पुलिस भर्ती का दुबारा आएगा रिजल्ट, हाईकोर्ट ने दिया गलती सुधारने का समय
उसे हाईकोर्ट में ये कहते हुए चैलेंज किया गया था की भर्ती प्रक्रिया में गलत तरीके से आरक्षण लागू किया गया और सामान्य सीटों पर भी आरिक्षत वर्ग को चयनित किया गया।
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे पुलिस सिपाही भर्ती मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और हाईकोर्ट ने अपना फैसला मुकदमेंबाजों के पक्ष में दिया है। हाईकोर्ट का ये बड़ा फैसला यूपी में हुई 41,610 पुलिस भर्ती मामले में आया है। हाईकोर्ट ने इस भर्ती के घोषित हो चुके रिजल्ट को संशोधित करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है की 3 महीने में परिणाम संशोधित कर नियमानुसार आरक्षण लागू किया जाए।

दरअसल यूपी में नागरिक पुलिस, पीएसी और अग्निशमन विभाग में 41,610 सिपाही भर्ती का जो रिजल्ट घोषित किया गया था। उसे हाईकोर्ट में ये कहते हुए चैलेंज किया गया था की भर्ती प्रक्रिया में गलत तरीके से आरक्षण लागू किया गया और सामान्य सीटों पर भी आरिक्षत वर्ग को चयनित किया गया। हाईकोर्ट ने सबूत के आधार पर 3 महीने में परिणाम संशोधित कर नियमानुसार आरक्षण लागू करने का निर्देश दिया है।

मामले पर नजर
41,610 पुलिस भर्ती मामले में विशेष आरक्षित वर्ग (महिला, पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित) को आरक्षण मिलता है लेकिन आरक्षण लागू करने के बाद सामान्य वर्ग की कई सीटें अभ्यर्थी ना मिलने के कारण खाली रह गईं। नियमानुसार इन खाली सीटों को सामान्य अभ्यर्थियों से ही भरा जाना था। लेकिन पुलिस भर्ती बोर्ड ने ओबीसी, एससी-एसटी की महिला अभ्यर्थियों का चयन इन सीटों पर किया। जिसे हाइकोर्ट में चैलेंज किया गया था।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने की, याचिका की ओर से कोर्ट को बताया गया की बोर्ड में भी ये नियम लागू है कि आरक्षण उसी वर्ग के तहत दिया जा सकता है जिस वर्ग का अभ्यर्थी है। ऐसे में नियमानुसार सामान्य वर्ग की खाली सीटों को सामान्य अभ्यर्थियों से ही भरा जाना था। दलीले सुनने के बाद न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय की कोर्ट ने बोर्ड को 3 महीने में परिणाम संशोधित कर नियमानुसार आरक्षण लागू करने का निर्देश दिया है।












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