जानिए कौन हैं धीरेंद्र पाल सिंह जिनको योगी ने सौंपी शिक्षा की सेहत सुधारने की जिम्मेदारी
लखनऊ, 22 अगस्त: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब यूपी की शिक्षा व्यवस्था को सुधार करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक तरफ सरकार यूपी में ऐसी पहली एजुकेशन टाउनिशप विकसित किए जाने की प्लानिंग चल रही है जहां छात्रों को एक कैंपस के भीतर पढ़ाई के साथ ही कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि इसका लाभ छात्रों को मिल सके। वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े सूत्रों की माने तो यूपी में सरकार की प्लानिंग एक एजुकेशन टॉउनशिप विकसित करने की है उसकी मॉनिटरिंग का काम इनको सौंपा जाएगा साथ ही नई शिक्षा निति को यूपी में प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी भी इनको सौंपी जाएगी।

नई शिक्षा नीति को लेकर यूपी ने उठाया अहम कदम
यूपी के मुख्यमंत्री के इस इस कदम को उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रो सिंह 2018 से 2021 तक यूजीसी के अध्यक्ष थे। एक अधिकारी ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की शिक्षा और साक्षरता दर के स्तर को बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे और एक विशेषज्ञ के साथ जुड़ना चाहते थे। अधिकारियों ने बतायाक यूपी में शिक्षा की सेहत सुधारने के लिए अब अमेरिका की तर्ज पर एक एजुकेशन टाउनशिप विकसित करने की प्लानिंग चल रही है। इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की हरी झंडी योगी ने दे दी है।

यूपी की शिक्षा की सेहत सुधारने की कवायद
उत्तर प्रदेश में NEP-2020 को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए योगी सरकार ने अहम कदम उठाया है. प्रोफेसर सिंह ने लगभग चार दशकों के अपने करियर में उच्च शिक्षा के कई शैक्षणिक संस्थानों का नेतृत्व किया है। कुलपति के रूप में, प्रो सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी, डॉ एचएस गौर विश्वविद्यालय, सागर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर नामक तीन विश्वविद्यालयों का नेतृत्व किया है। शिक्षाविद् मनीष हिन्दवी की माने तो यूपी में नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना भी एक बड़ी चुनौती है। यूपी के विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा निति को लागू किए जाने की जिम्मेदारी इनको सौंपी जा सकती है।

यूजीसी के चेयरमैन भी रह चुके हैं धीरेंद्र पाल सिंह
2008 से 2011 तक बीएचयू के वीसी रहे प्रोफेसर सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान पर्यावरण और सतत विकास संस्थान की स्थापना की। उन्होंने 2012 से 2015 तक देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलपति के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने निदेशक, राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) के रूप में भी कार्य किया है। प्रोफेसर सिंह के यूपी से जुड़ने की अटकलें काफी पहले से ही लगाईं जा रही थीं और माना जा रहा था कि जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।

केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं
प्रो सिंह ने केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE), भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR), यूनेस्को के साथ सहयोग के लिए भारत के राष्ट्रीय आयोग, RUSA, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्यान्वयन समिति आदि के पदेन सदस्य के रूप में योगदान दिया है। यूपी के शैक्षणिक विशेषज्ञों की माने तो यूपी में यह अपने तरह का अलग कदम उठाया गया है जिससे यूपी की शिक्षा व्यवस्था और नौकरी की आस लगाए यूपी के युवाओं को इससे लाभ मिलेगा। उन्हें अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और परियोजनाओं में भी व्यापक अनुभव है। उन्हें पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार, दशक के पर्यावरणविद् (पूर्वांचल) पुरस्कार, भारत ज्योति पुरस्कार, यूपी रत्न पुरस्कार, आगरा विश्वविद्यालय गौरव श्री पुरस्कार, राजा बलवंत सिंह शिक्षा सम्मान और राष्ट्र निर्माता पुरस्कार जैसे कई सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यूपी में एजुकेशन टाउनशिप विकसित करने की तैयारी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने यूपी की शिक्षा की सेहत को सुधारने और युवाओं को रोजगार परक बनाने के लिए अब यूपी में पहली एजुकेशन टाउनशिप विकसित करने को हरी झंडी दे दी है। सीएम की मंजूरी के बाद अब इस प्रोजेक्ट का खाका तैयार करने में अधिकारी जुट गए हैं। प्रो धीरेंद्र पाल सिंह भी इसमें अपने अनुभव का योगदान देंगे और यूपी ही नहीं देश के पहले एजुकेशन टाउनशिप को विकसित करने का सपना जल्द ही यूपी में पूरा होगा।












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