यूपी में इस जगह लगती है भूतों की अदालत, सिर पटक-पटक कर रोते हैं लोग, होता है इंसाफ
फर्रुखाबाद। अपराधियों को सजा मिलनी लाजिमी है। ये कानून इंसानों पर लागू होते तो आपने देखा सुना होगा, लेकिन हम आपको एक ऐसी अदालत के बारे में बता रहे हैं जहां पर भूतों को उनके अपराध की सजा दी जाती है। भूतों की अदालत फर्रुखाबाद में स्थित सुल्तान शाह के दरबार में सजती है। सुल्तान शाह के दरबार में एक अदालत लगती है जहां भूतों के अपराध की सजा सुनाई जाती है।

सिर पटक-पटक कर मानते है अपनी गलती
फर्रुखाबाद में स्थित जिन्नातों की मस्जिद के नाम से मशहूर सुल्तान शाह के दरबार में मानसिक रूप से परेशान लोग आते हैं। पीड़ितों के परिजनों को विश्वास होता है कि उनके ऊपर भूत या किसी ऊपरी हवा का साया है। जुम्मे की रात यहां कव्वाली की जाती है, जिसे सुनते ही भूत से पीड़ित लोग हरकतें करना शुरू कर देते हैं। भूत के मरीज सिर पटक-पटक कर अपनी गलती मानते हैं। गलती मानने के बाद सुल्तान शाह उन्हें भूत-प्रेत जैसी बंदिशों से मुक्त कराते हैं।

भूतों को मिलती है फांसी की सजा
यहां जब मरीजों का इलाज होता है, तब शुरुआत में वे ऊट-पटांग हरकतें करते हैं। भूत-प्रेत के असर से ये मरीज ऐसी हरकतें करने लगते हैं जिन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। बाबा के दरबार में भूतों को उनके जुर्म के मुताबिक सजा सुनाई जाती है। कुछ केसों में भूतों को फांसी तक की सजा दी जाती है। दरबार में फांसी की सजा को पूरा करने के लिए लोहे का खंभा लगा है जिस पर फांसी की रस्म अदा की जाती है।

जंजीरों में बांधकर आते है मरीज
दरगाह की देखभाल करने वाले राजा भाई की माने तो तमाम उपरी हवाओं से परेशान लोग यहां आते हैं। पीड़ित बाबा की अदालत में पेशी पर पहुंचकर खुद स्वीकार करते हैं कि वे किस ऊपरी प्रभाव से उस व्यक्ति को परेशान कर रहे हैं। लोगों का दावा है कि वे यहां जंजीरों में बांधकर लाए गए थे और अब रोग व चिंतामुक्त हैं। लोग यहां रहकर अपने मरीजों का इलाज कराते हैं। रुकने वालों के रहने- ठहरने का इंतजाम दरगाह की ओर से किया जाता है।

350 साल पुरानी है सुल्तान शाह का दरबार
जिन्नातों की मस्जिद के नाम से मशहूर सुल्तान शाह का दरबार करीब 350 साल पुराना है। यहां पर बकायदा हर गुरुवार को एक अदालत लगती है। जहां भूतों के अपराध की सजा सुनाई जाती है। मस्जिद के पीर बाबा ने बताया कि इसके निर्माण की खास बात यह रही कि एक रात में ही इस मस्जिद का निर्माण हो गया। किसी ने मस्जिद को बनते नहीं देखा। किसी अदृश्य शक्ति ने इसका निर्माण किया।












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