UP के चुनाव में इस बार आधी आबादी ने भी प्रचार में दिखाया दम, जानिए
लखनऊ, 7 मार्च: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हैं। राज्य में सातवें चरण का मतदान हो रहा है और 10 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस बार कोरोना के चलते शुरुआती दौर में चुनाव प्रचार काफी सुस्त रहा है। लेकिन चुनाव प्रचार के बाद के तीन चरणों में राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी। सभी ने बाकी चरणों में महिला नेताओं को मैदान में उतारा और महिला नेताओं ने भी आधी आबादी को पूरा करने के लिए जमकर वादे किए हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी हों या बसपा प्रमुख मायावती या भाजपा की स्टार प्रचारक स्मृति ईरानी। चुनाव प्रचार में सभी ने अपनी छाप छोड़ी।

प्रियंका भी इस बार आक्रामक नजर आईं
राजनीतिक दलों के नेताओं को चुनाव प्रचार से खाली समय मिल गया। इस बार चुनाव में महिला नेताओं ने रोड शो के लिए जनसंपर्क किया और इन नेताओं की रैलियों में भी काफी भीड़ देखी गई. फिलहाल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी राज्य में चुनाव प्रचार के मामले में काफी आक्रामक नजर आईं। प्रियंका गांधी कांग्रेस की स्टार प्रचारक थीं और राज्य में पूरा चुनाव प्रचार उन्हीं के कंधों पर था। इस बार विधानसभा चुनाव की पूरी कमान प्रियंका के हाथों में रही। प्रियंका ने पश्चिम से लेकर पूरब तक इस बार रोड शो और रैलियां की। बुंदेलखंड में भी वह प्रचार के लिए पहुंचीं थीं।

हर बार के मुकाबले कम निकलीं मायावती
वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभाली और उन्होंने राज्य भर में 20 चुनावी सभाएं कीं। हालांकि कांग्रेस ने मायावती पर चुनाव में निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया. लेकिन मायावती ने भी कांग्रेस को ऐसा ही जवाब दिया। मायावती ने बाद के तीनों चरणों में अपनी गति को और बढ़ा दिया और गोरखपुर से लेकर काशी तक वह प्रचार करती नजर आईं। इस दौरान उन्होंने विरोधियों के हर सवालों का मजबूती से जवाब दिया। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इस बार पहले के चुनावों की तुलना में वह कम सक्रिय दिखाई दीं।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जोरदार प्रचार किया
भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी को भी मैदान में उतारा था। स्मृति ईरानी ने अमेठी और रायबरेली के अलावा पश्चिम से लेकर पूरब तक अपनी रैलियां की और इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला बोल। उन्होंने यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड में भी प्रचार किया। वह यूपी की कई सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए उतरीं और राजनीतिक विरोधियों पर लगातार हमलावर रहीं।

डिंपल ने आखिरी तीन चरणों में झोंकी ताकत
सपा की स्टार प्रचारक और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव हालांकि चुनाव के शुरूआती चरणों में प्रचार करती दिखायी नहीं दीं। आधे चुनाव के बाद वह अचानक ही सक्रिय हो गईं क्योंकि पूर्वांचल में उनकी रैलियों की डिमांड ज्यादा थी। बाद के चरणों में समाजवादी पार्टी ने डिंपल यादव को चुनाव में स्टार प्रचारक बनाया। लेकिन वह अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गईं। क्योंकि उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ पर बयान दिया था। जिसका अयोध्या के साथ-साथ काशी में भी संतों ने विरोध किया और डिंपल यादव को सलाह दी। समाजवादी पार्टी ने पूर्व सांसद डिंपल यादव के साथ राज्यसभा सांसद जया बच्चन को भी चुनाव में उतारा।

मुलायम की बहू अपर्णा ने अपनों पर साधा निशाना
मुलायम परिवार के लिए इस बार का चुनाव काफी कठिन था। चुनाव से ठीक पहले अपर्णा यादव बीजेपी में शामिल हो गईं। हालांकि उन्होंने लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से टिकट की दावेदारी पेश की थी लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। बीजेपी ने अपर्णा यादव का प्रयोग पूर्वांचल में रैलियां कराकर किया। बीजेपी की कोशिश अपर्णा को मुलायम परिवार के खिलाफ इस्तेमाल करने और यादव समाज में एक बड़े नेता के तौर पर तैयार करने की है।












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