पीएम जिस झंडे को लाल किले से फहराते हैं, उसके बारे में हुआ ये खुलासा
लाल किले से प्रधानमंत्री जिस झंडे को फहराते हैं उसके बारे में आरटीआई से जो खुलासा हुआ है, उसके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे।
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर जिला अपने अतीत में आजादी की लड़ाई में दी गई कुर्बानियों के लिए जाना जाता है। शहीदों की नगरी के रूप में विख्यात शाहजहांपुर की सरजमीं पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह जैसे अमर शहीदों की जन्म भूमि रही है। इसके साथ ही आपको शाहजहांपुर से जुड़ी एक ऐसी बात बताएंगे जिसे आज तक शायद आपने नहीं सुना होगा। हम उस झंडे के बारे में आपको बताएंगे जिसे 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री फहराते हैं।

आपको मिलेगा इन सवालों के जवाब?
आपको नहीं पता होगा कि लाल किले से फहराया जाने वाला झंडा किस फैक्ट्री से मंगवाया जाता है? किस कपड़े से वह झंडा बना होता है? झंडे की लंबाई, चौड़ाई कितनी होती है? और प्रधानमंत्री के झंडे को फहराए जाने के बाद किस स्थान पर सुरक्षित रखा जाता है? नीचे आपको इस झंडे से जुड़े इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे।

रेशम का बना होता है देश का झंडा
15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा फहराए जाने वाला ध्वज रेशम से बना होता है। उस ध्वज का आकार 307cm × 240cm होता है। प्रधानमंत्री द्वारा झंडे को फहराए जाने के बाद उसको सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सशस्त्र बलों की होती है। यह झंडा उनको सुपुर्द किया जाता है। अब बात करते हैं कि इस झंडे को प्रदेश के किस शहर की कौन सी फैक्ट्री से तैयार कराकर मंगवाया जाता है?

शाहजहांपुर में बनाया जाता है यह झंडा
वह शहर है देश के उत्तर प्रदेश का जनपद शाहजहांपुर। जहां से इस ध्वज को बनाया जाता है। एक आरटीआई से मिली सूचना में इन बातों का खुलासा हुआ है। दरअसल आयुध वस्त्र निर्माण फैक्ट्री शाहजहांपुर में है। इस फैक्ट्री ने अपने 100 साल भी पूरे कर लिए हैं। इस फैक्ट्री में आर्मी की वर्दी तैयार की जाती है। जिसको शहर में लोग दरजीखाना भी कहते हैं। लाल किले पर फहराए जाने वाले झंडे को इसी फैक्ट्री में बनाया जाता है। हर 15 अगस्त को राष्ट्र ध्वज बनाने की जिम्मेदारी इस फैक्ट्री को दी जाती है।

शाहजहांपुर को है इस बात पर गर्व
15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री राष्ट्र ध्वज को फहराते हैं तो उस वक्त देश गर्व महसूस कर रहा होता है तो वहीं शाहजहांपुर की खुशी डबल हो जाती है क्योंकि उस झंडे को यहांं से मंगवाया जाता है। बताते हैं कि शहर में आयुध वस्त्र निर्माण फैक्ट्री बनने के बाद शहर की बेरोजगारी इस फैक्ट्री ने खत्म कर दी थी। बताते हैं, उस वक्त शहर की आधी आबादी से ज्यादा लोग इस फैक्ट्री में नौकरी करते थे और आज भी तीन से चार हजार के करीब वर्कर्स इस फैक्ट्री में है।












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