Kochi Organ Donation Racket Busted: UP में सरगना नजीब अरेस्ट, सिस्टम की गहरी सड़ांध का खुलासा

Kochi Organ Donation Racket: केरल की पुलिस ने एक बड़े अंग दान जालसाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें जाली दस्तावेज बनाकर गैर-रिश्तेदारों के बीच अंग प्रत्यारोपण को वैध दिखाने का खेल चल रहा था। इस रैकेट का कथित सरगना मुहम्मद नजीब कल्लात्रा (नजीब) को 10 मई, रविवार को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया।

एर्नाकुलम ग्रामीण पुलिस प्रमुख केएस सुदर्शन ने बताया कि नजीब फरार होने के बाद UP में छिपा हुआ था और नेपाल भागने की तैयारी में था। वैज्ञानिक जांच और तकनीकी सुरागों के आधार पर टीम ने उसे ट्रैक किया। यदि फ्लाइट उपलब्ध हुई तो उसे आज ही कोच्चि लाया जाएगा। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि केरल के स्वास्थ्य व्यवस्था, पुलिस वेरिफिकेशन, स्थानीय निकायों और राजनीतिक सिफारिशी पत्रों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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रैकेट कैसे काम करता था? मॉडस ऑपरेंडी

भारतीय अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत अंग दान में सख्त नियम हैं। रिश्तेदार नहीं होने पर निस्वार्थ दान के लिए पुलिस क्लियरेंस, स्थानीय निकाय प्रमाण-पत्र, डॉक्टरों की सिफारिश, विधायक/सांसदों के पत्र और अस्पताल के दस्तावेज जरूरी होते हैं।

इस गिरोह ने इन्हीं प्रक्रियाओं को निशाना बनाया। अगस्त 2023 से सक्रिय यह नेटवर्क कल्लात्रा मेडिकल टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड के नाम से काम करता था। आरोप है कि इसने:

  • कोच्चि के दो निजी अस्पतालों के लेटरहेड पर जाली दस्तावेज तैयार किए।
  • पुलिस (DSP/ACP) के फर्जी क्लियरेंस सर्टिफिकेट बनाए।
  • पूर्व उडुप्पी विधायक सी.एच. कुन्हंबू, एर्नाकुलम सांसद हिबी ईडन, पूर्व कूथुपरम्बा विधायक के.पी. मोहनन, पूर्व अरूर विधायक दलीमा जोजो, केरल के पूर्व मुख्य सचेतक एन. जयराज और अलाथुर सांसद के.आर. राधाकृष्णन जैसे नेताओं के नाम से जाली पत्र और लेटरहेड तैयार किए।
  • जाने-माने डॉक्टरों के सिफारिशी पत्रों में हेराफेरी की।
  • फर्जी आधार कार्ड और पहचान दस्तावेज भी बनाए।

गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर अंग बेचने के लिए तैयार करता था और अमीर मरीजों को 'दान' के रूप में दिखाकर प्रत्यारोपण कराता था।

गिरफ्तारियां और जांच की पूरी टाइमलाइन

  • 9 मई: नजीब की पत्नी रशीदा को गिरफ्तार किया गया।
  • पहले: कुन्नाथुनाड के मोराक्काला निवासी सन्नी वर्गीस (56) और पत्नी सिनी वर्गीस (50), चेलक्कुलम पट्टिमट्टम के सानोज (32) गिरफ्तार।
  • कोल्लम: किलिकोल्लूर पुलिस ने श्रीजा और सुधीर को गिरफ्तार किया।
  • पुलिस ने कई डोनर्स के बयान भी दर्ज किए हैं।

कुन्नाथुनाड पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में नजीब मुख्य आरोपी है। कई जिलों में अलग-अलग मामले दर्ज हैं। अब SIT गठित कर गहन जांच शुरू की गई है।

भारतीय कानून और अंग दान की वास्तविकता

THOTA-1994 (संशोधित 2011) के तहत व्यावसायिक अंग व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन 'भावनात्मक संबंध' या altruistic दान की आड़ में गड़बड़ियां आम हैं। देश में अंग दान की कमी बहुत ज्यादा है (लगभग 0.5 प्रति मिलियन आबादी), जिसका फायदा माफिया उठाते हैं। केरल में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, इसलिए ऐसे रैकेट यहां फलते-फूलते हैं। यह मामला पूरे देश के लिए चेतावनी है - खासकर उन राज्यों में जहां निजी अस्पतालों का दबदबा है।

केरल पुलिस की तेज कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। SIT को पूरे नेटवर्क को उजागर करना होगा, ताकि दोषी सिर्फ छोटे एजेंट न हों, बल्कि बड़े माफिया और मिलीभगत करने वाले भी सजा पाएं। ह रैकेट दिखाता है कि जब सिस्टम में दरारें होती हैं, तो अपराधी उन्हें आसानी से भेद लेते हैं। स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता - तीनों क्षेत्रों में सख्त सुधार की जरूरत है।

अंग दान एक महान कार्य है, लेकिन जब इसे व्यापार बना दिया जाए तो यह अपराध बन जाता है। कोच्चि रैकेट की पूरी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई से ही आम जनता का विश्वास बहाल हो सकेगा।

(PTI इनपुट के साथ)

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