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Kuldeep Singh Sengar Case: 'मैं चाहती हूं कि कुलदीप को फांसी हो'- उन्नाव केस में पीड़िता की मां की गुहार

Kuldeep Singh Sengar Unnao Case: उन्नाव रेप केस ने 2017 में पूरे देश को हिला दिया था। अब दिल्ली हाई कोर्ट के 23 दिसंबर 2025 के फैसले, जिसमें दोषी पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर सशर्त जमानत दी गई थी, ने फिर से आक्रोश की लहर दौड़ा दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर को CBI की अपील पर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

इस फैसले से पीड़िता और उसके परिवार को बड़ी राहत मिली। अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी। पीड़िता की मां ने खुशी जताते हुए कहा, 'मैं चाहती हूं कि कुलदीप को मौत की सजा हो। सुप्रीम कोर्ट ने हमें न्याय की उम्मीद दी।' आइए, समझते हैं पीड़िता की मां की गुहार, SC का फैसला, केस का बैकग्राउंड और आगे की लड़ाई...

Kuldeep Singh Sengar Unnao Case

पीड़िता की मां की गुहार: 'मौत की सजा हो, ताकि न्याय मिले'

पीड़िता की मां ने SC के फैसले पर खुशी जताई और कहा, 'हम बहुत खुश हैं। सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद। मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए।' आगे कहा, 'मैं चाहती हूं कि आरोपी को मौत की सजा दी जाए। निर्भया केस जैसे फांसी हो, ताकि हमें न्याय मिले।' यह भी कहा, 'अगर सेंगर बाहर आता तो हमारी जान को खतरा था। अब उम्मीद है कि न्याय होगा।'

सेंगर पर दिल्ली हाई कोर्ट के सशर्त जमानत वाले आदेश पर पीड़िता ने पहले कहा था कि फैसला सुनकर सुसाइड करने का मन हुआ, लेकिन बच्चों को सोचकर रुक गईं। वे बोलीं, 'मेरे बच्चे असुरक्षित हैं। कुलदीप को फांसी होनी चाहिए।' अब मां खुलकर मीडिया के सामने आपना दर्द बयां किया 8 साल बाद भी परिवार डरा हुआ है।

SC का फैसला: जमानत पर रोक, सेंगर जेल में रहेंगे

29 दिसंबर को SC की अवकाश पीठ ने CBI की अपील पर सुनवाई की। पीठ में CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। CBI ने कहा- केस POCSO और IPC 376(2) का। न्यूनतम सजा 20 साल। सेंगर जनप्रतिनिधि थे, प्रभाव का दुरुपयोग किया गया। जमानत गलत नजीर बनेगी। पीड़िता को खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों पर हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लिया। सेंगर की सजा निलंबन रद्द की दी। वे जेल में रहेंगे। अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी। पीठ का तर्क था- CBI की दलीलें प्रथम दृष्टया मजबूत। पीड़िता के वकील हेमंत कुमार मौर्या ने कहा, 'परिवार को जान का खतरा था। SC ने न्याय की उम्मीद दी।'

उन्नाव केस का बैकग्राउंड: राजनीतिक प्रभाव और पीड़िता की जंग

  • 2017: नाबालिग पीड़िता पर अपहरण-रेप। सेंगर BJP के पूर्व विधायक।
  • 2018: पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत।
  • 2019: कार एक्सीडेंट में दो रिश्तेदारों की मौत (साजिश के आरोप, लेकिन सेंगर बरी)।
  • दिसंबर 2019: ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद + 25 लाख जुर्माना।
  • 2020: पिता मौत केस में 10 साल सजा।
  • 2025: हाई कोर्ट ने 'लोक सेवक नहीं' कहकर सजा सस्पेंड।
  • अब: SC ने स्टे लगाया। गैंगरेप अपील पेंडिंग।

पीड़िता ने कहा: 'शरीर में 250 टांके, बच्चे असुरक्षित। मुझे फूलन देवी बनना पड़ेगा।'

गवाह के आरोप और CBI की अपील

CBI गवाह वीरेंद्र यादव ने IPS दीपक भूकर पर टॉर्चर के आरोप लगाए- गवाही बदलने का दबाव। CBI ने अपील में कहा: हाई कोर्ट की व्याख्या POCSO को कमजोर करती है। सेंगर की रिहाई से पीड़िता को खतरा।

न्याय की नई उम्मीद

पीड़िता की मां की गुहार- 'मौत की सजा हो'- परिवार के दर्द को बयां करती है। SC का स्टे बड़ा कदम है। लेकिन अपील बाकी- अंतिम न्याय कब? यह महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की परीक्षा है। क्या सेंगर को सजा बरकरार रहेगी? आपका विचार क्या है? कमेंट्स में बताएं!

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