Uttar Pradesh: मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत किया है आवेदन तो जान लीजीए ये 7 अहम बातें
लखनऊ, 27 अगस्त: उत्तर प्रदेश में 100 आकांक्षी ब्लॉकों (अति पिछड़े ब्लॉकों) के विकास में तेजी लाने को लेकर सरकार अपनी कवायद में जुट गई है। कुछ जुलाई में ही मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना का विज्ञापन जारी हुआ था और इसके तहत अप्लाई करने की अंतिम तिथि 24 अगस्त रखी गई थी। अब सरकार की कोशिश है कि आठ सितंबर से पहले इस हाईप्रोफाइल योजना के तहत शोधार्थियों का चयन कर लिया जाए। यूपी के पिछड़े जिलों में विकास का खाका खींचने के लिए ही IIT, NIT और अन्य प्रमुख संस्थानों के छात्रों को हायर किया जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार अपने मकसद में कामयाब होगी वहीं दूसरी ओर शोध छात्रों को रोजगार के अवसर भी मुहैया होंगे।

आठ सितंबर से पहले हो जाएगा साक्षात्कार
अधिकारियों की माने तो 8 सितंबर से पहले मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम के तहत 100 लोगों को हायर करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सरकार ने इसके लिए IIT, NIT और अन्य प्रमुख संस्थानों के लगभग 26, 686 छात्रों में से 100 शोध छात्रों का चयन करने की योजना पर काम कर रही है। यूपी की पहली एक वर्षीय फेलोशिप योजना का उद्देश्य यूपी के 34 जिलों में चिन्हित 100 आकांक्षी ब्लॉकों में जमीनी स्तर पर सरकारी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का मूल्यांकन और निगरानी करने करना है।

100 शोधार्थियों की नियुक्ति के लिए 26,686 आवेदन
राज्य योजना विभाग के सचिव आलोक कुमार ने कहा कि , "हम 8 सितंबर, 2022 से 100 लोगों को नियुक्त करने के लिए साक्षात्कार शुरू करेंगे। हमें फेलोशिप के लिए उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है, आईआईटी, एनआईटी और अन्य प्रमुख संस्थानों के छात्रों से सीएम के लिए 100 शोधार्थियों की नियुक्ति के लिए 26,686 आवेदन प्राप्त हुए हैं। एक वर्ष की अवधि के लिए फैलोशिप कार्यक्रम। फेलोशिप एक और वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है। "

100 आकांक्षी ब्लॉकों में काम करेंगे युवा शोधार्थी
दरअसल यूपी सरकार ने नीति आयोग के महत्वाकांक्षी जिलों की तर्ज पर 100 आकांक्षी ब्लॉकों का चयन किया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2018 में लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य भारत के 112 जिलों के त्वरित और प्रभावी परिवर्तन का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में फेलोशिप के लिए युवा शोध छात्रों को आकर्षित करने के कार्यक्रम को मंजूरी दी थी।

चयन के बाद शोधार्थियों को मिलेगा इतना वेतन और भत्ता
उम्मीदवारों के चयन के लिए एक विस्तृत चयन मानदंड तैयार किया गया है। चयनित लोग जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों की देखरेख में काम करेंगे और उन्हें प्रति माह 30,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। उन्हें विकास खंड के भीतर आवासीय सुविधा के साथ-साथ क्षेत्र के दौरे के लिए दस हजार प्रति माह का पारिश्रमिक दिया जाएगा जहां फेलो काम करेंगे। उन्हें साल में 12 दिन का अवकाश दिया जाएगा। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं के मूल्यांकन और निगरानी के लिए एक टैबलेट खरीदने के लिए शोधार्थियों को 15 हजार एकमुश्त दिया जाएगा।

24 अगस्त रखी गई थी आवेदन की अंतिम तिथि
इससे पहले 24 अगस्त तक राज्य सरकार ने फेलोशिप के क्षेत्र में अध्ययनरत प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों (40 वर्ष से कम आयु) से आवेदन आमंत्रित किए थे। फेलोशिप के मुख्य क्षेत्रों में डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग, डेटा गवर्नेंस, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पोषण, कौशल विकास, कृषि, ग्रामीण विकास, वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं। पर्यटन और संस्कृति, बैंकिंग, वित्त, सार्वजनिक नीति और शासन क्षेत्र को शामिल किया गया है।

शोधार्थियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी सरकार
इसके लिए सरकार ने प्रथम श्रेणी या न्यूनतम 60% अंकों के साथ स्नातक या उच्च शैक्षणिक योग्यता के साथ हिंदी में स्नातकोत्तर या पीएचडी करने वाले छात्रों को भी आवेदन करने के लिए कहा गया था। चयनित लोगों को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश प्रशासनिक एवं प्रबंधन अकादमी में दो सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले सप्ताह में, सामान्य अभिविन्यास पर और दूसरे सप्ताह में प्रोग्रामेटिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आईआईटी एवं आईआईएम जैसे विशिष्ट संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

युवा शोध छात्रों के अनुभव का सरकार को मिलेगा लाभ
लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर यशवीर त्यागी ने कहते हैं कि, "यह एक अभिनव योजना है जो युवा शोधकर्ताओं को रोजगार और मूल्यवान अनुभव प्राप्त करने के अलावा जमीनी स्तर पर विकास की समस्याओं और कार्यक्रमों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। सरकार के पास विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर कई तरह के इनपुट भी मिलेंगे। सरकार की एक अच्छी पहल है जिससे आकांक्षी जिलों के सेहत सुधारने में मदद मिलेगी।"












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