Kanpur: नर्सिंग होम या मौत का घर? जन्म के कुछ घंटे बाद कैसे जिंदा जल गई नवजात? बिना परमिशन चल रहा था NICU!
Kanpur News: कानपुर में एक प्राइवेट नर्सिंग होम की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। बिठूर स्थित इस अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) में वार्मर मशीन में आग लगने से एक नवजात बच्ची की मौत के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिला प्रशासन ने बिना अनुमति के एनआईसीयू (NICU) चलाने और अन्य गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया है। आइए जानतें हैं प्रशासन ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है।

वार्मर मशीन बनी काल: मासूम की मौत का खौफनाक मंजर
अस्पताल के रिकॉर्ड और परिजनों के अनुसार, रविवार शाम करीब 4 बजे सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्ची का जन्म हुआ था। जन्म के बाद उसे नियमित निगरानी के लिए एनआईसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि मां को वार्ड में भेज दिया गया। कुछ ही घंटों बाद, जिस वार्मर मशीन पर बच्ची को रखा गया था, उसमें कथित तौर पर आग लग गई। इस हादसे में मासूम बुरी तरह झुलस गई और उसे बचाया नहीं जा सका।
बिना अनुमति चल रहा था एनआईसीयू
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के आदेश पर हुई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि नर्सिंग होम रजिस्टर्ड तो था, लेकिन उसके पास एनआईसीयू चलाने की अनुमति नहीं थी। इतना ही नहीं, निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्र (fire extinguishers) भी एक्सपायर्ड पाए गए।
प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि यदि दोबारा एनआईसीयू चलता पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया गया है।
कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा ऑडिट के निर्देश
मृतक नवजात के परिजनों की शिकायत पर बिठूर थाने में नर्सिंग होम के डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने जिले के सभी अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरणों के अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट की घोषणा की है और बिना लाइसेंस वाली स्वास्थ्य इकाइयों के खिलाफ अभियान चलाने की चेतावनी दी है।
अस्पताल में हंगामा और रिश्वत के आरोप
हादसे के बाद गुस्साए परिजनों ने रविवार को अस्पताल में जमकर विरोध प्रदर्शन किया और एनआईसीयू में तोड़फोड़ भी की। परिजनों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने मामले को रफा-दफा करने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये की पेशकश की थी।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) रमित रस्तोगी ने बताया कि आग के कारणों का पता लगाने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है।












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