यूपी चुनाव को टाला गया तो भाजपा या सपा किसको होगा फायदा, जस्टिस के सुझाव से क्यों खड़ा हुआ सियासी बवाल?

लखनऊ, 24 दिसंबर। क्या उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को कोरोना संक्रमण की वजह से कुछ महीनों के लिए टाला जा सकता है? इसका जवाब तो फिलहाल किसी के पास नहीं है लेकिन जैसे ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर कुमार यादव ने इसको लेकर गुरुवार को टिप्पणी की, चर्चा का माहौल गर्म हो गया। एक आपराधिक मुकदमे में आरोपी को जमानत देते हुए फैसले में जस्टिस शेखर कुमार यादव ने बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर चिंता जताई और तीसरी लहर को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग को यूपी चुनाव टालने का सुझाव दे दिया। जस्टिस शेखर कुमार यादव इससे पहले भी अपनी टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। बहरहाल, जस्टिस के सुझाव के बाद एक तरफ भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि यूपी चुनाव टाल दिए जाएं तो इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। वहीं समाजवादी पार्टी ने जस्टिस की टिप्पणी पर सख्त आपत्ति जताई है और सुप्रीम कोर्ट से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस बीच में, योगी सरकार ने 25 दिसंबर की रात से नाइट कर्फ्यू लगाने समेत अन्य पाबंदियां लगा दी हैं। सपा को डर है कि जस्टिस शेखर कुमार यादव की टिप्पणी का हवाला देकर यूपी चुनाव को टाला जा सकता है। सवाल यह है कि चुनाव टलने से फायदा किसको होगा?

सपा की प्रतिक्रिया में छुपा है इस सवाल का जवाब

सपा की प्रतिक्रिया में छुपा है इस सवाल का जवाब

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने जस्टिस शेखर कुमार यादव के चुनाव टालने के सुझाव पर कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठकर इस तरह का फैसला दिया जा रहा है। किसी ने उनसे इसकी मांग नहीं की थी। रामगोपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ इस तरह के आदेश देने को लेकर कार्रवाई की जाय। कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जज की टिप्पणी का सहारा लेकर चुनाव को टाल सकती है। उत्तर प्रदेश की जनता अभी भाजपा के खिलाफ है। भाजपा को हार का डर सता रहा है। सपा की प्रतिक्रिया यह बताती है कि अगर चुनाव टाले गए तो इसका सीधा नुकसान अखिलेश यादव को होगा जो प्रचार अभियान में जोर-शोर से जुटे हैं। सपा का कहना है कि भाजपा हार के डर से चुनाव को टालना चाहती है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी जस्टिस की टिप्पणी के बाद ट्वीट कर यूपी चुनाव टालने की तरफ कुछ संकेत कर रहे हैं।

'यूपी चुनाव टाले गए तो हैरान मत होइएगा'

'यूपी चुनाव टाले गए तो हैरान मत होइएगा'

भाजपा नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि अगर ओमिक्रॉन की वजह से लॉकडाउन और यूपी चुनाव सितंबर तक टालकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाय तो हैरान मत होइएगा। जो सीधे-सीधे इस साल की शुरुआत में नहीं किया जा सका, उसको अगले साल की शुरुआत में परदे के पीछे से किया जा सकेगा। सुब्रमण्यम स्वामी ने इसके बाद वेंकट सुधींद्र नाम के यूजर को रिट्वीट किया जिसमें लिखा था कि यूपी में प्रेसिडेंट रूल का मतलब यह है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री राष्ट्रपति की मुहर से प्रदेश के लिए नीतियां बनाएंगे। इस ट्वीट के जरिए आखिर सुब्रमण्यम स्वामी क्या संकेत देना चाहते हैं? साल 2021 की शुरुआत में कोरोना लहर के दौरान पश्चिम बंगाल के चुनाव हुए थे जिसमें भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी थी। साल 2022 की शुरुआत में ही यूपी के विधानसभा चुनाव होने हैं, इसके लिए भी भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी है। चुनाव टालने के सवाल पर यूपी चुनाव में भाजपा के सह प्रभारी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि चुनाव आयोग ही इस बात का फैसला करेगा। लेकिन सवाल फिर भी उठता है कि भाजपा क्यों चाहेगी कि चुनाव टले?

क्या भाजपा के खिलाफ है यूपी की जनता?

क्या भाजपा के खिलाफ है यूपी की जनता?

सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि यूपी की जनता भाजपा के खिलाफ है इसलिए चुनाव को टाला जा सकता है। दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि लखीमपुर खीरी में केंद्रीय मंत्री के वाहन से किसानों को कुचले जाने की घटना और तीन कृषि कानूनों के बाद महीनों चले किसान आंदोलन की वजह से पश्चिमी यूपी, अवध और अन्य इलाकों में भी किसानों के अंदर भाजपा के खिलाफ रोष है जिसका असर वोट के रूप में दिख सकता है। पिछले दो महीनों से भाजपा की केंद्र और प्रदेश की सरकार पूरे अमले के साथ पूर्वांचल में लगातार शिलान्यास, उद्घाटन और रैलियां कर रही है ताकि कम से कम इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन हो तो डैमेज कंट्रोल हो। भाजपा फिलहाल डैमेज कंट्रोल में लगी है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी ताकत झोंकी है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे की सौगात, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भव्य उद्घाटन, बनारस में डेयरी प्लांट के शिलान्यास समेत अन्य कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री आए और जनसभा में पूर्वांचंल को विकसित करने की बात कही। यही नहीं उन्होंने जनता से फिर से भाजपा की डबल इंजन सरकार बनाने की अपील की। अगर यूपी में फिलहाल चुनाव टल जाए तो भाजपा राहत की सांस ले सकती है। इससे पार्टी को कुछ और समय मिल जाएगा। साथ ही, किसान आंदोलन से हुए डैमेज कंट्रोल को कम करने में भी मदद मिलेगी।

आखिर में उस जस्टिस के बारे में जिन्होंने कहा कि चुनाव टाला जाए

आखिर में उस जस्टिस के बारे में जिन्होंने कहा कि चुनाव टाला जाए

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव इसी साल सितंबर में गाय पर टिप्पणी को लेकर चर्चित हुए थे। गायों की तस्करी मामले में आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कहा था कि गाय ही एकमात्र जानवर है जो ऑक्सीजन छोड़ती है। इसके साथ ही उन्होंने संसद से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गोरक्षा को हिंदुओं का मौलिक अधिकार बनाने की अपील की। अपने फैसले में जस्टिस ने कहा था कि गोरक्षा भारतीय संस्कृति का पर्याय है और अकबर जैसे मुसलमान शासकों ने भी गोहत्या पर प्रतिबंध लगाया था। यहां यह भी याद दिलाते चलें कि भाजपा भी गोरक्षा की बात करती है और 23 दिसंबर को बनारस की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ लोगों के लिए गाय गुनाह हो गई है लेकिन हमारे लिए गाय माता है। जस्टिस शेखर कुमार यादव ने यूपी चुनाव टालने का सुझाव देते हुए 23 दिसंबर को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की। जस्टिस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इतनी विशाल जनसंख्या का मुफ्त टीकाकरण करने का अभियान शुरू किया जिसकी अदालत प्रशंसा करता है। अदालत उनसे अपील करता है कि महामारी की भयावह स्थिति को देखते हुए रैलियों और चुनाव को टाला जाय। जान है तो जहान है। अब सबकी नजरें चुनाव आयोग पर है जिसने इसी भयावह महामारी के समय में पश्चिम बंगाल के चुनाव कराया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+