शादी के 5 माह बाद ही शहीद हुए कैप्टन अंशुमान सिंह की लव स्टोरी, शहादत की पूरी कहानी, पत्नी की जुबानी
Kirti Chakra Martyr Anshuman Singh Love Story : जेहन में 8 साल के रिलेशन, 5 माह की शादी की यादें और पति की शौर्य गाथा के साथ एक वीरांगना दिल्ली राष्ट्रपति भवन पहुंचीं। नम आंखें और रुंध गला। मानों बिना कुछ कहें ही असहनीय पीड़ा आंखों से बयां हो रही थी। पति की शहादत का कीर्ति चक्र हाथों में थामते ही वीरांगना स्मृति का सब्र का बांध टूट गया। अपनी व शहीद पति कैप्टन अंशुमान सिंह से कॉलेज में पहली मुलाकात से लेकर तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को आखिरी सैल्यूट तक पूरी कहानी बयां की।
स्मृति ने बताया कि शहादत से एक दिन पहले अंशुमान ने फोन पर लंबी-चौड़ी बातें की थी। जिसमें बच्चों से लेकर घर बनवाने तक, आगामी 50 सालों की हमने प्लानिंग भी की थी। स्मृति की आंखों से छलते आंसू उनकी पहाड़ जैसी अकेली जिंदगी का दर्द बयां कर रहे थे। 8 साल के लॉग डिस्टेंस रिलेशनशिप के बाद शादी....

भावुक स्मृति ने बताया कि वो बहुत ही सक्षम थे। वो अपने सीने में पीतल लेकर मरना चाहते थे। न कि कोई गुमनामी या साधारण सी मौत। हमारी मुलाकात कॉलेज के पहले सेमस्टर में हुई थी। नाटकीय ढंग से नहीं था, लेकिन फिर भी हमें पहली नजर का प्यार हो गया। करीब एक महीने बाद अंशुमान का आर्मर्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (Armed Forces Medical College) पुणे में सिलेक्शन हो गया। वह बहुत ही बुद्धिमान शख्सियत थे। हमारा लॉग डिस्टेंस रिलेशनशिप था। करीब 8 साल के बाद हमने शादी की। दुर्भाग्य की बात यह है कि शादी के दो महीने बाद ही उनकी पोस्टिंग सियाचिन में हो गई।
शहादत के एक दिन पहले कही थी ये बात
स्मृति बताती हैं कि घर बनवाने से लेकर बच्चों तक, जिंदगी के आने वाले 50 साल को लेकर 18 जुलाई को हमारी फोन पर लंबी बातचीत हुई। 19 जुलाई की पीड़ा को साझा करते भावुक हुईं स्मृति बताती हैं कि जब मुझे कॉल आया। जिसमें बताया गया कि अब वो नहीं रहें। करीब 78 घंटे मेरी जिंदगी के सबसे खराब साबित हुए। मैं यह बात स्वीकार करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। मैं सोच रही थी, कि शायद अभी यह सच नहीं है। लेकिन, आज मेरे हाथ में कीती चक्र है। वह एक हीरो हैं, रियल हीरो।
आगे की पहाड़ जैसी जिंदगी को लेकर स्मृति ने कहा कि मैनेज करूंगी। क्योंकि, उन्होंने बहुत कुछ मैनेज किया है। उन्होंने अपनी जिदंगी, परिवार को दी है।
धधकती आग में लगाई छलांग, वीरगति को प्राप्त
आपको बता दें कि बीते 19 जुलाई 2023 को सियाचिन बंकर में अचानक आग लग गई। जिसमें फंसे अपने साथियों को देखकर रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह धधकती आग के बीच कूद पड़े। अपने साथियों को सुरक्षित बाहर तो निकाल लिया, लेकिन खुद वीरगति को प्राप्त हो गए।
10 फरवरी को शादी, 19 जुलाई को शहादत की
देवरिया के रहने वाले अंशुमान की शादी पठानकोट की रहने वाली स्मृति से 10 फरवरी 2023 को हुई थी। करीब दो महीने बाद ही अंशुमान का सियाचिन में पोस्टिंग कर दिया गया। वहीं, शादी के 5 माह बाद ही यानी 19 जुलाई को उनकी शहादत की खबर आई। ताबूत में तिरंगे से लिपटा पार्थिव शरीर देखकर पत्नी और परिवार के बीच कोहराम मच गया।
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