Women's Day 2025: महज 15 सौ रुपए से की शुरुआत, आज है 4 करोड़ का कारोबार , संगीता की कहानी खुद उनकी जुबानी

International Women's Day Sangita Pandey Success Story Gorakhpur Uttar Pradesh: कहते हैं कठिन परिश्रम और सतत प्रयास से कुछ भी हासिल हो सकता है। जीतने की जिद हो और सफलता की बुलंदियों पर जाना हो तो उसे कोई रोक नहीं सकता। समय कितना ही विपरीत क्यों न हो अगर हिम्मत न हारी जाए तो सब कुछ संभव है। आज हम एक ऐसी ही महिला के बारे में बात कर रहे हैं जिसने अपने प्रबल आत्मबल , कठोर परिश्रम से कांटो भरे कर्म पथ पर चलते हुए सफलता पाई है। हम बात कर रहे हैं सीएम सिटी गोरखपुर की रहने वाली संगीता पांडेय की। जिन्होंने अल्प संसाधन में अपने काम की शुरुआत कर उसे बुलंदियों तक पहुंचाया। संगीता पांडेय ने वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव से खास बातचीत की।

क्या है कारोबार
संगीता पांडेय बताती हैं कि वह मिठाई के डिब्बे बनाने का काम करती है। रोज हजारों डिब्बे बनाए जाते है। जिसमें सैकड़ों महिलाओं का काम मिला हुआ है।

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ऐसे हुई कारोबार की शुरुआत
संगीता बताती हैं मेरे मन में शुरू से कुछ अच्छा और बड़ा करने का मन था। मेरी शादी हो गई, तीन बच्चे हुए, उसके बाद भी मन में कुछ करने की इच्छा बनी रही। तब मैने घर पर ही एक कमरे में मिठाई के डिब्बे बनाने शुरू किए। उस समय मेरे पास महज 15 सौ रुपए थे।

साइकिल से की शुरुआत
उन्होंने कहा कि मै डिब्बे बनती और खुद साइकिल से लेकर दुकानों पर जाती।

सुनने पड़े लोगों के ताने
संगीता कहती हैं कि जब मैने इस काम की शुरुआत 2014 में की थी तब मुझे घर से बाहर लोगों के ताने सुनने पड़े थे। बहुत आलोचना भी हुई। पर मैने लोगों की एक न सुनी।

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खुद को किया मोटीवेट
उन्होंने बताया कि मुझे कई बार निराशा हाथ लगती थी। दुःख भी होता था पर मैं निराश नहीं होती थी। खुद को प्रेरित करती और फिर काम शुरू कर देती।

नहीं जानती थी कैसे होगा
उन्होंने बताया कि न तो मेरे पास संसाधन थे और न ही पैसे। काम कैसे होगा यह भी नहीं पता था। बस दृढ़ इच्छा शक्ति थी कि करना है।

मार्केट को जाना
उन्होंने कहा कि इस काम के बारे में भी मैं बहुत कुछ नहीं जानती थी। इसके लिए गोरखपुर , लखनऊ के बाजार को समझती थी। लखनऊ हफ्ते में दो बार तीन बार जाना होता था। धीरे धीरे जानकारी हो गई।

जब मिलने लगे ऑर्डर
शुरुआत में जो दुकानदार मुझे निराश करते थे उन्होंने ही बाद में मुझे ऑर्डर देना शुरू कर दिया। मेरी मेहनत और काम दोनों बढ़ता गया। धीरे धीरे गोरखपुर और आस पास से मुझे ऑर्डर मिलता था। अब उत्तर प्रदेश , बिहार और नेपाल से भी ऑर्डर मिलते है।

सैकड़ों महिलाओं को दिया काम
उन्होंने कहा कि जब मैं आत्मनिर्भर बन गई तब मैने अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सोची। आज यहां सैकड़ों महिलाएं काम करती हैं जो बेहद खुश है।

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महिलाओं से की अपील
संगीता पांडेय ने महिलाओं से कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं बल्कि आगे आकर खुद को काम करने की जरूरत है। छोटा ही सभी सभी को कुछ अपना काम करना चाहिए। आज पीएम मोदी और सीएम योगी की सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है।

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