लोधों के सर्वमान्य नेता थे कल्याण सिंह, अब कौन होगा उनका विकल्प; पार्टी पहले भी कई चेहरों पर लगा चुकी है दांव
लखनऊ, 24 अगस्त: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के बाद अब लोध समुदाय का अगला लीडर कौन होगा यह बड़ा सवाल है। कल्याण सिंह ओबीसी चेहरे के साथ ही लोध समुदाय के सर्वमान्य नेता थे। उनके जाने के बाद इस समुदाय को कल्याण के कद वाले एक नेता की जरूरत है जो अभी भाजपा के पास नहीं है। इससे पहले भी जब कल्याण सिंह भाजपा से अलग हुए थे तब पार्टी ने कई चेहरों पर दांव लगाया लेकिन कल्याण की शख्सियत के आगे सब फीके ही रहे। अब बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती एक ऐसे नेता को ढूंढने की है जो कल्याण सिंह को रिप्लेस कर सके।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का निधन 21 अगस्त को हो गया था। उनके जाने के बाद संगठन और सरकार ने मिलकर उनको पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। पीएम मोदी से लेकर कई बड़े नेताओं ने लखनऊ आकर उनको श्रद्धांजलि दी थी। कल्याण के निधन के बाद बीजेपी के सामने नई चुनौती कल्याण के कद वाले नेता ढूंढने की है। कल्याण सिंह लोध समुदाय के साथ ही हिन्दुत्व और ओबीसी के चेहरे भी थे। इन सभी चीजों का मिश्रण एक नेता में मिलना ही सबसे बड़ी चुनौती है।
कल्याण सिंह ने दो बार पार्टी से नाता तोड़ा था
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में दो बार भाजपा छोड़ी थी। पहली बार 1999 में शीर्ष नेतृत्व से मतभेदों की वजह से वो पार्टी से बाहर चले गए थे। इसके बाद वर्ष 2004 में उनकी भाजपा में वापसी हुई थी। ठीक पांच साल बाद 2009 में फिर उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी। तब उन्होंने कहा था कि पार्टी के भीतर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई और अपने धुर विरोधी मुलायम सिंह से भी हाथ मिलाने से परहेज नहीं किया। बाद में अंतिम बार जब वो भाजपा में शामिल हुए तो उन्होंने कहा कि अब वह पार्टी छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।
कल्याण के पार्टी छोड़ने के बाद भाजपा ने कई चेहरों को आजमाया
भाजपा से जब कल्याण सिंह पहली बार अलग हुए थे तब भाजपा ने उमा भारती को आगे लाकर यूपी में लोध नेता के तौर पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया था। उमा भारती ने चरखारी विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था। लेकिन वह यूपी की सियासत में ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाईं। कल्याण सिंह के विकल्प के तौर पर उनको आगे लगाने की कोशिश की गई थी लेकिन तब उमा भारती को अपने आपको उस तरह प्रस्तुत नहीं कर पाईं।

धर्मपाल और साक्षी महाराज पर भी लगाया दांव
उमा भारती के बाद भाजपा ने पश्चिमी उप्र के ही नेता धर्मपाल सिंह को भी आगे लाकर कल्याण सिंह की कमी को पूरा करने का प्रयास किया। धर्मपाल सिंह को योगी सरकार में मंत्री भी बनाया गया लेकिन उनका कद भी लोधों को प्रभावित नहीं कर पाया। बाद में योगी ने उन्हें मंत्रिमंडल से भी हटा दिया था। उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज भी लोध समुदाय से आते हैं और एक समय में पार्टी ने उनको भी आगे बढ़ाया लेकिन वो अपने बयानों के चलते हमेशा ही विवादों में ही घिरे रहते हैं।

मोदी ने कल्याण के करीबी को ही बनाया केंद्र में मंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ महीने पहले ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इसमें यूपी के जिन सात मंत्रियों को शामिल किया गया था उसमें एक नाम कल्याण सिंह के करीबी बी एल बर्मा का भी था। बताया जाता है कि कल्याण सिंह ने जब भाजपा छोड़ी थी उसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई थी।
उस समय बीएल बर्मा को ही यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। जब कल्याण सिंह दोबारा भाजपा में आए उसी समय बर्मा भी भाजपा में शामिल हो गए थे। वह रूहेलखंड और भाजपा के ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। लोधियों के बीच उन्हें नेता बनाने के मकसद से ही उनको पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था। योगी सरकार बनने के बाद उन्हें यूपी सिडको का चेयरमैन बनाया गया था।
वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज ने कहा,
''निश्चित तौर पर भाजपा के सामने यह चुनौती है कि कल्याण सिंह के कद का नेता कौन होगा। उनके अंदर जो गुण थे वो बिरले ही किसी में मिलते हैं। कल्याण सिंह एक हिन्दुत्व का भी चेहरा थे और अपने समाज के सर्वमान्य नेता था। लोध के साथ ही ओबीसी में भी उनकी स्वीकार्यता थी। उनके जैसा नेता मिलन अब मुश्किल है।''
कल्याण के बेटे और पोते पर विरासत आगे बढ़ाने का दारोमदार
कल्याण सिंह के निधन के बाद अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके बेटे और पोते पर है। कल्याण सिंह के परिवार की बात करें तो उनके बेटे राजवीर सिंह अभी एटा से सांसद हैं तथा उनके पोते संदीप सिंह योगी सरकार में राज्य मंत्री हैं। कल्याण के जाने के बाद अब उनके परिवार के सामने उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है। राजवीर सिंह को लोधों का समर्थन हासिल कर अपना कद बड़ा करना होगा। कल्याण सिंह से विरासत में मिली राजनीति निभाने वाले राजवीर सिंह के बड़े बेटे ने भी यह परंपरा कायम रखी है। वे भी पिता की तरह राजनीति कर रहे हैं।
योगी सरकार में राज्य मंत्री हैं संदीप सिंह
कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह की चार संतानों में सबसे बड़े बेटे संदीप सिंह ने भी राजनीति में हैं। पिछले विधानसभा में उन्हें टिकट दिया गया था जिसमें उन्होंने शानदार जीत हासिल की थी। योगी सरकार में उन्हें शिक्षा विभाग की जिम्मेदाररी दी गई थी। संदीप यूपी में शिक्षा राज्य मंत्री की जिम्मेदारर संभाल रहे हैं। संदीप सिंह के बाद राजवीर सिंह की बेटी पूर्णिमा सिंह, फिर श्वेता सिंह और फिर सबसे छोटे बेटे सौरभ सिंह हैं।
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