Ramcharitmanas Controversy in UP: श्रीरामचरित मानस पर बयान देकर अखिलेश की टेंशन बढ़ा रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ?
Shriramcharitmans Controversy in UP: उत्तर प्रदेश में श्रीरामचरित मानस को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। स्वामी प्रसाद के बयान के बाद अब बीजेपी लगातार अखिलेश यादव से स्पष्टीकरण मांग रही है।

Shriramcharitmanas Controversy in UP: उत्तर प्रदेश में श्रीरामचरित मानस को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है। सपा के नेता और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस महाकाव्य को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। स्वामी प्रसाद के बयान के बाद बीजेपी ने सपा और अखिलेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी अब सीधेतौर पर ये आरोप लगा रही है कि स्वामी प्रसाद ने जो बयान दिया है उससे करोड़ों हिन्दुओं और रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। स्वामी ने यह बयान अखिलेश के इशारे पर ही दिया है। हालांकि इस सियासी महाभारत को लेकर जिस तरह से बवाल खड़ा हुआ है उसके पीछे के कई राजनीतिक मायने भी हैं।
श्रीराम चरितमानस मामले को लेकर बीजेपी फ्रंटफुट पर
यूपी में जिस तरह से श्रीरामचरित मानस का मुद्दा गरमाया है उससे तो यही लगता है कि यह इतनी आसानी से ठंडा होने वाला नहीं है। बीजेपी इस बयान को पूरी तरह से भुनाने में जुटी है। जिस तरह से बीजेपी के नेता सपा के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान पर लगातार बयान दे रहे हैं उससे यही लगता है कि बीजेपी हाथ आए मौके को आसानी से गंवाना नहीं चाहती है। स्वामी प्रसाद को अखिलेश का भोंपू बताकर बीजेपी अब सीधे अखिलेश पर वार कर फ्रंटफुट पर खेल रही है। उसको लग रहा है कि बीजेपी इसे मुद्दे को लेकर अखिलेश को आसानी से हिन्दू विरोधी साबित कर सकती है।
सपा को हिन्दू विरोधी बताने के लिए बीजेपी के मिला अवसर
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बीजेपी के नेताओं का मानना है कि श्रीरामचरित मानस पर विवादित टिप्पणी से यह साफ हो गया है कि सपा की मानसिकता हिन्दू विरोधी है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस मामले को लेकर मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस कर डाली। इससे ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीजेपी इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाली नहीं है। बीजेपी अब कह रही है कि सपा तुष्टीकरण के लिए किसी हद तक जा सकती है। अखिलेश को इस बात पर स्पष्टीकरण देना चाहिए कि स्वामी प्रसाद ने जो टिप्पणी की है उससे वो सहमत हैं या असहमत हैं।
अखिलेश पर हमला बोलते हुए डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा,
सपा मुस्लिम तुष्टिकरण का घटिया प्रयास कर कर रही है। इससे हिंदू भावनाएं आहत हुई हैं। कई घाटों का पानी पीकर सपा में गए एक नेता रामचरित मानस के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। वह अखिलेश यादव के भोंपू बनकर काम कर रहे हैं। अखिलेश यादव की चुप्पी सवाल खड़ा करती है। अखिलेश तो प्रयागराज में डुबकी लगाने गए थे। विवादित बयान का समाजवादी पार्टी ने कोई विरोध नहीं किया। इससे इनका असली चरित्र उजागर हुआ है। अखिलेश यादव इसपर चुप क्यों हैं। यूपी की 30 करोड़ जनता को जवाब देना चाहिए।
बीजेपी को बैठे बिठाए मिला अखिलेश को घेरने का मौका
दरअसल भारतीय जनता पार्टी को यूपी में अखिलेश के खिलाफ एक बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया है। हालांकि सपा के सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव भी स्वामी प्रसाद के बयान से खुश नहीं हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामा था। चुनाव तो स्वामी प्रसाद हार गए थे लेकिन बाद में अखिलेश ने उनको एमएलसी बना दिया जिससे उनकी विधायकी बच गई। हालांकि अब स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान ही अखिलेश और सपा पर भारी पड़ते दिख रहे हैं जिसकी वजह से सपा की फजीहत हो रही है।
अखिलेश को क्या भारी पड़ रहा स्वामी प्रसाद का बयान
इधर, स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान समाजवादी पार्टी के लिए भारी साबित हो रहा है। इससे अखिलेश की चुनौतियां और बढ़ रही हैं। हालांकि अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने यह बयान देकर मामले को शांत करने की कोशिश की है कि प्रभु श्रीराम हम सबके आदर्श हैं लेकिन बीजेपी लगातार इस मामले को लेकर अखिलेश का स्पष्टीकरण मांग रही है। सपा के प्रवक्ता राजीव राय का कहना है कि बीजेपी जानबूझकर मामले को तूल देकर माहौल खराब करना चाहती है। बीजेपी को हमेशा ही धर्म से जुड़ा मामला सूट करता है। पार्टी पहले ही इसपर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।












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