का 'जूनियर' बनने को तैयार हैं, दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत लगभग फाइनल दौर में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि मायावती और अखिलेश के बीच सीटों के बंटवारे की रूपरेखा खिंच चुकी है। अब इसे लेकर केवल आधिकारिक ऐलान होना बाकी है। यूपी में 2019 के लिए बनने वाले महागठबंधन का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें आरएलडी को तो शामिल किया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को जगह नहीं दी जाएगी।

कौन, कितनी सीटों पर लड़ेगा चुनाव?
बसपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो महागठबंधन में मायावती और अखिलेश के बीच सीटों के भावी गणित को लेकर जो समझौता हुआ है, उसके मुताबिक 2019 में यूपी की 40 लोकसभा सीटों पर बसपा चुनाव लड़ेगी, जबकि 35 सीटों पर समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा 3 सीटें आरएलडी को दी जा सकती हैं। आरएलडी को मिलने वाली तीन सीट बागपत, कैराना और मथुरा हो सकती हैं। कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल तो नहीं किया जाएगा, लेकिन अमेठी और रायबरेली में सपा, बसपा या आरएलडी अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

कांग्रेस को क्यों नहीं किया जा रहा शामिल?
दरअसल, कांग्रेस को लेकर पहले से यह चर्चा थी कि महागठबंधन में उसकी भूमिक क्या होगी? कैराना में कांग्रेस ने भले ही अपना उम्मीदवार ना उतारा हो लेकिन गोरखपुर और फूलपुर में कांग्रेस प्रत्याशी को कोई खास वोट नहीं मिले। सपा और बसपा के रणनीतिकारों का भी मानना है कि कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल करने से कोई फायदा नहीं होगा। उनका मानना है कि सपा-बसपा के साथ आने से दलित और मुस्लिम वोट कांग्रेस के खेमे से खिसक चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास केवल सवर्ण वर्ग का वोट बैंक बचा है, जो महागठबंधन को ना मिलकर भाजपा के साथ जा सकता है। हालांकि अमेठी और रायबरेली सीटों पर महागठबंधन का कोई भी दल उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

मायावती को ज्यादा सीटें देने पर राजी अखिलेश
गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में भाजपा की हार के बाद यह माना जा रहा था कि 2019 के लिए बनने वाले महागठबंधन में बसपा सुप्रीमो मायावती की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। पिछले दिनों कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में मायावती ने कहा भी था कि अगर उन्हें महागठबंधन में उचित सम्मान नहीं मिला तो वो अकेले ही लोकसभा चुनाव में उतरने को तैयार हैं। मायावती के इस बयान पर खुद अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी लोग सम्मान देने में हमेशा आगे रहते हैं और हर कीमत पर बसपा के साथ गठबंधन होगा। इसके बाद हाल ही में अखिलेश ने कहा कि महागठबंधन को कायम रखने के लिए वो 2-4 सीटों का बलिदान करने को भी तैयार हैं।












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