जानिए कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की पूरा कहानी, जिसमें 20 साल बाद आज रिहा हो रहे अमरमणि-मधुमणि
Madhumita Shukla Hatyakand: कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी गोरखपुर जिला जेल से आज रिहा हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भी अमरमणि की रिहाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि के अच्छे व्यवहार को देखते हुए उन्हें रिहा करने का फैसला लिया गया है। ऐसे में आज हम आपको मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की वो कहानी बताएंगे, जिसने बाहुबली और कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी के सितारों को गर्दिश में मिला दिया।

इतना ही नहीं, मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की वजह से उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया था। जी हां...वो तारीख थी 09 मई 2023, इस दिन 24 साल की उभरती हुई कवयित्री मधुमिता शुक्ला की लखनऊ स्थित पेपर मिल कॉलोनी के उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
जिस वक्त मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या की गई थी, उस समय वो 7 महीने की प्रेग्नेंट थी। हालांकि, मधुमिता शुक्ला के प्रेग्नेंट होने की जानकारी मीडिया में बाद में सामने आई थी। बता दें कि मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के वक्त प्रदेश में बसपा की सरकार थी और मायावती मुख्यमंत्री थी। तो वहीं, अमरमणि त्रिपाठी बसपा सरकार के कद्दावर मंत्रियों में शुमार थे।
मधुमिता के नौकर ने खोले थे कई अहम राज
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की सूचना जैसे ही पुलिस को मिली थी तो वह चंद मिनटों में मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस जांच के दौरान मधुमिता के नौकर देशराज ने पुलिस अधिकारियों कई अहम राज बताए थे। मधुमिता के नौकर देशराज द्वारा दी गई जानकारी से हड़कंप मच गया और इस बात की जानकारी बड़े अधिकारियों को दी गई। दरअसल, देशराज ने मधुमिता और अमरमणि के प्रेम प्रसंग के बारे में जानकारी दी थी।
पुलिस बेहद संभल कर कर रही थी मामले की जांच
मधुमिता हत्याकांड के वक्त अमरमणि बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री थे, इसलिए पुलिस इस मामले की जांच बेहद संभल कर कर रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जांच सीबीसीआईडी (CBCID) को सौंपी थी। इस दौरान पुलिस ने मधुमिता के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद उसके शव को गृह जनपद लखीमपुर भेजा दिया था।
मेडिकल रिपोर्ट पर पड़ी पुलिस अधिकारी की नजर
इस दौरान मधुमिता हत्याकांड की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी की नजर मधुमिता की एक मेडिकल रिपोर्ट पर पड़ी। इस मेडिकल रिपोर्ट मधुमिता के गर्भवती होने का जिक्र था, जिसने पूरे मामले की जांच की दिशा बदल दी। इस के बाद मधुमिता के शव को तत्काल रास्ते से वापस मंगवाकर दोबारा परीक्षण कराया। डीएनए जांच में सामने आया कि यह बच्चा अमरमणि त्रिपाठी का था।
CBI को सौंपी गई जांच
निष्पक्ष जांच के लिए विपक्ष के बढ़ते दबाव की वजह से बसपा सरकार को आखिरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति करनी पड़ी। सीबीआई जांच के दौरान भी गवाहों को धमकाने के आरोप लगे तो मुकदमा देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था। देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, भतीजा रोहित चतुर्वेदी और शूटर संतोष राय को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
मधुमिता की बहन को लगने लगा था कि शायद नहीं मिलेगा न्याय
जबकि एक अन्य शूटर प्रकाश पांडेय को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालांकि, बाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रकाश पांडेय को भी दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, उस वक्त मधुमिता की बहन निधि को लगने लगा था कि उन्हें अब न्याय नहीं मिलेगा। क्योंकि, अमरमणि त्रिपाठी उस समय खुद मंत्री थे औऱ बसपा सरकार में उनका प्रभाव भी अधिक था।












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